Wednesday, September 26, 2018 01:01 PM

पदक विजेताओं का सम्मान कब ?

भूपिंदर सिंह

लेखक, राष्ट्रीय एथलेटिक प्रशिक्षक हैं

शिक्षा संस्थान खिलाड़ी विद्यार्थी को उसकी पढ़ाई के साथ-साथ उसके खेल के लिए यदि सहायता करते हैं, तो वह भविष्य का विजेता बनकर देश को गौरव दिला सकता है। इसी तरह जब खिलाड़ी नौकरी में आ जाता है, तो उसे वहां पर प्रशिक्षण के लिए माकूल माहौल देकर प्रोत्साहित करना चाहिए...

हिमाचल प्रदेश की संतानों ने राष्ट्रमंडल खेल गोल्ड कोस्ट तथा जकार्ता एशियाई खेलों में शिरकत कर भारत के लिए पदक जीते हैं, मगर अभी तक इन स्टार चैंपियनों के नकद इनाम के समारोह की घोषणा प्रदेश सरकार ने नहीं की है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी देश के खिलाड़ी खेलों में उत्कृष्ट परिणाम देकर जब पदक जीतते हैं, तो उस देश का झंडा पूरा विश्व ऊपर उठता देखता है। बड़े खेल आयोजनों में विश्व स्तर पर ओलंपिक खेलों की पदक तालिका में अमरीका सहित विश्व के विकसित देश सबसे ऊपर देखे जा सकते हैं, उसी तरह एशियाई स्तर पर चार वर्ष में एक बार आयोजित होने वाली एशियाई खेलों में भी चीन, जापान, कोरिया जैसे देश हमसे काफी ऊपर हैं। इस बार 15 स्वर्ण पदक जीतकर हम एशियाई खेलों में आठवें स्थान तक ही पहुंच पाए हैं। चीन सौ से अधिक स्वर्ण पदक जीतकर शीर्ष पर है, हम उसके मुकाबले में कहीं भी नहीं ठहर पा रहे हैं। हमारे देश में खेल राज्य सूची का विषय होने के कारण खेल उत्थान के लिए राज्य सरकारें ही पूरी तरह से जिम्मेदार हैं। यह अलग बात है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल राष्ट्र के गौरव से जुड़ा हुआ विषय है। हिमाचल प्रदेश में हम खेल व खिलाडिय़ों के लिए वह वातावरण ही तैयार नहीं कर पा रहे हैं, जिसमें खिलाड़ी हिमाचल में प्रशिक्षण कार्यक्रम जारी रखकर अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेलों के पोडियम तक पहुंच सकें।

राष्ट्रमंडल खेलों में इस वर्ष गोल्ड कोस्ट में हमीरपुर के विकास ठाकुर ने भारोत्तोलन में देश के लिए कांस्य पदक जीता है। वह पिछले राष्ट्रमंडल खेल-2014 में भी वह रजत पदक जीत चुका है। पंजाब के खेल वातावरण में अपना शुरुआती करियर शुरू कर आजकल वायु सेना में कनिष्ठ अधिकारी है। हिमाचल में भारोत्तोलन के लिए कहीं भी स्तरीय हाल में सुविधा नहीं है। ऊना की बेटी अंजुम मोदगिल ने इस वर्ष राष्ट्रमंडल खेलों में शूटिंग में रजत पदक जीता है। वह भी राज्य के बाहर ही अपना प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए हुए है। इन दोनों पदक विजेताओं को अभी तक हिमाचल प्रदेश सरकार उनकी इनामी राशि नहीं दे पाई है। जकार्ता में वैसे तो दस हिमाचली संतानों ने विभिन्न खेलों महिला व पुरुष कबड्डी, महिला हैंडबाल, पुरुष वालीबाल व महिला तलवारबाजी में भारत का प्रतिनिधित्व किया था, मगर पदक हमें महिला कबड्डी में रजत तथा पुरुष वर्ग में कांस्य मिला है। रितु नेगी, कविता ठाकुर तथा प्रियंका नेगी ने महिला कबड्डी टीम में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए देश के लिए रजत पदक जीता है। अजय ठाकुर कांस्य पदक विजेता टीम का कप्तान था। अजय ठाकुर व प्रियंका नेगी तो राज्य पुलिस विभाग में कार्यरत हैं, मगर कविता ठाकुर जो 2014 में स्वर्ण पदक विजेता टीम की सदस्य रही है, उसे अभी तक नौकरी नहीं मिली है। रितु नेगी भी निचले स्तर की रेलवे में नौकरी करने को मजबूर है।

विकास ठाकुर भी राज्य में सम्मानजनक नौकरी की आस में है। क्या हिमाचल सरकार अपने इन पदक विजेता खिलाडिय़ों को नकद इनाम समारोह में ही इनकी मनपसंद नौकरी देने की भी घोषणा करेगी। जिन हिमाचली खिलाडिय़ों ने एशियाई खेलों के लिए क्वालीफाई कर भारत का प्रतिनिधित्व किया है, उन्हें भी हिमाचल सरकार को हरियाणा की तरह नकद इनाम तथा स्तरीय नौकरी देकर सम्मानित करना चाहिए, ताकि वे अपना प्रशिक्षण कार्यक्रम आगामी अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं के लिए जारी रख सकें। हिमाचल प्रदेश में बेशक खेल वातावरण में सुधार के दावे किए जाते हों, लेकिन वास्तविकता किसी से छिपी नहीं है। आज भी राज्य में खेल संस्कृति का अभाव है। बात चाहे शिक्षा संस्थानों की हो या किसी विभाग के खिलाड़ी को कहीं पर भी प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए कोई भी सहायता ऐसी नहीं है, जिससे वह अंतरराष्ट्रीय स्तर तक का सफर आसानी से तय कर सके। शिक्षा संस्थान का प्रशासन व अध्यापक खिलाड़ी विद्यार्थी को उसकी पढ़ाई के साथ-साथ उसके खेल के लिए यदि सहायता करते हैं, तो वह भविष्य का विजेता बनकर देश को गौरव दिला सकता है।

इसी तरह जब खिलाड़ी नौकरी में आ जाता है, तो उसे वहां पर पूरा वर्ष प्रशिक्षण के लिए माकूल माहौल देकर प्रोत्साहित करना चाहिए, तभी हम आगे अच्छे उत्कृष्ट खेल परिणाम ला सकते हैं। राष्ट्रमंडल व एशियाई खेलों के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर पदक विजेता खिलाडिय़ों को भी समारोह में तय नकद इनाम देकर जल्द ही सम्मानित करना चाहिए, ताकि प्रदेश में एक सकारात्मक संदेश दिया जा सके, जिससे राज्य के उभरते खिलाडिय़ों को प्रेरणा मिले। किसी भी खिलाड़ी के साथ भेदभाव न हो, यह भी सरकार को निश्चित करना होगा। एशियाई व राष्ट्रमंडल स्तर पर पदक जीतने के लिए लगातार दस से अधिक वर्षों तक कड़े अनुशासन में रहकर कठिन परिश्रम करना पड़ता है। इसलिए इनकी नौकरी का राज्य में ठीक से सम्मानजनक प्रबंध हो, ताकि अधिक से अधिक हिमाचली खिलाड़ी खेलों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीतकर, तिरंगे को सबसे ऊंचा उठाकर राष्ट्रगान की धुन पूरे विश्व को सुना सकें। इससे इस बर्फ के प्रदेश का गौरव बढ़ सकेगा।