Wednesday, September 30, 2020 01:54 AM

पढ़ाई का माहौल है सुंदरनगर में

सुकेत रियासत के नाम से प्रख्यात सुंदरनगर आज शिक्षा का हब बनकर उभरा है। लाखों छात्रों का भविष्य संवारने में अहम योगदान दे रहे मंडी जिला के इस शहर के स्कूलों ने शिक्षा जगत में ऐसी क्रांति लाई कि एजुकेशन के साथ-साथ खुले रोजगार के दरवाजों से प्रदेश ने तरक्की की राह पकड़ ली। हिमाचली ही नहीं, बल्कि देश-विदेश के होनहारों का कल संवार रहे सुंदरनगर में क्या है शिक्षा की कहानी, बता रहे हैं

हमारे संवाददाता... जसवीर सिंह

सुकेत रियासत के नाम से प्रख्यात सुंदरनगर शहर एक शिक्षा हब के रूप में अलग पहचान के साथ उभर रहा है। यहां इंटरनेशनल व राष्ट्रीय स्तर के शिक्षण संस्थान खुल चुके हैं। सुंदरनगर के शैक्षणिक संस्थान गुणात्मक शिक्षा के लिए निरंतर प्रयासरत रहे हैं। शहर व आसपास के क्षेत्रों और पांच किलोमीटर के दायरे में करीब 38 निजी स्कूल शिक्षा क्षेत्र में अहम भूमिका निभा रहे हैं। उपमंडल के दुर्गम क्षेत्रों के लोग अच्छे शिक्षण संस्थानों में पढ़ाने के लिए सुंदरनगर शहर में क्वार्टर लेकर रह रहे हैं। वहीं, शहर में करीब 12 से अधिक सरकारी स्कूल भी बच्चों को शिक्षा मुहैया करवा रहे हैं। शहर में मौजूद सरकारी स्कूलों में बड़ी इमारतें व खेल मैदान हैं, जबकि शहर में मौजूद कुछ निजी स्कूलों में खेल मैदान नहीं हैं। प्रार्थना सभाएं सहित अन्य गतिविधियां स्कूल के हॉल में आयोजित की जाती हैं, जबकि  कुछ स्कूलों में खेल के मैदानों सहित बच्चों को विभिन्न प्रकार के झूले, आलीशान पुस्तकालय, शानदार प्रयोगशाला भी उपलब्ध करवाई गई है। बावजूद इसके शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में दिन-रात का फर्क स्पष्ट देखा जा सकता है। शहरी स्कूलों में जहां अंग्रेजी को तवज्जो दी जाती है, वहीं सरकारी स्कूलों में ऐसा नहीं होता। कई सरकारी स्कूलों में सुविधाओं के नाम पर महज औपचारिकताएं ही की जाती हैं। शहरी क्षेत्रों की अपेक्षा ग्रामीण स्कूलों में सुविधाओं का भी अभाव देखने को मिलता है। शहरी स्कूल नेताओं प्रशासकों तथा बुद्धिजीवियों की नजरों में रहते हैं, जबकि ग्रामीण स्कूलों में औपचारिकताएं ही पूरी की जाती हैं।

