Monday, November 19, 2018 05:31 PM

पर्यटन नहीं… भीड़ है

सवारी बाइक की, न हेलमेट; न लाइसेंस... न ही स्पीड पर लगाम। अब इन्हें तो पर्यटक नहीं कह सकते। कभी त्रियूंड, तो कभी शिकारी देवी पहुंचने वाले ऐसे सैलानी हमारी आर्थिकी में योगदान तो नहीं देते , लेकिन चिट्टा, डेंगू और देह व्यापार से देवभूमि को शर्मसार जरूर करते हैं। ये पर्यटन कम, भीड़ ज्यादा हैं। और भी क्या है सच्चई, देखें इस बार का दखल....

प्रदेश में हर साल औसतन लाखों की संख्या में विदेशी सैलानियों सहित पड़ोसी राज्यों से पर्यटक पहुंचते हैं। पहाड़ी प्रदेश में ब्रिटेन, फ्रांस, इटली, अमरीका,पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, राजस्थान से झुंडों में पर्यटकों की आमद रहती है। मगर खास बात यह है कि इन पर्यटकों का हिमाचल के पर्यटन विकास में कोई भी योगदान नहीं है। नामात्र पर्यटक ही प्रदेश के प्राकृतिक साैंदर्य को निहारने आते हैं, जिससे पहाड़ी प्रदेश को बढ़ावा मिल रहा है। जबकि शेष पर्यटक प्रदेश की सैरगाहों में मौज मस्ती करने पहुंच रहे हैं, जो प्रदेश के पर्यटन के लिए फायदेमंद नहीं हैं। सैलानी पर्यटक की परिभाषा को भी पूरा नहीं कर पा रहे है। चूंकि यहां पहुंचने वाले अधिकांश पर्यटक मौज-मस्ती करने ही आ रहे हैं। चूंकि सैलानी यहां आकर जमकर मौज-मस्ती कर निकल जाते हैं। मगर इसके विपरीत वे हिमाचल को कई नई परेशानियों में धकेल रहे हैं।  पिछले कुछ अरसे के दौरान सामूहिक पर्यटन (झुंड) बढ़ा है। लेकिन यह प्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता को खत्म कर रही है। यह शहरों को शहरी वुःस्वेटन में बदल रहा है। झुंड पर्यटन से बुनियादी ढांचे, परिवहन सड़कें और जल आपूर्ति पर असहनीय बोझ पड़ता जा रहा है। प्रदेश में पर्यटन के मौजूदा रूप के कारण होने वाले नुकसान के किसी भी सबूत की आवश्यकता नहीं है। शिमला, मनाली, धर्मशाला की स्थिति, रोहतांग पर यातायात जाम, खजवीर में गंदगी, कालका और सोलन के बीच रेलवे ट्रैक पर प्लास्टिक के ढेर, कुफरी में गंदगी, मणिमहेश झील के लिए हर तरह से पराजित और सभी प्रमुख मार्गों पर नियमित घंटों का ट्रैफिक जाम झुंड पर्यटन के कारण पेश आ रहा है। हालांकि सैलानियों की आमद से प्रदेश में पर्यटन कारोबार चल रहा है। मगर समय रहते झुंड के चलते पेश आ रही परेशानियों पर लगाम नहीं कसी गई तो तेजी से बढ़ेगा यातायात और अगले 15-20 वर्षों तक पहाडि़यों को अस्थिर कर देगा, जो दोनों रूप से हिमाचल के लिए नुकसान दायक साबित होगा। झुंड पर्यटन से जहां प्रदेश के प्राकृतिक स्थल अपना वास्तविक स्वरूप खो रहे हैं। वहीं ,यह देवभूमि केवल मात्र-मौज मस्ती का केंद्र मात्र बन कर रह जाएगी।

