Thursday, August 22, 2019 05:19 PM

पहले पुराना हिसाब, फिर नया बजट

केंद्र सरकार ने जारी की नई गाइडलाइंस जारी, स्कूल प्रबंधन को ऑनलाइन देनी होगी खर्च की जानकारी

शिमला  - प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों को बजट का यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट देना जरूरी कर दिया है। सरकारी स्कूलों को अब केंद्र व प्रदेश सरकार की ओर से तभी बजट दिया जाएगा, जब वे पुराने बजट का यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट ऑनलाइन डालेंगे। केंद्र सरकार ने इस बाबत स्कूलों को बजट की पहली किस्त जारी कर नई गाइडलाइन जारी कर दी है। केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय ने समग्र शिक्षा अभियान को भी आदेश दिए हैं कि वह स्कूलों को तब तक बजट न दे, जब तक वे पुराना यूसी नहीं भेजते हैं। केंद्र ने नई गाइडलाइन में कहा कि अब स्कूलों का विकास होगा और हर साल शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर स्कूल प्रबंधन ने क्या कार्य किए, यह सब देखा जाएगा। इसके साथ ही अब स्कूल प्रबंधन को केंद्र व प्रदेश सरकार से मिलने वाले बजट की राशि भी पूरी खर्च करनी होगी। समय पर बजट खर्च न करने वाले स्कूलों को भी अगला बजट नहीं दिया जाएगा। शिक्षा विभाग को भी स्कूलवाइज दिए गए बजट का ब्यौरा और स्कूलों ने इस बजट को कहां खर्च किया है, इसका भी रिकार्ड मेंटेन करना होगा। केंद्र सरकार ने साफ किया है कि हर साल स्कूल व शिक्षा विभाग का यह रिकार्ड चैक किया जाएगा। केंद्रीय मानव संसाधान मंत्रालय ने हिमाचल को वर्ष 2019-2020 के बजट की पहली किस्त जारी कर दी है। इसके तहत समग्र शिक्षा में हिमाचल को 98 करोड़ की राशि जारी हो गई है। इसके प्राथमिक शिक्षा के लिए 72 करोड़ और सेकेंडरी के लिए 16 करोड़ की राशि दी गई है। एसएसए ने इस वित्त वर्ष के लिए आई बजट राशि लगभग 15 हजार स्कूलों को जारी कर दी है। स्कूलों को बजट देने के साथ ही एसएसए ने यह भी निर्देश जारी कर दिए हैं कि सभी प्रबंधन खर्च किए गए बजट का पूरा भेंजे। गौर हो कि एमएचआरडी की नई गाइडलाइन के तहत अब स्कूलों को बजट की अगली ग्रांट तभी मिलेंगी, जब वे पुराने बजट को पूरी तरह से खर्च कर देंगे। बजट से प्री-नर्सरी स्कूलों का विकास, छात्रों को नए लर्निंग आउटकम्स प्लान के साथ इंन्फ्रास्ट्रकचर उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए गए हैं।

मांगा जाएगा पेंडिंग बजट

समग्र शिक्षा अभियान केंद्र से पिछले साल के पेंडिंग बजट की मांग भी करेगा। गौर हो कि प्रदेश की सरकारी शिक्षा में गुणवत्ता लाने के मकसद से प्री-प्राइमरी क्लासेज भी शुरू की गई हैं। इसके साथ ही स्कूलों में क्याना बोर्ड  के माध्यम से ऑनलाइन स्टडी को भी बढ़ावा दिया गया है।