शहर में 38 प्राइवेट 12 से ज्यादा सरकारी स्कूल सात प्ले-वे

सुंदरनगर शहर व आसपास क्षेत्रों में पांच किलोमीटर के दायरे में करीब 38 निजी स्कूल  शिक्षा क्षेत्र में अहम भूमिका निभा रहे हैं। शहर में करीब 12 से अधिक सरकारी स्कूल भी बच्चों को शिक्षा मुहैया करवा रहे हैं। शहर में मौजूद सरकारी स्कूलों के बड़ी इमारतें व खेल मैदान मौजूद हैं। सेंट मैरी पब्लिक स्कूल, डीएवी स्कूल, महावीर पब्लिक स्कूल, एंजल पब्लिक स्कूल, पैराडाइज पब्लिक स्कूल, विश्व भारती मॉडल स्कूल, दिल्ली पब्लिक स्कूल, सनराइज पब्लिक स्कूल, मदर आर्म्स स्कूल, कावेरी पब्लिक स्कूल, सेंट ज़ेवियर पब्लिक स्कूल, सरस्वती विद्या मंदिर पब्लिक स्कूल, यूनिवर्सल मॉडल स्कूल, नौरांग पब्लिक स्कूल, स्प्रिंग फील्ड पब्लिक स्कूल, शिवाजी पब्लिक स्कूल, जागृति पब्लिक स्कूल, आनंद मैरी पब्लिक स्कूल, बाल आदर्श पब्लिक स्कूल, शीतला पब्लिक स्कूल, शिक्षा भारती मॉडर्न पब्लिक स्कूल, सेंट जॉर्ज पब्लिक स्कूल, आर्यन मॉडल स्कूल, विज़न इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल, एसवीएम पब्लिक स्कूल, मॉडर्न ब्लू स्टार पब्लिक स्कूल, एसवाईएन पब्लिक स्कूल, लिटल स्कॉलर होम स्कूल समेत शहर में हैं। इसके अलावा सुंदरनगर शहर में सात के करीब प्ले स्कूल भी हैं। वहीं, ग्रामीण इलाकों में 140 सरकारी स्कूल हैं।

कहां, कितने अध्यापक-छात्र

स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुंदरनगर प्रदेश में अपनी एक अमिट छाप छोड़े हुए है। शैक्षणिक सत्र में सुंदरनगर के 153 सरकारी स्कूलों में 8431 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, जिसमें 100 प्राइमरी स्कूलों में 2549 बच्चे व 232 शिक्षक हैं, जबकि छठी में 665, सातवीं में 701, आठवीं में 698, नौवीं में 981, दसवीं में 944, ग्यारहवीं में 951, बारहवीं में 942 बच्चे अध्ययनरत हैं, जिसमें 15 प्रिंसीपल, 13 मुख्याध्यापक, 165 प्रवक्ता, 172 टीजीटी, 179 सी एंड वी अध्यापक हैं। बता दें कि जिला में छह सीबीएसई स्कूल में भी छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।

क्या कहते हैं अभिभावक

क्वालिटी एजुकेशन दे रहे शहरी स्कूल

शहरी स्कूलों में बच्चों को गुणात्मक शिक्षा दी जाती है। बच्चों का बेसिक लेवल बेहतर बनाने के लिए फोकस किया जाता है। अगर बेसिक स्तर बेहतर होगा, तो बच्चे हर विषय आसानी से समझ सकते हैं। वहीं योग्यता के अनुसार बच्चों को कंपीटीशन के लिए भी तैयार किया जाना चाहिए

पुष्पा देवी, अभिभावक

कंपीटीशन के लिए तैयार हों बच्चे

शहरी व ग्रामीण स्कूलों में शिक्षा का स्तर गुणवत्ता से भरपूर होना चाहिए। बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ कंपीटीशन के लिए भी तैयार किया जाना चाहिए, ताकि बच्चों का आगामी दौर में भविष्य उज्ज्वल हो सके

सोनिया ठाकुर, अभिभावक

सरकारी स्कूलों में बेहतर स्टाफ

सरकारी स्कूलों में प्राइवेट के मुकाबले बेहतर योग्य स्टाफ  है। इन स्कूलों में शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए शिक्षकों की जवाबदेही सुनिश्चित की जाए और जो शिक्षक अपने कार्य के प्रति गंभीर नहीं हैं और परिणाम बेहतरी के लिए प्रयासरत नहीं हैं, उनकी डिमोशन व इन्क्रीमेंट्स रोकने का भी प्रावधान किया जाना चाहिए। सरकार को सरकारी स्कूलों में बेहतर निजी स्कूलों की तर्ज पर सुविधाएं उपलब्ध करवानी चाहिएं

अश्वनी सैणी, व्यापारी

हर काम में आगे हैं यहां के होनहार

शहरी स्कूलों के बच्चे हर तरह की प्रतिस्पर्धा में प्रदेश और देश में नाम कमा रहे हैं। हर तरह की प्रतिस्पर्धा में भाग लेकर होनहार शहर का नाम ऊंचा कर रहे हैं। गांवों-शहर के स्कूलों से प्रशिक्षण ले रहे छात्र हर तरह की प्रतिस्पर्धा में आगे हैं