सूत्रधारः खुशहाल सिंह, टेकचंद वर्मा, प्रतिमा चौहान

सहयोग : जितेंद्र कंवर, सूरत पुंडीर, अश्विनी पंडित, तनुज सैणी, सुरेंद्र मामटा

नियम तोड़ने वालों पर होती है सख्त कार्रवाई

मधुसूदन शर्मा एसपी, सोलन

सोलन बाहरी राज्यों से प्रदेश में पहुंचने वाले बाइक सवारों पर समय-समय पर लगाम कसती रहती है। पुलिस अधीक्षक सोलन मधुसूदन शर्मा का कहना है कि जिला सोलन में कोई शक्तिपीठ न होने के कारण यहां श्रद्धालुओं का आना बहुत कम होता है। उनका कहना है कि सोलन से होकर पर्यटकों का लगातार आना-जाना रहता है। पर्यटक ट्रकों में कम गाडि़यों एवं बाइकों पर सवार होकर आते हैं। यदि कभी कोई वाहन चालक एवं बाइक सवार मोटर व्हीकल एक्ट की अवहेलना करते हैं, उनके खिलाफ एक्ट के अनुसार समय-समय पर कार्रवाई की जाती है। मधुसूदन शर्मा का कहना है कि पुलिस लगातार नेशनल हाइवे पर गश्त बनाए रखती है और भविष्य में भी जारी रहेगी। पर्यटक नियम तोड़ता है तो उसके खिलाफ कानूनी शिकंजा कसा जाता है।

विशेष नाके लगाकर कंट्रोल करती है पुलिस

दिवाकर शर्मा

एसपी ऊना

ऊना के सभी प्रवेश नाकों पर तैनात पुलिस बल बाहरी राज्यों से प्रवेश करने वाले नागरिकों पर निगाह रखते हैं।  मेलों के दौरान बाइकर्ज व ट्रकों में आने वालों की भी विशेष नाके लगाकर जांच की जाती है। इसमें पड़ोसी राज्य के पुलिस बल के साथ भी तालमेल बिठाकर सहयोग लिया जाता है।  सावन मेलों के दौरान ही चिंतपूर्णी मंदिर में अधिकतर बाइक्स, साइकिलों,निजी वाहनों व काफी तादाद में लोग पैदल भी पहुंचते हैं, जबकि ट्रकों,टैम्पो व ट्रालियों में भी बैठकर प्रदेश के धार्मिक स्थलों में माथा टेकने भारी संख्या में श्रद्धालु पंजाब से आते हैं। इन पर नियंत्रण रखने के लिए बार्डर एरिया में पड़ने वाले सभी संबंधित जिलों के पुलिस कप्तान से संपर्क रखा जाता है। वाहन चालकों को जागरूक करके ही इस समस्या का निदान किया जा सकता है।

चालान के साथ जागरूक करती है पुलिस

संतोष पटियाल

एसएसपी, कांगड़ा

जिला कांगड़ा में सावन के महीनों में शक्तिपीठों सहित अन्य प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में लगने वाले मेलों में सामान ढोने के वाहनों में ओवरलोडिंग कर पहुंचने वाले श्रद्धालुआें के वाहन पुलिस के लिए चुनौती बनते हैं। सड़क नियमों को दरकिनार करते हुए इन वाहनों पर नियंत्रण लगाना एक बड़ी चुनौती है। धार्मिक आस्थाआें को ध्यान में रखते हुए पुलिस प्रशासन भी इन वाहनों को रोकने में असफल रहती है। इन ट्रकों के अलावा दोपहिया वाहनों पर भी पंजाब से हजारों श्रद्धालु मंदिरों में दर्शनों के लिए पहुंचते हैं। इनमें से अधिकतर श्रद्धालु बिना हेलमेट और ट्रिप्पलिंग करके यहां पहुंचते हैं। पुलिस नियमों को तोड़ने वाले इन वाहनों के चालान कर जुर्माना भी वसूल करती है। साथ ही सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक भी किया जाता है।

ओवरलोडेड गाडि़यों की जिला में ‘नो एंट्री’

