Monday, July 22, 2019 12:58 PM

पपरोला अस्पताल में पानी मांगना मना

बैजनाथ—प्रदेश के अग्रणी आयुर्वेदिक महाविद्यालय पपरोला के 220 बिस्तरों बाले अस्पताल को  सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग की सुस्त कार्यशैली के चलते पिछले दो सालों से पीने के  पानी का कनेक्शन  विभाग नहीं दे पा रहा है। हैरानी इस बात की है कि आयुर्वेद विभाग द्वारा लाखों रुपए आईपीएच विभाग को जमा करवाने के बावजूद आज दिन तक विभाग यह कनेक्शन नहीं दे पाया। यही कारण हैं कि अस्पताल में दाखिल मरीजों को पानी के लिए कई बार तरसना पड़ता है। इस समय महाविद्यालय परिसर में  हैंडपंप से   अस्पताल, कालेज और तीन छात्रावासों में इसी हैंडपंप से पानी दिया जा रहा है। अगर कभी बिजली न हो या फिर हैंडपंप की मोटर खराब हो, तो पानी की बहुत समस्या पैदा हो जाती है, जबकि कई बार तो हास्पिटल प्रबंधन को टैंकरों से पानी  का भी इंतजाम करना पड़ता है। पपरोला का आयुर्वेदिक अस्पताल दाखिल मरीजों व प्रतिदिन इलाज करवाने आते सैकड़ों लोगों से भरा रहता है, मगर जब बिजली न हो या हैंडपंप की मोटर खराब हो जाए, तो अस्पताल प्रबंधन को आफत आ जाती है। यहां दाखिल हुए मरीजों ओर उनके तीमारदार पानी की समस्या से परेशान न होना, जिसके चलते कालेज प्रशासन ने यहां पर पानी की समस्या के चलते आईपीएच विभाग से पानी के लिए नया कनेक्शन मांगा, जिसके लिए कालेज प्रशाशन ने तीन लाख से ऊपर की राशि बतौर सिक्योरटी जमा कर दी। विभाग ने कुछ पानी की नालियां तो जोड़ दी हैं, लेकिन मुख्य हाई-वे  से पानी की लाइन डालनी विभाग के लिए टेड़ी खीर साबित हो रही है। हालांकि कालेज प्रबंधन और हास्पिटल प्रबंधन कई बार विभाग से गुहार लगा चुका है, लेकिन इतना समय बीत जाने के बाद भी इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं, जिसका खामयाजा  मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। इस बारे आयुर्वेदिक महाविद्यालय के प्राचार्य डाक्टर नरेश शर्मा का कहना है कि काफी समय पहले आईपीएच विभाग को पानी का कनेक्शन लेने के लिए आवेदन किया था, जिसके लिए नियमों के तहत सिक्योरटी भी जमा करवा दी है, लेकिन आज दिन तक पानी का कोई भी कनेक्शन नहीं मिला है। आईपीएच विभाग के अधिशाषी अभियंता संजीव ठाकुर ने बताया कि दोनों ओर से पानी की लाइनें बिछा दी हंै, लेकिन आगे मुख्य रोड से पानी की लाइनों को सड़क के नीचे लाना पड़ेगा, जिसके लिए नहाई से रोड को तोड़ने की परमिशन मांगी गई है।उधर, नहाई के कार्यालय से जब जानकारी लेनी चाही तो बताया गया कि अभी आईपीएच विभाग से इसके लिए कोई भी लिखित परमिशन के  लिए नहीं लिखा है।