नेता प्रशिक्षण केंद्र

नवेंदु उन्मेष

वरिष्ठ पत्रकार

एक दिन शहर में घूम रहा था। एक मकान के ऊपर टंगे एक बोर्ड पर नजर गई। बोर्ड पर लिखा था - नेता प्रशिक्षण केंद्र। बोर्ड देखकर जिज्ञासा जगी और प्रशिक्षण केंद्र के कार्यालय में पहुंचा। वहां देखा कि एक गांधी टोपीधारी सज्जन कुर्सी पर जमे हुए थे। उन्होंने मुझे देखते ही मेरा अभिवादन किया और सामने रखी कुर्सियों की ओर इशारा करते हुए बैठने को कहा। मैं कुछ बोलता कि इससे पहले उन्होंने टोका। क्या आप नेता बनना चाहते हैं। मैंने कहा विचार कर रहा हूं। बोले अच्छी बात है। आप मेरे प्रशिक्षण केंद्र में दाखिला लें। मैं आपको एक नंबर का नेता बना दूंगा। फीस भी बहुत मामूली है, कोर्स भी मात्र एक साल का है। उनकी सुनने के बाद मैंने टोका कि इस कोर्स को करने से क्या लाभ होगा? इसकी उपयोगिता किस फील्ड में होगी। वह बोले - इसकी उपयोगिता कई फील्ड में है। नेताओं की जरूरत राजनीतिक दलों, मजदूर संगठनों, कर्मचारी संगठनों, गैर कर्मचारी संगठनों, कोयला मजदूर संगठनों तथा खान मजदूर संगठनों को है। मतलब साफ है, नेता प्रशिक्षण के बहुत फायदे हैं। प्रत्येक संगठन को प्रशिक्षित नेता की जरूरत है। उनसे मैंने पूछा वर्तमान नेताओं की भाषण कला के बारे में आपका विचार क्या है। वह बोले आज के नेताओं को बोलना नहीं आता है। बोलते-बोलते उनकी जुबान फिसल जाती है और बात जूता-पजामा उतारने तक जाती है। नेता एक-दूसरे को विरोधी नहीं, बल्कि अपना दुश्मन समझते हैं। नेताओं के भाषण कला कोर्स पर चर्चा चली, तो कहने लगे - नेता बनने के लिए सबसे पहला गुण यह है कि उसे झूठ बोलना आता हो। सच बोलने वाला नेता कहीं टिकता नहीं है। कोर्स में सच पचाने की कला सिखाई जाएगी और झूठ पर अड़े रहने के बारे में बतलाया जाएगा। दल-बदल पर चर्चा चली, तो उन्होंने कहा कि नेताओं को दल-बदल के बारे में भी कोर्स कराया जाएगा। नेताओं का अवसरवादी होना बहुत जरूरी है। मौका देखते ही उन्हें दल और पाला बदलने की कला आनी चाहिए। नेता प्रशिक्षण केंद्र के कोर्स के बारे में जानकारी लेने के बाद मैंने उनसे विदा लेना उचित समझा। अभिवादन करते हुए फिर आने का आश्वासन देने के बाद वहां से निकल गया। सोच रहा था कि आज के नेताओं को भी प्रशिक्षण की जरूरत है। किसी भी व्यक्ति को बिना लाइसेंस लिए नेतागिरी की दुकान नहीं चलाने की व्यवस्था कानून में होनी चाहिए।

 

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