अशोक कुमार

एसपी, बिलासपुर

बिलासपुर जिला की पंजाब राज्य से सटी सीमा पर बाहरी राज्यों से ट्रकों में सवार होकर आने वाले श्रद्धालुओं व अन्य लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। कैंचीमोड़ व टोबा में ही गाडि़यों को रोक लिया जाता है। हालांकि बाहरी राज्यों से मोटरबाइक पर आने वालों को न केवल ट्रैफिक नियमों का पाठ पढ़ाया जा रहा है, बल्कि नियमों के उल्लंघन पर बाकायदा चालान भी किए जा रहे हैं। कानून व्यवस्था में सुधार को लेकर पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार ने कारगर कदम उठाए हैं। वाहनों की गति के नियंत्रण के लिए अत्याधुनिक गति सीमा मापक यंत्र डॉप्लर राडार को भी प्रयोग में लाया जा रहा है।  पुलिस मोबाइल यूनिट के पास एल्कोहल सेंसर भी उपलब्ध है।आगंतुकों को परेशानी का सामना न करना पड़े इसके लिए पुलिस द्वारा ध्यान रखा जाता है।

सिरमौर की सीमाओं पर पुलिस का कड़ा पहरा

रोहित मालपानी

एसपी, सिरमौर

सिरमौर भी पड़ोसी राज्यों से सटा है। सिरमौर जिला की सीमा पड़ोसी राज्य हरियाणा, चंडीगढ़ व उत्तराखंड के साथ-साथ उत्तर प्रदेश से सटी है। ऐसे में इन राज्यों से प्रतिदिन हजारों की संख्या में वाहन सिरमौर जिला में प्रवेश करते हैं। जिला सिरमौर पुलिस की ओर से प्रदेश के प्रवेश द्वार औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब, पांवटा साहिब के यमुना पुल, खोदरी माजरी व पांवटा-यमुनानगर मार्ग पर स्थित बहराल बैरियर पर विशेष टीमें तैनात की गई हैं। इसके अलावा शिलाई का क्षेत्र क्योंकि मिनस व त्युनी में उत्तराखंड से सटा है ऐसे में इन क्षेत्रों पर भी पुलिस की विशेष गश्त टीमें तैनात रहती हैं। पुलिस अधीक्षक सिरमौर रोहित मालपानी ने बताया कि प्रदेश की सीमाओं में प्रवेश करने वाले लोगों पर पुलिस जहां ड्यूटी के दौरान यूनिफार्म व सादे वस्त्रों में नजर रखती है।

पर्यटकों को रिझाने में नाकाम प्रदेश

हिमाचल में पर्यटकों का ठहराव मुश्किल से तीन-चार रोज रहता है। इसके पीछे बड़ा कारण यह है कि अब तक सत्ता में रही सरकारें कोई बड़ा पैकेज या प्रोजेक्ट तैयार नहीं कर पाई हैं। जिसके बूते पर पर्यटकों को  अरसे तक बांधा जा सकता है।

नए स्थल विकसित नहीं हो पाए

हिमाचल में पश्चिमी हिमाचल की बहुमूल्य वाइल्ड लाइफ अंतरराष्ट्रीय स्तर के शोधकर्ताओं का ध्यान आकर्षित करती रही है। हर साल पौंग व गोबिंदसागर में लाखों की संख्या में माइग्रेटिड बर्ड्स पहुंचते हैं। प्रदेश में 32 सेचूरिज हैं और तीन नेशनल पार्क हैं। चार प्रमुख जलाशय हैं। जिन पर आधारित पर्यटन योजनाएं यदि समयबद्ध तरीके से तैयार की जाती तो पर्यटन के क्षेत्र में एक बड़ी क्रांति आ सकती थी। मगर आज तक ऐसा संभव नहीं हो सका है। ऐसे में हिमाचल के पर्यटन स्थल केवल मात्र मौज मस्ती के केंद्र बन कर रह गए है।

