नासिर से निकाह को तैयार हो गईं शहनाज

सौंदर्य के क्षेत्र में शहनाज हुसैन एक बड़ी शख्सियत हैं। सौंदर्य के भीतर उनके जीवन संघर्ष की एक लंबी गाथा है। हर किसी के लिए प्रेरणा का काम करने वाला उनका जीवन-वृत्त वास्तव में खुद को संवारने की यात्रा सरीखा भी है। शहनाज हुसैन की बेटी नीलोफर करीमबॉय ने अपनी मां को समर्पित करते हुए जो किताब ‘शहनाज हुसैन ः एक खूबसूरत जिंदगी’ में लिखा है, उसे हम यहां शृंखलाबद्ध कर रहे हैं। पेश है चौंतीसवीं किस्त...

-गतांक से आगे...

कुछ दिन बाद, धूल से ढकी एक गाड़ी सईदा बेगम और उनके बच्चों को मसूरी के पहाड़ों से वापस ले जा रही थी। शहनाज वही गाना गुनगुना रही थीं, जो उन्होंने फिल्म में देखा था, और उनकी मां उन्हें टोक रही थीं कि भले खानदानों की लड़कियां यूं सबके सामने नहीं गुनगुनातीं। लेकिन शहनाज किसी दूसरी ही दुनिया में थीं। खिड़की से बाहर देखते हुए, वह उस हसीन नौजवान के साथ गुजारी हुई शाम के एक-एक पल को फिर से जी रही थीं। जस्टिस बेग अपने परिवार को वापस पाकर बहुत खुश थे, लेकिन दिन गुजरने के साथ उन्हें अहसास होने लगा कि शहनाज आम दिनों की बनिस्पत कुछ ज्यादा ही गुम रहने लगी हैं। ‘उसे क्या हुआ है?’

उन्होंने अपनी बेगम से पूछा। ‘उसकी तबीयत तो ठीक है?’ ‘मैं आपको कुछ बताना चाहती थी। नासिर और उनका परिवार मसूरी में ही था, उन्होंने हमें अपने साथ फिल्म देखने के लिए कहा। बच्चे भी जिद करने लगे, तो मुझे उन्हें ले जाना पड़ा।  वह उसी दिन से कुछ गुम है, मुझे लगता है वह उसके बारे में सोच रही है।’ जस्टिस बेग सकते में थे, लेकिन उन्होंने चुप रहना ही मुनासिब समझा। उन्हें अंदेशा हो रहा था कि मामला अब उनके काबू से बाहर हो गया था। शहनाज खामोश और खिंची सी थीं, जाहिर था यह कच्ची उम्र का आकर्षण मात्र रहा होगा। यहां तक कि वल्ली, उनका भाई और बेस्ट फ्रेंड, भी उनकी थाह न पा सका। उसकी लगातार की गई कोशिशें-‘शाइना, आओ न, नाइनपिंस खेलते हैं’, या ‘शाइना बेडमिंटन हो जाए?’-एकदम बेकार जा रही थीं। आखिरकार जस्टिस बेग ने अपनी बेगम से शहनाज से बात करने को कहा। सईदा ने अपनी बेटी के कमरे में घंटों बिताए और जब वह बाहर आईं, तो जस्टिस बेग ने उत्सुकता से उन्हें देखा। ‘उसने क्या कहा?’ उन्होंने पूछा। ‘वह नासिर से निकाह करना चाहती है’, सईदा बेगम ने कहा। ‘लेकिन वह बहुत छोटी है’, जस्टिस बेग ने विरोध किया। ‘उसे अहसास नहीं है क्या कि उसकी उम्र निकाह लायक नहीं है?’ ‘मुझे लगता है कि अभी मंगनी कर देते हैं और बड़े होने पर निकाह करवा देंगे’, सईदा ने सुझाव दिया। जस्टिस बेग मायूस थे, शहनाज को खानदान का अगला स्टार बनाने का उनका सपना टूटता नजर आ रहा था, उन्हें कैम्ब्रिज में पढ़ाने की उनकी तमन्ना पहाड़ पर हुई एक मुलाकात से चूर-चूर हो गई। उन्होंने सीधे शहनाज से बात करने की कोशिश की, लेकिन शहनाज की पारंपरिक परवरिश उन्हें अपने पिता से निकाह की बात करने की इजाजत नहीं देती थी।