Monday, October 21, 2019 10:07 AM

पहले नारे फिर धरने पर बैठे असहाय मजदूर

शिमला—सीटू जिला कमेटी शिमला ने बालजीज प्रबंधन द्वारा मजदूरों को उनकी आर्थिक देनदारियां न देने के खिलाफ सैकड़ों मजदूरों के साथ बालजीज रेस्तरां के बाहर प्रदर्शन किया। मजदूरों ने कई घंटों तक जोरदार नारेबाजी की व धरने पर बैठ गए। सीटू ने बालजीज प्रबंधन द्वारा मजदूरों की वित्तीय देनदारियों के करोड़ों रुपए हड़पने का आरोेप लगाया है। सीटू ने  उच्च न्यायालय  से मजदूरों के अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए हस्तक्षेप करने व 12 जुलाई  के अपने ही आदेशों को लागू करवाने की मांग की है। सीटू ने बालजीज प्रबंधन को चेताया है कि अगर उसने मजदूरों की वित्तीय देनदारियां न दीं तो  प्रबंधन को मजदूरों के आंदोलन का सामना करना पड़ेगा। सीटू नेता विजेंद्र मेहरा ने आरोप लगाते हुए कहा कि   बालजीज प्रबंधन दो तरह से कानून की हत्या कर रहा है। औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 के अनुसार 70 मजदूरों को छंटनी भत्ता, ग्रेच्युटी, बोनस, नोटिस पे व लीव एनकेशमेंट का करीब दो करोड़ रुपए का भुगतान न करके  देश के कानून को ताक पर रखा  जा रहा है। उन्होेंने कहा कि उच्च न्यायालय ने 12 जुलाई 2018 के अपने आदेशों में स्पष्ट लिखा है कि बालजीज के भवन को मालिकों के हवाले करने से पहले बालजीज प्रबंधन सुनिश्चित करे कि कार्यरत 70 मजदूरों की सभी कानूनी आर्थिक देनदारियां उन्हें सुनिश्चित की जाएं। बालजीज प्रबंधन एक तरफ औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 के कानून का मजाक उड़ा रहा है वहीं दूसरी ओर  उच्च न्यायालय हिमाचल प्रदेश के 12 जुलाई 2018 के आदेशों की खुली अवहेलना कर रहा है।  उच्च न्यायालय ने अपने आदेशों में स्पष्ट लिखा है कि अगर मजदूरों के अधिकारों को प्रबंधन सुनिश्चित नहीं करता है तो फिर प्रबंधन के ऊपर उच्च न्यायालय के आदेशों की अवहेलना के तहत कार्रवाई की जाएगी। सीटू जिला महासचिव विजेंद्र मेहरा ने कहा है कि बालजीज रेस्तरां में मजदूर पिछले 43 वर्षों से कार्यरत हैं। उन्होंने पूरी जिंदगी इस रेस्तरां के व्यापार को ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए लगा दी। इसके बावजूद आज बालजीज प्रबंधन रेस्तरां के बंद होने पर मजदूरों के अधिकारों को देने से आनाकानी कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रबंधन उच्च न्यायालय के आदेशों को ठेंगा दिखा रहा है। यह प्रबंधन पूरी तरह देश के कानून का मजाक उड़ा रहा है। उन्होंने जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन से मांग की है कि वे हिमाचल उच्च न्यायालय के आदेशों की पालना करवाएं व उसकी अवहेलना करने पर बालजीज प्रबंधन पर कॉंटेम्पट ऑफ कोर्ट्स एक्ट के तहत न्यायालय की अवहेलना करने का मुकद्दमा दर्ज करें व कानूनी कार्रवाई अमल में लाएं।