वीकेंड पर उमड़ती है मेहमानों की भीड़

वीकेंड सहित अन्य स्पेशल ओकेजन पर बाहरी राज्यों से झुंडों में सैलानी यहां पहुंचाते हैं इससे पर्यटन को कोई फायदा तो नहीं पहुंचता है। उल्टे इनकी आमद स्थानीय लोगों सहित प्रदेश की शांत आबोहवा के लिए परेशानी बनती जा रही है।

मौज-मस्ती के लिए पहुंचते हैं सैलानी

प्राकृतिक सौंदर्य से लबरेज देवभूमि विश्व पर्यटन मानचित्र पर अलग पहचान रखती है। यहां की शांत फिजाएं रोम-रोम को शांत कर देती है।  बाहरी राज्यों से आने वाले सैलानी धार्मिक स्थलों पर भी मौज-मस्ती कर मेला लगा रहे हैं, जो प्राकृतिक सौंदर्य व धार्मिक महत्त्व दोनों को धूमिल कर रहे हैं।

आबोहवा को अशांत कर रहे सैलानियों के झुंड

झुंडों में बाहरी राज्यों से प्रदेश पहुंच रहे सैलानी प्रदेश की शांत आबोहवा को अशांत कर रहे हैं। हालांकि राज्य सरकार व पर्यटन विभाग प्रमुख पर्यटक स्थलों को विकसित करने सहित उनके संरक्षण के दावे हर मंच पर करते रहते हैं। मगर अभी तक इस दिशा में सकारात्मक पहल नहीं हो पाई है। ऐसे में राज्य में बाहरी राज्यों से झुंडों में आने वाले पर्यटकों (मनमौजियों) की मौज मस्ती का दौर जारी है।

आपराधिक गतिविधियों को मिल रहा बढ़ावा

झुंडों में प्रदेश पहुंच रहे सैलानियों (मनमौजियों) की मौज-मस्ती  जहां देवभूमि के शांत माहौल को खराब कर रही है। वहीं इससे राज्य में आपराधिक गतिविधियों सहित नशे के कारोबार में भी इजाफा हो रहा है, जो पहाड़ी प्रदेश के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है।

पर्यटन की आड़ में फैल रहा देह व्यापार

खासकर पर्यटन स्थलों पर देह व्यापार एक बड़ा व्यवसाय बनकर उभर रहा है। पर्यटन स्थलों पर कई होटलों में देह व्यापार का धंधा आम बात हो गई है। इन जगहों पर कई होटलों में रेव पार्टियां चलती हैं, जिनके लिए बाहर से कॉल गर्ल्स को बुलाया जाता है। इनके लिए इंटरनेट पर भी खुलेआम बुकिंग की जा रही है। इनके लिए सैलानियों की बुकिंग की जाती है। हिमाचल में कई बार पुलिस ने देह व्यापार में शामिल बाहरी लोगों को पकड़ा है। अरसे से पर्यटन स्थलों पर जिस्मफिरोशी का यह धंधा जोरों से फैल रहा है। हिमाचल में पर्यटकों के भेस में असामाजिक तत्त्व भी प्रवेश कर रहे हैं। बाहरी राज्यों से हिमाचल पहुंचने वाले लोगों में से कई असामाजिक गतिविधियों में शामिल पाए जा रहे हैं। कई बार ये लोग लूटपाट और अन्य गंभीर अपराधों को भी अंजाम देते हैं। कई बार बाहरी राज्यों से आए सैलानियों को अवैध हथियारों के साथ भी पकड़ा जा चुका है।