            कुशल कुमार सकलानी, समाजसेवी

शहरी स्कूलों में हर तरह की प्रतियोगिता

शहरी क्षेत्र में स्थापित स्कूल अत्यधुनिक सुविधाओं से लैस हैं और शहरी क्षेत्र में आने से यहां आए दिन हर तरह की गतिविधियां स्कूलों में आयोजित होती हैं, जिससे बच्चों की ओवरऑल डिवेलपमेंट भी होती है और हर तरह की प्रतिस्पर्धा में भाग लेने का अवसर भी मुहैया होता है। साथ में अभिभावक भी बच्चों की हर तरह की गतिविधि के प्रति सजग रहते हैं। इन स्कूलों में माहौल भी फ्रेंडली है

अविनाश शर्मा, महाप्रबंधक, मैनपावर एसोसिएट्स

ये कहते हैं शिक्षाविद

पढ़ाई के लिए अच्छा है यहां का वातावरण

भौगोलिक दृष्टि से सुंदरनगर जिला मंडी और हिमाचल प्रदेश के केंद्र में स्थित है। यहां की जलवायु न अधिक ठंडी है और न अधिक गर्म, जिस वजह से अभिभावक अपने बच्चों को यहां पढ़ाना उचित समझते हैं। इस क्षेत्र में शिक्षण के लिए हर तरह के संस्थान उपलब्ध हैं। इस क्षेत्र में शिक्षण संस्थान में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिससे गुणात्मक शिक्षा दी जा रही है। यहां सरकारी और गैर सरकारी स्कूलों में हिंदी व अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा दी जा रही है और सभी सरकारी स्कूलों में सभी पद भरे हुए हैं तथा काफी अनुभवी अध्यापक हैं

ताराचंद ठाकुर, बीआरसी, सुंदरनगर

बच्चों की ओवरआल डिवेलपमेंट पर फोकस

सुंदरनगर हिमाचल प्रदेश का केंद्र बिंदु होने के चलते यहां हर तरह की मूलभूत सुविधाएं पर्याप्त हैं और हर स्कूल सड़क सुविधा से जुड़ा हुआ है और आधुनिक तकनीक से बच्चों को पढ़ाई करवाई जा रही है। बच्चे हर तरह की प्रतिस्पर्धा में भाग लेकर एक समान नीति के तहत अध्ययन करने से ओवरआल पढ़ाई का स्तर अन्य राज्यों की तुलना में आगे बढ़ रहा है। स्कूल खोलने का मुख्य उद्देश्य बच्चों को बेहतर शिक्षा प्रदान, ओवरऑल डिवेलपमेंट करने के साथ-साथ व्यक्तिगत विकास करना है। इसके लिए दिन-रात एक कर स्कूल बच्चों के सर्वांगीण विकास में जुटे हुए हैं

अनुराधा जैन, प्रिंसीपल

दूसरे राज्यों की भी पसंद है सुंदरनगर

सुंदरनगर शिक्षा का केंद्र बनकर उभरा है। इसका मुख्य श्रेय समय-समय पर सरकार द्वारा शिक्षण संस्थानों का उन्नयन करना और नए शिक्षण संस्थान खोलना है। इसके साथ ही निजी शिक्षण संस्थानों की भी भागीदारी है। सरकारी शिक्षण संस्थानों में शिक्षा के क्षेत्र में सरकार कई योजनाएं लाई है, जिससे छात्र छात्राएं उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इसके साथ ही शिक्षा विभाग समय-समय पर सरकार द्वारा चलाई गई योजनाओं का पर्यवेक्षण करता है। पर्यावरण की दृष्टि से सुंदरनगर बहुत अच्छा कस्बा है, जिससे राज्य के दूसरे हिस्से और पड़ोसी राज्य के छात्रों का आकर्षण बना रहता है

मनोज वालिया, प्रिंसीपल

उच्च शिक्षा में लोहा मनवा रहे हैं होनहार

कुछ साल से सुंदरनगर शिक्षा का केंद्र बनकर उभरा है। स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक युवाओं ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। प्रदेश में निजी तथा सरकारी क्षेत्रों के माध्यम से कई उच्च गुणवत्ता वाले शिक्षण संस्थान विद्यमान हैं। इसके साथ विभिन्न तरह के कोचिंग संस्थानों द्वारा प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग उपलब्ध करवाई जाती है। ईलाइट स्टडी यू-ट्यूब चैनल सुंदरनगर से ही संचालित होता है। इसमें करीब 32000 विद्यार्थी निःशुल्क में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं

अश्वनी गुलेरिया, प्रवक्ता

सरकारी स्कूलों में ज्यादा हैं सुविधाएं

सरकार स्कूलों में अध्यापक काफी अनुभवी हैं। तीनों संकायों विज्ञान, वाणिज्य और कला में छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। मल्टीमीडिया, कम्प्यूटर साइंस और व्यवसायिक विषयों पर भी फोकस किया जा रहा है। खेल के मैदानों की कोई कमी नहीं है। बास्केटबॉल, हॉकी फुटबॉल, बैडमिंटन जैसे खेलों के लिए होनहारों को पढ़ाई के साथ तैयार किया जाता है। निजी शिक्षण संस्थानों की अपेक्षा सरकारी स्कूलों में बहुत ज्यादा सुविधाएं हैं

सुंदर सिंह ठाकुर, प्रधानाचार्य

1890 में खुले ब्वायज स्कूल का इतिहास पुराना

सुंदरनगर शहर के सरकारी स्कूलों की बात करें, तो राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक बाल पाठशाला सुंदरनगर का इतिहास बहुत पुराना है। सुकेत रियासत के राजा भीम सिंह सेन ने यह स्कूल वर्ष 1890 में शुरू किया था। वर्तमान में स्कूल में करीब 537 छात्र पढ़ रहे हैं, जबकि पाठशाला में 37 शिक्षक सेवाएं दे रहे हैं। वर्ष 1890 से निर्मित ऐतिहासिक धरोहर स्कूल में सुकेत रियासत की संस्कृति की झलक दिखेगी। इन दिनों रियासतकाल के इस स्कूल को विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। स्कूल परिसर में क्रिकेट, फुटबॉल, वालीबॉल, टेनिस, बॉक्सिंग समेत अन्य खेल के लिए पर्याप्त खेल मैदान हैं।

खत्म नहीं होती सरकारी स्कूलों की रैलियां

वर्ष भर सरकारी स्कूलों में फाइलों के कामकाज के साथ अन्य कार्य काफी बढ़ गए हैं। कभी शिक्षकों की विभागीय ड्यूटी लगा दी जाती है, तो कभी खेलकूद गतिविधियों के अलावा विशेष अभियान के लिए बच्चों को तैयार करने का दौर जारी रहता है। वर्ष भर में कोई एक ऐसा विशेष दिवस नहीं बचता, जिसमें बच्चे जागरूकता रैली न निकालें। आज तक बच्चों की निकाली जागरूकता रैलियों का मकसद पूरा नहीं हो पाया है। उलटा नशाखोरी सहित अन्य मामले बढ़ते जा रहे हैं। इसी दौरान स्कूल में खंड स्तरीय, ज़ोनल स्तरीय, जिला स्तरीय और राज्य स्तरीय खेलकूद का दौर शुरू हो जाता है। समस्त गतिविधियों को सहज ही पता चलता है कि पढ़ाई के लिए बच्चे कितना समय निकाल पाते हैं, जबकि निजी स्कूलों में निर्धारित दिवस ही मनाए जाते हैं। निजी स्कूल वही दिवस मनाते हैं, जिनसे बच्चों को लाभ पहुंच सके।

कल के लिए तैयार कर रहे ये संस्थान

सुंदरनगर शहर में स्कूलों के अलावा इंजीनियरिंग कालेज, बहुतकनीकी कालेज, निशक्त बच्चों की एकमात्र सरकारी आईटीआई, हिमाचल डेंटल कालेज है। इसके अलावा सीआरसी संस्थान भी है, जहां देश के लिए विशेष शिक्षक प्रशिक्षित किए जाते हैं। आधा दर्जन के करीबन ड्राइविंग स्कूल भी हैं। एनआईटी, आईआईटी, एमबीबीएस समेत अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग के लिए दो दर्जन के करीब कोचिंग सेंटर चल रहे हैं।

