नींद की दवाइयों का सेवन कितना सुरक्षित

बहुत दिनों से सही से नींद न आना एक गंभीर समस्या है। कई लोग इस समस्या से मुक्ति पाने के लिए नींद की दवाइयों का सेवन करना शुरू कर देते हैं, क्योंकि उन्हें इसे खाने के बाद बेसुध होकर नींद आ जाती है और उठने के बाद काफी अच्छा भी लगता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये गोलियां कितनी सुरक्षित हैं। नींद की गोलियों के सेवन के बाद तनाव से मुक्ति मिल जाती है, लेकिन क्या स्वास्थ्य पर इसका कोई असर नहीं पड़ता है, दिनभर की थकान के बावजूद भी बिस्तर पर नींद न आए, तो नींद की गोलियों का सहारा लेना ही पड़ता है। पर यही नींद की गोलियां हमें धीरे-धीरे मौत की ओर धकेल रही हैं, जिसका हमें खुद ही अंदाजा नहीं है। पिछले पांच साल के दौरान बाजारों में नींद की गोलियों की बिक्री दोगुना बढ़ी है...

अगर आप भी मीठी और सुकून भरी नींद के लिए स्लीपिंग पिल्स लेने के आदि हो चुके हैं, तो जरा संभल जाएं। ये गोलियां लंबे समय तक और हाई डोज में लेने पर जानलेवा साबित हो सकती हैं।नींद की गोलियों का सेवन सिगरेट की तरह ही खतरनाक हैं। इन गोलियों से ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक, सिदर्द, कैंसर और यहां तक की मौत का भी खतरा होने की संभावना हो सकती है। आइए जानते हैं नींद की गोलियों के और कौन-कौन से साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं।

याददाश्त होती है कमजोर

लंबे समय तक नींद की गोलियां लेने के कारण रक्त नलिकाओं में थक्के बन जाते हैं, याददाश्त कमजोर हो जाती है और बेचैनी की शिकायत आम हो जाती है। नींद की गोलियों का सेवन करने से पहले डाक्टर की सलाह जरूर लें।

गर्भस्थ शिशु पर पड़ता है बुरा असरः अगर नींद की गोलियां गर्भावस्था में ली जाए, तो गर्भस्थ शिशु पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है और वह गंभीर विकृतियों का शिकार हो सकता है।

कोमा में जाने या मौत का खतराः यदि आप रोज एक गोली लेने के बजाय उससे अधिक गोलियों का सेवन करते हैं, तो आपके लिए खतरे की घंटी बज सकती है। वे लोग जो दमा के शिकार हैं उन्हें इसका खास ख्याल रखना होगा।

दिल के दौरे का खतराः डाक्टरों के मुताबिक नींद की अधिक गोलियों का सेवन करने से हार्ट अटैक का खतरा 50 गुना अधिक बढ़ जाता है। वैज्ञानिकों ने नींद की दवाओं में मौजूद तत्त्व जोपिडेम को दिल की बीमारियों की वजह बताया है।

स्नायु तंत्र हो जाता है शिथिलः नींद की गोलियां स्नायु तंत्र को शिथिल कर देती हैं, इसलिए अगर लंबे समय तक इनका सेवन किया जाए, तो स्नायु तंत्र संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा इनमें जो तत्त्व होते हैं, उनके साइड इफेक्ट्स होते हैं।