पार्किंग पर बढ़ा दबाव

हिमाचल के नगरों में वैसे भी पार्किंग की कमी है और भारी संख्या में सैलानियों के आने की वजह से मौजूदा पार्किंगों पर भी दबाव बढ़ गया है। बात चाहे शिमला की हो या धर्मशाला, कुल्लू व मनाली की हो, इन सभी जगहों पर पार्किंग की भारी कमी है। इन जगहों पर सड़कों के किनारे बड़े होटल खड़े तो कर दिए गए हैं, लेकिन इनके पास अपनी पार्किंग नहीं है। ऐसे में इन होटलो के बाहर ही सैलानियों के वाहन पार्क किए जाते हैं, जिससे वाहनों की आवाजाही बाधित होना आम बात है। भवन नियमों के मुताबिक प्रदेश में सड़क के साथ लगते भवनों में भी पार्किंग बनाना बेहद जरूरी है। होटलों के लिए भी पार्किंग का होना जरूरी, लेकिन इस नियम का पालन नहीं किया जा रहा। ऐसे में सैलानी सड़कों पर ही अपने वाहन खड़े कर देते हैं। इसके चलते भी शहरों में ट्रैफिक जाम लगना आम बात है। शिमला, कुफरी, नारकंडा, चायल, कुल्लू, मनाली, धर्मशाला, कसौली, डलहौजी भारी संख्या में सैलानियों के पहुंचने से यहां सड़कों के किनारे इनके वाहनों को खड़ा देखा जा सकता है। वहीं पुलिस भी बाहर से आने वाले सैलानियों के वाहनों का चालान करने से गुरेज करती है ताकि इनको कोई परेशानी न हो। इससे भी ट्रैपिक नियमों का उल्लंघन ये सैलानी बार-बार करते हैं।

लंगर  लगाकर भीड़-गंदगी को दिया जा रहा बढ़ावा

हिमाचल के सीमावर्ती जिलों में लंगकर लगाकर भीड़ पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है। बाहरी चिंतपूर्णी सहित कुछ अन्य स्थानों पर लंगर लगाना आम बात है। इन लंगरों में बाहरी पंजाब व साथ लगते क्षेत्रों से भारी तादाद में लोग पहुंच रहे हैं। लंगरों के दौरान इस्तेमाल होने वाली प्लैटों व अन्य सामग्री को यहां-वहां फेंक दिया जाता है, इससे यहां गंदगी का आलम पसर जाता है, जो कि पर्यावरण के नुकसान का कारण भी बन रहा है। इसको लेकर प्रशासन का भी ध्यान कई बार दिलाया गया है लेकिन प्रशासन इस दिशा में कोई उचित कार्रवाई नहीं कर पा रहा। यही नहीं कई बार ऐसे धार्मिक आयोजनों के मकसद से आये लोग अवांछनीय कृत्यों को भी अंजाम देर रहे हैं।

ट्रकों- टैम्पों में आते हैं श्रद्धालु

हिमाचल की शक्तिपीठों में बाहरी राज्यों से हजारों की तादाद में सैलानी पहुंचते हैं। देखने में आया है कि इन शक्तिपीठों के मेलों और नवरात्र के दौरान श्रद्धालु ट्रकों व टैम्पों यहां पहुंचते हैं, जिससे हादसों का खतरा बना रहता है। हालांकि उच्च न्यायालय द्वारा मालवाहक वाहनों में यात्रियों को ढोने पर पाबंदी लगाई गई है, लेकिन इन आदेशों का खुलेआम उल्लंघन ये बाहरी लोग कर रहे हैं। हिमाचल के साथ लगते पंजाब से यहां इन वाहनों में लोगों को खुलेआम ढोया जाता है। वहीं कई वाहनों को डबल डैकर बनाकर इनमें बाहरी राज्यों से श्रद्धालुओं को ढोया जाता है, जिससे हादसों का खतरा कई गुना अधिक बढ़ जाता है। इसके चलते यहां कई बार श्रद्धालुओं से भरे ट्रकों व टैम्पों   की दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन इनसे भी सबक नहीं सीखा जा रहा। हिमाचल पुलिस और पंजाब पुलिस द्वारा संयुक्त तौर पर इन वाहनों में यात्रियों को ढोने पर कार्रवाई करने के लिए कई बार रणनीति बनाई गई,  इसके बावजूद मालवाहक वाहनों में बाहरी राज्यों की इन सवारियों को ढोने पर रोक नहीं लग पाई है।

