Sunday, November 17, 2019 03:39 PM

पर्यावरण मित्र फोरलेनिंग सड़कें जरूरी

अनुज कुमार आचार्य

लेखक, बैजनाथ  से हैं

बरसात और बर्फबारी के सीजन में हर साल प्रदेश की सड़कों को नुकसान पहुंचता है। सरकार अपने स्तर पर सालाना लगभग 500 करोड़ रुपए के बजटीय प्रावधान से इनका रख-रखाव करती है। जबकि केंद्र से राज्य के नेशनल हाई-वे के लिए  मात्र 100 करोड़ रुपए की रकम मिलती है। यदि केंद्र सरकार उदारता पूर्वक धनराशि उपलब्ध करवाए तो प्रदेश में सड़कों की हालत सुधर सकती है...

हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य में सड़कों को विकास का वाहक माना जाता है और यही कारण है कि प्रदेश की सड़कें इस पहाड़ी राज्य की आर्थिकी, पर्यटन और सामाजिक प्रगति में अहम भूमिका निभा रही हैं। 1948 में प्रदेश में मोटर योग्य कुल 288 किलोमीटर लंबी सड़कें थीं, जिनकी वर्तमान लंबाई अब लगभग 35652 किलोमीटर हो चुकी है। बरसात और बर्फबारी के सीजन में हर साल प्रदेश की सड़कों को नुकसान पहुंचता है। सरकार अपने स्तर पर सालाना लगभग 500 करोड़ रुपए के बजटीय प्रावधान से इनका रख रखाव करती है। जबकि केंद्र से राज्य के नेशनल हाई-वे के लिए नाम मात्र 100 करोड़ रुपए की रकम मिलती है। यदि केंद्र सरकार उदारता पूर्वक धनराशि उपलब्ध करवाए तो प्रदेश में सड़कों की हालत भी सुधर सकती है वरना सीमित संसाधनों के चलते राज्य सरकार के भी हाथ बंधे हुए हैं। इस प्रकार देखा जाए तो जिस अनुपात में प्रदेश में वाहनों की संख्या बढ़ी है और बड़ी संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक प्रदेश में अपने वाहनों में सफर करते हैं, उसके दृष्टिगत बढ़ते वाहनों के बोझ के चलते प्रदेश में पर्यावरण मित्र फोरलेनिंग सड़कों का बनाया जाना जरूरी हो गया है। यह सही है कि कुछ पर्यावरण प्रेमी फोरलेनिंग सड़कों के निर्माण को लेकर सवाल उठाते हैं, लेकिन ऐसे समय में जब भारत के बाकी राज्यों खासकर पड़ोसी राज्य  पंजाब के सभी प्रमुख शहर आपस में फोरलेनिंग से जुड़ गए हों तो हिमाचल में मुख्य राष्ट्रीय राजमार्गों  को फोरलेनिंग में बदलने की मांग नाजायज नहीं कही जा सकती है। बल्कि अभी तक तो इनका युद्धस्तर पर निर्माण कार्य शुरू भी हो जाना चाहिए था। हिमाचल प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग 2630 किलोमीटर लंबा है। राज्य की 69 सड़कों को नेशनल हाई-वे घोषित किया गया है जिनकी कुल लंबाई 4311 किलोमीटर है। लोक निर्माण विभाग का नेशनल हाई-वे विंग राष्ट्रीय राजमार्ग सड़कों के निर्माण और रखरखाव की देखभाल करता है। इसके अलावा प्रदेश की सभी प्रमुख सड़कों के निर्माण और रखरखाव की जिम्मेदारी भी राज्य लोक निर्माण विभाग के पास है। नियमों के मुताबिक डबल लेनिंग  सड़क की चौड़ाई 24 मीटर और फोरलेन सड़क की चौड़ाई 45 मीटर होना जरूरी है। वर्तमान समय में भारत में राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लंबाई लगभग 131326 किलोमीटर है! देश में नेशनल हाई-वे भारत में उपलब्ध कुल सड़क नेटवर्क का मात्र 2 प्रतिशत है, लेकिन यह देश के सड़क ट्रैफिक का लगभग 40 फीसदी भाग का बोझ उठाता है। भारत का रोड़ नेटवर्क  विश्व का दूसरा सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क है और भारत में सभी प्रकार की सड़कों की कुल लंबाई 5472114 किलोमीटर है। भारत में कुल माल ढुलाई का 60 प्रतिशत और यात्री यातायात का 85 फीसदी कार्य सड़कों के द्वारा संपन्न होता है। राष्ट्रीय राजमार्ग नियंत्रण एक्ट की धारा 42 के तहत स्पष्ट किया गया है कि हाइवे के मध्य से 40 मीटर तक निर्माण की इजाजत कतई नहीं मिलेगी, लेकिन इसके बावजूद हिमाचल प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग और राज्य राजमार्ग सड़कों के एकदम साथ-साथ नित नए अवैध निर्माण कार्य धड़ल्ले से हो रहे हैं।

नेशनल हाईवे के उच्चाधिकारियों को चाहिए कि वे बरसात के बाद सड़कों पर पड़े गड्ढों की तो सुध लें ही, वहीं सड़कों के किनारे हो रहे अतिक्रमण और दुकानदारों द्वारा अवैध कब्जों को हटवाने के लिए भी आगे आएं। हिमाचल प्रदेश के नागरिकों की फोरलेनिंग की मांग नाजायज नहीं है बल्कि यह प्रदेश के सभी प्रकार के वाहनों की लंबी आयु, सुरक्षा तथा प्रतिवर्ष पर्यटकों की बढ़ती संख्या के दृष्टिगत भी नितांत आवश्यक है कि उन्हें अच्छी-चौड़ी, सुरक्षित सड़कों में यातायात की सुविधाएं हासिल हों। फोरलेनिंग निर्माण के मामले में हिमाचल प्रदेश पहले से ही बाकी राज्यों के मुकाबले पिछड़ा हुआ है। मनाली से लेह-लद्दाख और चीन सीमा की निकटता के दृष्टिगत भी सैन्य दृष्टिकोण से हिमाचल में चौड़ी सड़कों का निर्माण होना समय की मांग है। यह सही है कि अब बनाई जाने वाली सड़कें पर्यावरण मित्र हों तथा इन सड़कों का निर्माण प्राकृतिक संरचना के अनुरूप होना चाहिए और साथ ही इन सड़कों के विस्थापितों को उचित मुआवजा मिलना चाहिए। प्रदेश में दिनोंदिन बढ़ती वाहनों की संख्या के अनुपात में सुरक्षित यातायात के दृष्टिगत फोरलेनिंग सड़कें  बनाना हमारी मजबूरी भी है और जरूरत भी है। उम्मीद है कि पठानकोट-मंडी और किरतपुर-नेरचौक-मनाली तथा धर्मशाला-शिमला फोरलेनिंग  राष्ट्रीय राजमार्गों को प्राथमिकता के आधार पर बनवाया जाएगा ताकि कम चौड़ी सड़कों के चलते दिनोंदिन होने वाली दुर्घटनाओं से प्रदेशवासियों को राहत मिल सके। 

हिमाचली लेखकों के लिए

लेखकों से आग्रह है कि इस स्तंभ के लिए सीमित आकार के लेख अपने परिचय तथा चित्र सहित भेजें। हिमाचल से संबंधित उन्हीं विषयों पर गौर होगा, जो तथ्यपुष्ट, अनुसंधान व अनुभव के आधार पर लिखे गए होंगे।   

-संपादक