Monday, October 21, 2019 12:13 AM

नोटबंदी ने बर्बाद किया सेब उद्योग

ठियोग -केंद्र व प्रदेश की भाजपा सरकार की गलत नीतियों  व कुप्रबंधन का खामियाजा बागबानों को भुगतना पड़ रहा है। नोटबंदी व जीएसटी को अव्यवहारिक तरीके से क्रियान्वयन करवाने जैसे निर्णय का बुरा प्रभाव सेब की आर्थिकी पर अब देखने को मिल रहा है। जुब्बल कोटखाई के पूर्व विधायक व पूर्व मुख्य संसदीय सचिव रोहित ठाकुर ने जारी एक बयान करते हुए कहा है कि किसानों-बागवानों के लिए मोदी सरकार का कार्यकाल सबसे बुरे दिन लेकर आया। वर्ष 2016 के मोदी सरकार के नोटबन्दी के तुगलकी फरमान से  जहां पूरा देश आर्थिक मंदी की चपेट में आ चुका है वहीं इसका सर्वाधिक दुष्प्रभाव बाजार में नकदी की कमी के कारण कृषि क्षेत्र पर पड़ा है। आज किसान व बागबान भाजपा की नीतियों से त्रस्त पड़ा हुआ है। नोटबंदी के उपरांत वर्ष 2016 से सेब उद्योग पर भी ग्रहण लग चुका है और निरंतर 3 वर्षों में प्रतिवर्ष प्रति पेटी सेब में 200 से 300 रुपये की गिरावट देखी गई है। मौजूदा समय  में सेब की कीमत इतनी घट गई हैं कि जो सेब की कीमत 10 साल पहले हुआ करती थी वो बागवानों को आज मिल रही हैं। गत वर्ष 2018 में मात्र 1.50 करोड़ सेब की पेटियों का उत्पादन हुआ था और इतना कम उत्पादन होने के बावजूद भी बागवानों को सही मूल्य नहीं मिला। सेब की कीमतों में भारी गिरावट को देखते हुए बागबानों को मजबूरन 20 से 25  सेब ’एमआईएस के तहत सस्ते ठाकुर पर देना पड़ रहा है। रोहित ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में सेब की आर्थिकी 4000 से 5000 करोड़ के बीच में रहती थी। सरकार की गलत नीतियों और कुप्रबंधन के कारण सेब के दामों में भारी गिरावट को देखते हुए इस वर्ष यह आर्थिकी 2000 करोड़  से 2500 हजार करोड़ के ’बीच आधे में ही’ सिमटने का अंदेशा लगाया जा रहा है। सरकार के कुप्रबंधन का आलम ये हैं बागवानों को ट्रे नहीं मिल रही और आए दिन ट्रे की कालाबाजारी के मामले आम देखने को मिल रहे हैं। सेब पर लागत मूल्य को नियंत्रित करने में सरकार विफल रही है जबकि विश्व स्तर पर पेट्रोलियम पदार्थों के मूल्यों में भारी कमी आई थी परंतु उसका लाभ मोदी सरकार ने आम जनता को नहीं दिया। उन्होंने कहा कि किसानों-बागबानों को सेब के उचित दाम ना मिलने से परिवार के खर्चे चलाना भी मुश्किल हो गया हैं। उन्होंने सरकार से मांग की है कि एमआईएस के तहत बागवानों  के सेब का भुगतान शीघ्र किया जाए। रोहित ठाकुर ने कहा कि केंद्र सरकार  हिमाचल से सौतेला व्यवहार कर रही हैं जबकि  जम्मू कश्मीर में केंद्र सरकार द्वारा बागबानों का सेब खरीदा जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग कि वे केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर की तर्ज  पर हिमाचल के बागबानों का सेब खरीदने की मांग उठाएं जिससे बागबानों को राहत मिल सकें।