Friday, December 13, 2019 07:22 PM

निवेश लाने के लिए बदली नीतियां

हिमाचल की तरक्की के लिए सरकार ने छह विभागों की पालिसी में किया बदलाव, कई जरूरी कदम भी उठाए

शिमला - जयराम सरकार ने छह विभागों की पालिसी में बदलाव कर निवेश को धरातल पर उतारने का प्रयास किया है। यह पहला अवसर है कि राज्य सरकार ने औद्योगिक इकाइयों के अलावा दूसरे क्षेत्रों में निवेश खींचने के लिए कदम उठाए हैं। इसके तहत हिमाचल में पहली बार फिल्म पालिसी बनाई गई। राज्य सरकार ने आयुर्वेदा के फील्ड में पहली बार फोकस करते हुए आयुष पालिसी तैयार की। इसी तरह सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र को आधार बनाकर जयराम सरकार ने आईटी एंड ईएसडीएम पालिसी को अमलीजामा पहनाया।पटरी से उतरे हाइड्रो सेक्टर को दोबारा स्थापित करने के लिए पावर पालिसी में जबरदस्त संशोधन किया। इसी तरह टूरिज्म पालिसी  2019 तैयार कर निवेश को धरातल पर उतारने की तैयारी हुई। इन्वेस्टर्स मीट के लिए अब तक हुए 93 हजार करोड़ के एमओयू बेशक पीठ थपथपाने के लिए सरकारी आंकड़ा उपलब्ध है। इससे बढ़कर जयराम सरकार की उपलब्धि दूसरे सेक्टर को फोकस करना रही है। इसी कारण इन्वेस्टर्स मीट से पहले छह विभागों की पालिसी तैयार कर निवेशकों को आकर्षित किया गया। जाहिर है कि इससे पहले भी इन्वेस्टर्स मीट आयोजित होती रही हैं। इससे पहले सभी सरकारों का फोकस इंडस्ट्रियल इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर  पर फोकस रहा है। यह पहला अवसर है कि जयराम सरकार ने पर्यटन, आयुष, आईटी, पावर, फिल्म, शिक्षा, कृषि, बागबानी तथा इको टूरिज्म के क्षेत्र को महत्व दिया है। इन नई संभावनाओं के साथ जयराम सरकार ने निवेशकों के लिए प्रदेश में निवेश के नए फाटक खोले हैं। बताते चलें कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट के महायोजन को सियासी चश्मे से देखने की कवायद शुरू हो गई है। इसके चलते इस आयोजन पर खर्च पाई-पाई का हिसाब मांगा जाना तय है। अगले विधानसभा सत्र में भी इन्वेस्टर्स मीट का लेखा-जोखा पूछा जाएगा। इसके अलावा आम जनता भी इस आयोजन के औचित्य के तर्क को पड़तालने में जुट गई है।

इन्वेस्टर्स मीट की शानदार मेजबानी

राज्य सरकार ने इन्वेस्टर्स मीट की शानदार मेजबानी से नया कीर्तिमान भी हासिल किया है। खासकर अब तक हिमाचल में इस तरह का शानदार आयोजन पहली बार हुआ है। इस कारण इस आयोजन की सफलता और असफलता की चर्चा होना लाजिमी है। बावजूद इसके राज्य सरकार ने छह अलग-अलग विभागों की पालिसी तैयार कर प्रदेश में निवेश की नई संभावना पैदा की है।

एनओसी का झंझट भी खत्म

नीतियों में बदलाव के अलावा सरकार ने एनओसी का झंझट भी खत्म किया है। इसके अलावा लैंड लीज नियमों का सरलीकरण किया है। धारा-118 में बिचौलियों को रोकने के लिए इसे ऑनलाईन किया है। राज्य सरकार के ये प्रयास धरातल पर निवेश खींचने के लिए गंभीर दिखते हैं।

