Thursday, July 16, 2020 08:06 PM

निजी स्कूलों का खर्चा उठाए सरकार

 एनएसयूआई को प्रशासन से मदद की आस, अध्यापकों के साथ अभिभावकों को भी दें राहत

सोलन-हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय द्वारा कालेजों से एफिलेशन, इंस्पेक्शन व कॉन्टिन्यूएशन फीस पर 18 प्रतिशत टैक्स वसूलने के फैसले का कड़ा विरोध किया है। एनएसयूआई के प्रदेशाध्यक्ष छत्तर ठाकुर ने कहा कि पहले इस फीस पर कोई टैक्स नहीं लिया जाता था, लेकिन कालेजों द्वारा लाखों रुपयों की इस एफिलिएशन फीस के साथ 18 प्रतिशत अतिरिक्त टैक्स की वजह से जो आर्थिक बोझ कालेजों पर पड़ेगा। उसकी पूर्ति करने के लिए कालेज प्रशासन छात्रों की फीस बढ़ाकर इस बोझ को अप्रत्यक्ष रूप से छात्रों पर ही डालेगा। छत्तर ठाकुर ने कहा कि कोरोना संकट के इस समय में जब प्रदेशभर के छात्र सरकार से फीस और रूम रेंट माफी की मांग कर रहे हैं तो सरकार जवाब में छात्रों को कोरोना राहत के नाम पर अतिरिक्त 18 प्रतिशत फीस बढ़ोतरी कर रही है। उन्होंने कहा कि पूर्व कांग्रेस सरकार ने प्रदेश के हजारों छात्रों के हितों को मद्देनजर रखते हुए यूनिवर्सिटी द्वारा कालेजों से ली जाने वाली इस एफिलिएशन फीस को ही रद्द करने के आदेश दिए थे लेकिन कुछ औपचारिकताओं के कारण ये रद्द नहीं हो पाई थी। लेकिन इसके विपरीत वर्तमान भाजपा सरकार की ये हरकतें मुख्यमंत्री जयराम और उनके शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज के छात्र विरोधी होने का प्रत्यक्ष प्रमाण है। इस मौके पर एनएसयूआई सोलन के जिला अध्यक्ष तुषार स्तान ने सरकार द्वारा निजी स्कूलों के छात्रों से ट्यूशन फीस को वसूलने संबंधी फैसले पर सरकार से मांग की है कि जब तक स्कूल खुल नहीं जाते तब तक ये फीस छात्रों के अभिभावकों से लेने के बजाय सरकार के द्वारा ही निजी स्कूल के अध्यापकों की सैलरी प्रदान की जाए।