Monday, July 22, 2019 01:49 PM

नेरवा में सस्ते कर्ज के नाम पर ठगी

नेरवा—पुलिस प्रशासन द्वारा बार-बार जागरूक करने के बाद भी ऑनलाइन ठगी के मामलों में कमी नहीं आ रही है। आए दिन इस प्रकार के मामले सामने आ रहे हैं जिसमें लोग नासमझी में अपनी बैंक से संबंधित सूचनाएं शेयर कर अथवा लालच में आ कर लुट रहे हैं। ऐसा ही एक मामला नेरवा में भी सामने आया है। इस मामले में आसान ऋण के नाम पर एक बेरोजगार युवक 43 हजार सात सौ रुपए से हाथ धो बैठा है। नेरवा के शिल्ला निवासी विनोद ने बताया कि उसे ग्लोबल फाइनांस कंपनी के नाम से एक फोन आया एवं उसे कहा गया कि आपको बहुत ही कम औपचारिकताओं और न्यूनतम ब्याज दर पर ऋण के लिए चुना गया है। विनोद फोन कर्ता के झांसे में आ गया व कहा कि उसे दस लाख का लोन लेना है व इसकी औपचारिकताएं बताई जाएं। फोन कर्ता ने उससे दस्तावेज के रूप में बैंक पासबुक, आधार कार्ड, पैन कार्ड की फोटोस्टेट कॉपी के अलावा दो पासपोर्ट साइज फोटों की डिमांड की गई। उक्त दस्तवेज व्हाट्सएप करने के दो दिन बाद विनोद को उसके व्हाट्सएप नंबर पर अप्रुवल लेटर मिला व कहा गया कि 3450 रुपए लोन की प्रोसेसिंग फीस जमा करवानी होगी। विनोद द्वारा 3450 रुपये जमा करवाने के उपरांत 15 हजार रुपए की जीएसटी के रूप में मांग की गई। कथित कंपनी द्वारा डिमांड की गई उक्त रकम जमा करवाने के बाद उसे एक अग्रीमेंट फॉर्म भेजा गया व कहा गया कि एग्रीमेंट की फीस 34 हजार पांच सौ रुपए है जोकि आधी कंपनी जमा करवाएगी व आधी ग्राहक को जमा करवानी होती है। अभी तक शातिरों की चाल से अनभिज्ञ विनोद ने 17 हजार 250 रुपए की यह रकम भी जमा करवा दी। इसके बाद उससे कोर्ट की लेट फीस के नाम पर आठ हजार एक रुपए की डिमांड की गई। शातिरों के जाल में पूरी तरह फंस चुके विनोद ने यह रकम भी उनके खाते में जमा करवा दी। इसके बाद जब कोई भी जवाब नहीं आया तो उसका माथा ठनका व उसने अपनी रकम वापस करने के लिए फोन किया तो जवाब दिया गया कि रकम वापस करने के लिए एक अनापत्ति माणपत्र बनना है जिसकी फीस दस हजार रुपये जमा करवानी पड़ेगी। विनोद अब समझ चुका था कि वह शातिरों के हाथों लुट चुका है। परंतु उसको यह समझ तब आई जब वह करीब 45 हजार रुपए से हाथ धो चुका था।