समर सीजन में हायतौबा

प्रदेश के पर्यटक स्थलों पर हर साल गर्मियों और सर्दियों के सीजन के दौरान अकसर ट्रैफिक जाम से जूझना पड़ता है। हालांकि प्रशासन द्वारा इनसे निपटने के लिए हर साल योजनाएं तैयार की जाती हैं और पुलिस भी इसके लिए तैनात की जाती है, लेकिन ट्रैफिक जाम का यह मर्ज कम होने का नाम नहीं ले रहा। धर्मशाला, मकलोडगंज, भागसूनाग  जैसे प्रख्यात स्थलों पर गर्मियों में भारी संख्या में सैलानी पहुंचते हैं, जो कि यहां यातायात समस्या को बढ़ा रहे हैं। यही हालात पर्यटन के लिए ख्यात कुल्लू व मनाली नगरी की भी है। सैलानियों की पसंदीदा जगहों में कुल्लू व मनाली शामिल है।  हालांकि कुल्लू, मनाली, रोहतांग, भुंतर, मणिकर्ण में ट्रैफिक नियंत्रित करने के लिए पुलिस व होमगार्ड्स के जवानों को जरूर तैनात किया जाता हैं, लेकिन भारी संख्या में सैलानियों के वाहनों के पहुंचने से जवान भी ज्यादा कुछ नहीं कर कर पाते। यातायात की समस्या से निपटने में प्रशासन बेबस दिखता है और यहां जगह-जगह वाहनों की कतारें लग जाती हैं, जिनमें स्थानीय लोग भी घंटों जाम में फंस जाते हैं।

टूरिस्ट प्वाइंट पर सबसे ज्यादा दिक्कत

सैलानियों की संख्या बढ़ने के कारण  रोहतांग,  कसोल और औट से लेकर मनाली तक सबसे अधिक ट्रैफिक समस्या देखी गई है। ऐसे में यहां लोगों का कीमती वक्त ट्रैफिक  जाम में ही जाया हो जाता है। इसी तरह सोलन के पर्यटन स्थल कसौली में भी पर्यटन सीजन के दौरान ट्रैफिक जाम आउट ऑफ कंट्रोल हो जाता है। यहां पर गडकल,  मंकी प्वाइंट पर गर्मियों और वीकेंड पर भारी तादाद में सैलानी पहुंचते हैं। इससे यहां दोनों जगहों पर वाहनों की कतारें लग जाती है। राजधानी शिमला में भी सैलानियों की यातायात की समस्या बढ़ाने में बड़ी भूमिका रहती है। गर्मियों में तो यहां ट्रैफिक समस्या काबू से बाहर हो जाती ही।

जाम लेता है जान

प्रदेश में सैलानियों की आमद से जहां राज्य में विकास को गति मिली है, लेकिन इससे कई समस्याएं भी बढ़ी हैं। सैलानियों की तादाद बढ़ने से एक बड़ी समस्या ट्रैफिक की भी पैदा हो रही है। प्रदेश में हर साल करीब तीन करोड़ बाहरी राज्यों और विदेशों से यहां पहुंचते हैं। इनमें से काफी सख्या में सैलानी अपने वाहनों के साथ यहां पहुंच रहे हैं। इसके चलते यहां की सड़कों पर ट्रैफिक कंजक्शन भी बढ़ने लगा है। इससे स्थानीय लोगों का जीना तो दूभर गया है, वहीं सैलानी भी इससे कम परेशान नहीं है।

पुलिस के छूट जाते हैं पसीने

शिमला शहर में पीक सीजन के दौरान एक ही दिन में 10 से 15 हजार वाहन सैलानियों के रोजाना यहां पहुंचते हैं। वहीं कुछ मौकों, जैसे नववर्ष आदि पर तो शिमला शहर में 25 से 30 हजार वाहन भी सैलानियों के पहुंचते हैं और सैलानियों की तादाद पौने एक लाख तक पहुंच जाती है। यहां सैलानी अधिकतर अपने वाहनों के साथ यहां पहुंचते, ऐसे में पुलिस को यातायात को नियंत्रित करने में काफी पसीना बहाना पड़ता है।