ग्राउंड ब्रेकिंग पर फीडबैक लेंगे मुख्यमंत्री

शिमला - निजी कंपनियों के साथ निवेश को हुए एमओयू पर ग्राउंड ब्रेकिंग फीडबैक लेने को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर अफसरशाही के साथ बैठक करने जा रहे हैं। बैठक महत्त्वपूर्ण होगी, जो कि शुक्रवार को सचिवालय में बुलाई गई है। इसमें अलग-अलग सेक्टर के सभी अधिकारी बुलाए गए हैं, जो सीएम को बताएंगे कि उनकी आगे की रणनीति क्या है। अफसरशाही के फीडबैक के साथ सरकार अपना आगे का काम शुरू करेगी। कौन-कौन से उद्योग धरातल पर उतर सकते हैं और उनको जमीन पर लाने के लिए किस तरह के काम आगे किए जाने हैं, इस पर चर्चा होगी। संबंधित विभागों के अधिकारी बताएंगे कि उनके क्षेत्र की कौन सी कंपनी इंट्रस्टेड है और उसे कहां पर जमीन दी जा सकती है। उद्योग विभाग के पास कहां-कहां पर जमीन उपलब्ध है और लैंड बैंक को बढ़ाने के लिए क्या किया जा सकता है। इन्वेस्टर मीट के बाद अब सरकार का असल कार्य है, जिसे करने के लिए अब जयराम सरकार जुटेगी। शुक्रवार को होने वाली बैठक में इस पर पूरी रणनीति बनेगी और इन्वेस्टर मीट में सामने आई कमियों पर भी बात की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की गल्तियां न हो सकें। बता दें कि 27 दिसंबर को सरकार के दो साल पूरे होने पर निवेश पर ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी करने की भी सोची गई है।

अलग सैल देखेगा राज्य में निवेश का काम

विधानसभा के शीत सत्र में आएगा इन्वेस्टमेंट प्रोमोशन अथारिटी पर कानून

शिमला - हिमाचल प्रदेश में इन्वेस्टमेंट प्रोमोशन अथारिटी के गठन के लिए सरकार विधानसभा के शीतकालीन सत्र में कानून लाएगी। यह अथारिटी कानून के दायरे में होगी, ताकि इसे अलग से स्वायत्ता मिले और इसका काम आसान हो जाए। यह अथारिटी सिर्फ यहां पर निवेश को लाने और निवेशकों से चर्चा का काम करेगी। इसमें आईएएस अधिकारी को तैनात किया जाएगा, जिसके अधीन निजी क्षेत्र के लोग लगाए जाएंगे। अलग से एक संस्था होने से यहां पर निवेश के मामले में ज्यादा काम हो सकेगा जोकि अभी वर्तमान सरकार महकमे नहीं कर पाएंगे। इन्वेस्टर मीट के बाद अब सरकार ने आगे की सोचनी शुरू कर दी है। आंध्र प्रदेश में इस तरह की अलग अथारिटी बनाई गई है, जो वहां पर केवल निवेश पर काम करती है। इसी तरह से हिमाचल में भी अलग विंग हो तो निवेश में आसानी होगी। सरकार ने 93 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा  के निवेश को एमओयू कर लिए हैं, लेकिन अब चुनौती इनको धरातल पर उतारने की है। ऐसे में सरकार का उद्योग महकमा इस काम को पूरी तरह से नहीं कर पाएगा, क्योंकि उसके पास और भी दूसरे काम हैं और आधारभूत ढांचा पहले से चल रहे कार्यों में जुटा है। इसलिए सरकार को जरूरत है कि ऐसा विंग हो जो सिर्फ इस काम को करे। सूत्रों के अनुसार विधानसभा के शीतकालीन सत्र में इससे संबंधित कानून लाया जाएगा और अथारिटी के लिए नियम तय किए जाएंगे।

जयराम ठाकुर ने धर्मशाला में किया था ऐलान

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर धर्मशाला में इन्वेस्टमेंट प्रोमोशन अथारिटी को बनाने का एलान कर चुके हैं, जिस पर अधिकारियों ने सोचना शुरू कर दिया है। इसका खाका जल्द ही सरकार के सामने लाया जाएगा, जिसे केबिनेट में मंजूरी दिलाने के साथ अगले महीने होने वाले विधानसभा सत्र में लाया जाएगा।