कई जगह बड़े-बड़े कैंपस.. कुछ में खेल मैदान ही नहीं

सुंदरनगर शहर में करीब 14 निजी स्कूल हैं, जबकि दस से ज्यादा सरकारी। शहरी व ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों के भवनों में काफी अंतर है। शहरी क्षेत्र अधिक संकरा होने के कारण भवन के आकार भी संकरे हैं। कुछ स्कूल शहर की तंग गलियों में चल रहे हैं, जबकि कुछ राष्ट्रीय उच्च मार्ग के किनारे। शहर के अधिकांश स्कूलों से खेल मैदान ही गायब हैं। प्रार्थना सभा से लेकर खेलें एक हॉल में होती हैं, जबकि शहर के साथ सटे कुछ निजी स्कूलों में खेल मैदान है। वहीं, अगर बात करें सरकारी स्कूलों की, तो सरकारी स्कूल चाहे शहर में हो या गांव में, जिला के अधिकांश स्कूलों में खुला मैदान है, जिसके चलते मैदानों में खेल स्पर्धाओं के अलावा अन्य गतिविधियां बेहतर ढंग से की जा रही हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के निजी स्कूलों के भवन व खेल मैदान बेहतर होते हैं। अगर बात की जाए सरकारी स्कूलों  के भवनों की, तो सरकारी स्कूल का कैंपस बिलकुल सही होता है। मैदान में ही प्रार्थना सभा, बास्केटबाल मैदान, कबड्डी मैदान सहित समस्त खेलकूद के लिए मौजूद हैं।

निराश करता है सरकारी स्कूलों का रिजल्ट

शहरी स्कूलों में अध्यापकों की संख्या बच्चों की संख्या पर निर्भर करती है, लेकिन शहरी क्षेत्र के स्कूलों में शिक्षकों की संख्या 40ः60 तक है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों की संख्या 15ः20 तक है। भले ही जिला में सरकारी स्कूलों की संख्या अधिक हो, लेकिन बोर्ड के परीक्षा परिणाम शिक्षा के हब को निराश कर रहे हैं। आलम यह है कि सरकारी स्कूलों में किसी न किसी विषय में बच्चे की कंपार्टमेंट रही है, जिसके चलते परीक्षा परिणाम निराशाजनक रहता है, जबकि निजी स्कूलों में कंपार्टमेंट काफी कम रहती है। परिणाम भी शत-प्रतिशत रहता है। निजी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ प्रायोगिक परीक्षाओं की तैयारी करवाई जाती है।

1976 से शुरू हुआ निजी स्कूलों का कारवां

सुंदरनगर शहर में निजी स्कूलों का कारवां वर्ष 1976 से शुरू हुआ, जिसकी शुरुआत सेंट मेरी पब्लिक स्कूल सुंदरनगर से हुई है, जो सुंदरनगर शहर के साथ स्थित चतरोखड़ी में है। स्कूल 44 वर्ष से चल रहा है। इस स्कूल में करीब 45 शिक्षकों और 18 गैर शिक्षक का स्टाफ है। शुरुआत में सेंट मेरी पब्लिक स्कूल की शुरुआत एक कमरे में किंडरगार्टन से हुई थी। इस स्कूल में पहले मिडल तक कक्षाएं शुरू हुईं। इस दौरान शहर में खुले निजी स्कूल में पढ़ने के लिए बच्चों में काफी क्रेज रहा। वर्तमान में स्कूल में करीब 1600 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इसके बाद सीबीएसई बोर्ड के तहत डीएवी पब्लिक स्कूल की स्थापना 1986 में हुई। वर्तमान में स्कूल में 81 टीचिंग, नॉन टीचिंग स्टाफ है और 1460 बच्चे, जिन्हें साइंस व कॉमर्स विषय में शिक्षा प्रदान की जा रही है। सरकारी स्कूलों के बाद शिक्षा की शृंखला में डीएवी का नाम देश भर में दूसरे नंबर पर आता है। उन्होंने बताया कि अगले सत्र से स्कूल में कला संकाय की भी कक्षाएं शुरू की जा रही हैं, जिसमें लीगल स्टडी विषय को शामिल किया गया है, जो कि सीएलएटी पैटर्न के आधार पर होगा। शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी स्कूलों में महावीर पब्लिक स्कूल और वर्धमान महावीर पब्लिक स्कूल सुंदरनगर का नाम भी पहले नंबर पर आता है, जिसकी स्थापना वर्ष 2004 में हुई।