अपने साथ बीमारियां लाते हैं मेहमान

हिमाचल प्रदेश में जैसे ही पर्यटन सीजन शुरू होता है,उससे कई वायरल बीमारियां भी उत्पन्न हो जाती हैं। गर्म राज्यों से हिमाचल घूमने आने वाले पर्यटक अपने साथ जापानी बुखार, डेंगू, स्वाइन फ्लू और कई तरह के वायरल को अपने साथ लाते हैं। राजधानी शिमला में वायरल फैलने का सबसे ज्यादा खतरा रहता है, जिसका कारण यह है कि पर्यटन की दृष्टि से राजधानी में ज्यादा पर्यटक पहुंचते हैं। वहीं कुल्लू, मनाली, बिलासपुर, मंडी में भी पर्यटन सीजन में वायरल के मामलों में बढ़ोतरी होती है।  स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इस साल 19 अगस्त तक 219 मामले स्क्रब टायफस के पॉजिटिव आए। इसी तरह डेंगू के मामले में भी दिन व दिन बढ़ोतरी हो रही है। प्रदेश में 300 से 400 तक के मामले डेंगू के आ चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि राज्य में फैलने वाले वायरल का सबसे बड़ा कारण पर्यटकों की बढ़ रही भीड़ भी है। बाहरी राज्यों से आने वाले पर्यटक अपने साथ कई तरह के वायरल को भी साथ लाते है, जिससे वह वायरल एक दूसरे से फैलकर आगे बढ़ जाता है। हालांकि प्रदेश स्वास्थ्य विभाग राज्य में पर्यटकों की बढ़ रही भीड़ को देखते हुए वायरल से निपटने के लिए हमेशा तैयार रहते है। विंटर सीजन में जहां स्वाइन फ्लू को लेकर प्रशासन अलर्ट रहता है तो वहीं समर सीजन में स्क्रब टायफस, डेंगू और पीलिया को लेकर अलर्ट घोषित कर देते है। स्वास्थ्य महकमे से मिली जानकारी के अनुसार डेंगू, स्क्रब टायफस और स्वाइन फ्लू जैसी बीमारियां तभी फैलती हैं, जब यह वायरल दूसरे राज्यों से फैलकर आता है।

नशा भी साथ पहुंचा रहे हैं सैलानी

हिमाचल में नशे के काले धंधे के कारोबार को फैलाने में बाहर से आने वाले लोगों और सैलानियों का बड़ा हाथ देखने को मिल रहा है। हिमाचल में जैसे-जैसे पर्यटकों की गतिविधियां बढ़ रही हैं, वैसे-वैसे यहां नशे का धंधा भी तेजी से फैल रहा है। सैलानी शहरी इलाकों में ही नहीं बल्कि हिमाचल के ग्रामीण इलाकों में भी अब पहुंचने लगे हैं। ये लोग यहां चरस, अफीम जैसे नशीले पदार्थ तस्करी को बढ़ावा दे रहे हैं और नशीले पदार्थों को यहां से बाहरी राज्यों तक पहुंचा रहे हैं। इतना ही नहीं बाहर से आने वाले सैलानी यहां नशे की सप्लाई कर रहे हैं। यहां हेरोइन, कोकीन व चिट्टा जैसी सिंथेटिक ड्रग्ज के कारोबार में बाहरी राज्यों के लोगों का हाथ पाया जा रहा है। कई लोग कहने के लिए तो यहां यहां पर्यटन के नाम पर पहुंचते हैं, लेकिन यहां नशे के अपने धंधे में शामिल हो जाते हैं। राज्य में शिमला, कुल्लू, मनाली जैसे पर्यटन स्थलों पर भारी संख्या में बाहरी राज्यों से सैलानी पहुंचते हैं। वहीं इन जगहों पर नशे का कारोबार भी चरम पर है।