Monday, June 24, 2019 06:11 PM

न जात; न पात, बस मुद्दा हो सिर्फ विकास

लोकसभा चुनावांे की रणभेरी बजते ही सियासी पारे मंे आया उछाल हिमाचल मंे भी चढ़ता जा रहा है। सियासी दलों के साथ-साथ टिकट के कुछ चाह्वान जाति को मुद्दा बनाकर चुनावी समर मंे उतरने का दम भर रहे हैं। पर क्या जाति की बैसाखियों के सहारे विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की पगडंडियों पर चलना उचित है! क्या जाति के नाम पर चुनावी समर मंे उतरने वाले नुमाइंदे लोकतंत्र के लिए खतरा नहीं हैं, इन्हीं मुद्दों पर लोगांे की राय सामने ला रहा है, प्रदेश का अग्रणी मीडिया गु्रप ’दिव्य हिमाचल’                  हामिद खान, चंबा

राजनीतिक हित साधने का प्रयास

संजय का कहना अब समय वे नहीं है कि लोगों को जात-पात के आधार पर बांटकर राजनीतिक हित साधा जा सके। संजय का कहन है कि ऐसी बातें लोकतंत्र के लिए बिल्कुल भी सही नही हैं।

नेता के कामकाज पर ही देंगे वोट

विपिन का कहना है कि अब जाति नहीं बल्कि मुददों की राजनीति का दौर है। ऐसे में हिमाचल में जातिवाद की राजनीति का कोई मतलब नहीं रह जाता है। लोग जाति नहीं बल्कि नेता के कामकाज को देखकर उसका चुनाव करते हैं।

जाति आधार पर बांटना सही नहीं

अमरजीत सिंह का कहना है कि जाति के आधार पर लोकसभा चुनाव लड़ना स्वस्थ लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं है। लोकसभा चुनाव से जाति विशेष नहीं, बल्कि देश के प्रतिनिधित्व का अवसर है। ऐसे में लोकसभा चुनावों को जाति के आधार पर बंटाना कतई सही नहीं है।

संकीर्ण सोच लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं

सुरेंद्र कौशल ने जाति के आधार पर चुनाव लड़ने का ऐलान करने वालों को नसीहत दी है कि वे भूल जाएं कि उनके ऐसे प्रयासों को लोग स्वीकार करेंगे। ऐसी संकीर्ण सोच लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है।

जाति विशेष की राजनीति का कोई स्थान नहीं

किशोर शर्मा का कहना है कि हिमाचल में जाति विशेष की राजनीति का कोई स्थान नहीं है। लोग नेता के कामकाज को देखकर उसका चुनाव कर प्रतिनिधित्व का मौका देते हैं। ऐसे में जो कोई भी जाति के आधार पर चुनाव लड़ने की बात कह रहा है वह उनकी संकीर्ण मानसिकता ही कही जा सकती है।

समाज में खाई बांटने का प्रयास

 प्रकाश कपूर का कहना है कि हिमाचल जैसे शांतिप्रिय प्रदेश में अभी तक जातिवाद की राजनीति कभी देखने को नहीं मिली है। बिहार व उत्तर प्रदेश में भी अब जाति या समुदाय विशेष की राजनीति करीब-करीब खत्म हो गई है। हिमाचल में जाति के आधार पर लोकसभा चुनाव लड़ने का ऐलान करने वाले बेवजह समाज में खाई बांटने का प्रयास कर रहे हैैं।