Thursday, November 14, 2019 02:42 PM

निवेश की नई तस्वीर

निवेश के दरिया को मोड़ने की कोशिश फिर पहाड़ कर रहा है, तो यह हिमाचल के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का ऐसा संकल्प है जो एक ‘तस्वीर बनाने की कवायद’ और उससे मुखातिब होने का माध्यम भी है। तस्वीर को रेखांकित करते एमओयू का जमावड़ा जब इन्वेटर मीट का संज्ञान लेगा, तो पर्वतीय क्षमता का आरोहण स्वयं में पर्वतीय हो सकता है। यह इन्वेटर मीट पूरे देश के हालात और कर्मक्षेत्र के प्रसार का हिमाचल से मिलन कराएगी। ऐसे में सरकार अब तक अगर एमओयू कर पाई, तो बुनियादी तौर पर हिमाचल के कुछ क्षेत्र निवेश की हाजिरी में खुद को क्षमतावान साबित कर रहे हैं। बेशक ऊर्जा क्षेत्र में संभावनाओं की सबसे अधिक आशा रही है, लेकिन पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन, आवासीय, सूचना प्रौद्योगिकी, शहरी विकास तथा आयुर्वेद क्षेत्र में एमओयू का उत्साहवर्द्धक रुझान प्रदेश की करवटें बदल सकता है। कुल 566 समझौता ज्ञापनों में दर्ज परियोजनाओं की अनुमानित राशि अगर करीब 81 हजार बैठती है, तो यह भी देखना होगा कि प्रतीक्षारत हिमाचल के संदर्भ कैसे बदलेंगे। सात-आठ नवंबर इस लिहाज से हिमाचल के निवेश चरित्र पर एक साथ कई टिप्पणियां कर रहे हैं। जाहिर है जिस क्षेत्र में निवेश की सबसे अधिक आपूर्ति होगी, उसे केवल निजी हाथों का सहारा नहीं मिलेगा, बल्कि इस तरह हिमाचली क्षमता भी उभर कर सामने आएगी। बहरहाल निवेश की नई तस्वीर में हिमाचल कितना लोकप्रिय हो पाता है, यह समझौता ज्ञापनों को मूर्त रूप में देखने की कसौटी से तय होगा। जयराम ठाकुर सरकार ने जिस खाके पर काम करना शुरू किया, उसकी गणना सारा परिदृश्य बदल सकती है। आयुष, आईटी तथा आवास नीति की प्रस्तुति में परिवर्तन करते हुए सरकार ने निवेश के लिए सुविधाओं का विस्तार किया है। निवेश के ज्ञापन समझौतों में रोजगार के नए अवसर पल्लवित होते हैं। इस तरह इन्वेस्टर मीट के परिणाम अपने साथ प्रत्यक्ष व परोक्ष फायदों की फेहरिस्त भी तैयार कर सकते हैं, जबकि इसी के साथ शिक्षा की नई मंजिलें दिखाई देंगी। हर तरह का निवेश केवल व्यापारिक नफा नुकसान न होकर प्रदेश के कामकाजी माहौल की संगत तथा कार्यसंस्कृति की प्रवृत्ति बदल सकता है। कमोबेश भारत का हर प्रदेश अपने-अपने दायित्व में निजी निवेश की परिपाटी जोड़ रहा है, तो एक तरह की ऐसी प्रतिस्पर्धा है, जो आर्थिकी का तुलनात्मक अध्ययन भी होगी। कुछ दिन पहले गोवा जैसे राज्य ने वाइब्रेंट गोवा का आयोजन करते हुए विदेशी निवेश को हांक लगाई है, तो इसी कड़ी में मध्यप्रदेश से जम्मू-कश्मीर तक राज्यों की आवाज गूंज रही है। यह ‘मेक इन इंडिया’ से ‘स्टार्ट अप इंडिया’ तक और भारतीय संस्कृति, संभावना से पर्यटन आकर्षण तक अधोसंरचना विकास के विकल्प के रूप में राज्यों की अर्जित ऊर्जा का समावेश है। ऐसे में जयराम सरकार पहली बार प्रदेश की संभावनाओं से निवेशक की मुलाकात कराने में सफल होती है, तो लाजिमी तौर पर विकास को ऐसे क्षेत्र भी दिखाई देंगे, जो आज तक तिरोहित रहे हैं। खास तौर पर शहरी विकास तथा आवासीय सुविधाओं में अगर निजी योगदान कुशलता से प्रदेश की पृष्ठभूमि बदलता है, तो सुव्यवस्थित ढांचे में आर्थिकी का स्थान भी सुनिश्चित होगा। देखना यह होगा कि हिमाचल विकास के प्रति अपने नजरिए को अब किस अंदाज में पेश करता है और निजी निवेश के लिए मैत्रीपूर्ण वातावरण का नया आगाज कैसे होता है। यह दीगर है कि बड़े निवेश के बीचोंबीच ऐसे रास्ते सुरक्षित रहने चाहिएं ताकि हिमाचल का लघु निवेशक अपनी क्षमता को निरंतर प्रदर्शित कर पाए।