Friday, December 06, 2019 09:59 PM

निवेशक सम्मेलन पर हुए खर्च पर श्वेत पत्र जारी करे सरकार: राठौर

चंडीगढ़-हिमाचल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप राठौर ने धर्मशाला में हाल ही में हुये ‘राईजिंग हिमाचल वैश्विक निवेशक सम्मेलन‘ में लगभग 93000 करोड़ रूपये के निवेश समझौते होने को राज्य सरकार के कागजी दाव करार देते हुये इस समूचे आयोजन पर हुये खर्च पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है। श्री राठौर ने आज यहां एक संवाददाता सम्मेलन में राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि वह इस निवेश लाने की आड़ में राज्य की जमीनों को फ्लैटों, होटलों और रेसार्ट्स के निर्माण के लिये बिल्डरों, उद्योगपतियों और बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को बेचना चाहती है जिसे कांग्रेस किसी भी सूरत नहीं होने देगी और ऐसी किसी भी कोशिश के विरोध में सड़कों पर उतरेगी। उन्होंने दावा किया कि राज्य में पर्यटकों की संख्या में गिरावट आने के कारण पर्यटन उद्योग चौपट हो रहा है आर्थिक प्रोत्साहन नहीं होने के कारण राज्य के उद्योग पलायन कर रहे हैं। राज्य पर कर्ज का बोझ बढ़ कर लगभग 60000 करोड़ रूपये हो गया है। उन्होंने सवाल किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का निवेशक सम्मेलन में आने का औचित्य क्या था। राज्य के लोगों को उम्मीद थी कि श्री मोदी निवेशक सम्मेलन में आ रहे हैं तो सम्भवत: औद्योगिक पैकेज और राज्य को कर्ज के बोझ से राहत देने के लिये किसी पैकेज की घोषणा करेंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि श्री मोदी प्रधानमंत्री बनने के बाद कम से कम तीन बार राज्य के दौरे पर आये लेकिन उन्होंने हिमाचल के कोई घोषणा नहीं की। उन्होंने केंद्र सरकार से पूर्वोत्तर राज्यों की तर्ज पर हिमाचल को भी आर्थिक पैकेज देने की मांग की। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस कार्यसमिति की दो दिन पूर्व दिल्ली में सभी पार्टी प्रदेशाध्यक्षों की हुई बैठक में 30 नवम्बर को दिल्ली में अखिल भारतीय स्तर पर ‘भारत बचाओ‘ महारैली का आयोजन करने का फैसला लिया गया है। उन्होंने कहा कि इस समय जरूरत इस बात की है कि जितने भी विपक्षी दल हैं सभी सजग होकर सरकार की नीतियों का विरोध करें। उन्होंने आरोप लगाया कि रिजर्व बैंक से कथित तौर पर पैसा छीन लिया गया। सार्वजनिक उपक्रमों, हवाइअड्डे, रेलवे स्टेशन, बंदरगाहें, भारत पैट्रोलियम जैसे उपक्रमों को बेचने की कवायद चल रही है। भारत संचार निगम निगम लिमिटेड भी घाटे में चल रहा है और हो सकता है इसे भी बेच दिया जाये। सार्वजनिक बैंकों की स्थिति ठीक नहीं है। ये बैंक घाटे में चल रहे हैं। बैंकों का विलय किया गया है लेकिन उन्हें लगता है कि इसका कोई ज्यादा फायदा होने वाला नहीं है। बैंकों में संचित लोगों की पूंजी सुरक्षित नहीं है।एक सवाल पर उन्होंने कहा कि जब उन्होंने प्रदेश में पार्टी की कमान सम्भाली तो इसमें गुटबाजी चरम सीमा पर थी। उनका सबसे पहला प्रयास था कि वे पार्टी के सभी नेताओं वीरभद्र सिंह, आनंद शर्मा समेत अन्य दिग्गज नेताओं को एकजुट कर एक मंच पर लेकर आयें जिसमें वह सफल हुये हैं। वह पार्टी काे उसके कार्यालय के बाहर लाने में भी सफल रहे हैं क्योंकि पहले पार्टी के कार्यक्रम उसके कार्यालय में ही होते थे लेकिन अब पार्टी जनता के बीच जा रही है। प्रदेश पार्टी संगठन के पुनर्गठन को लेकर सवाल उन्होंने कहा कि उन्होंने कुछ ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्तियां की हैं तथा शेष ब्लॉकों में भी ये नियुक्तियां जल्द कर दी जाएंगी तथा इसके बाद वह प्रदेश पार्टी संगठन का भी पुनगर्ठन करेंगे।