Thursday, August 06, 2020 07:54 PM

पांवटा में नर्सिंग स्टाफ की कमी

सीएमओ ने जांची सिविल अस्पताल की व्यवस्था,जल्द से जल्द खाली पदों को भरने की उठाई मांग

पांवटा साहिब - मुख्य चिकित्सा अधिकारी सिरमौर डा. केके पराशर ने गुरुवार को पांवटा साहिब सिविल अस्पताल का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य सेवाएं जांची और पत्रकारों से भी मुलाकात की। जानकारी के मुताबिक नर्सिंग स्टाफ की कमी से जूझ रहे पांवटा साहिब सिविल अस्पताल में व्यवस्था पटरी से उतर रही है। कम स्टाफ होने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन व्यवस्था को बनाने के लिए दिन-रात एक कर रहा है, लेकिन जब तक स्टाफ नर्स के सभी रिक्त पद नहीं भरे जाते व्यवस्था नहीं बन पा रही है। नर्सिंग स्टाफ की कमी के चलते तैनात स्टाफ नर्स दौहरी ड्यूटी करने को मजबूर है। छुट्टियां मिलना तो दूर की बात है। ऐसे में कार्य के बोझ तले नर्सें पिस रही हैं। सीएमओ ने भी अस्पताल का दौरा किया और माना कि स्टाफ नर्स की कमी के चलते कुछ सेवाएं प्रभावित हो रही हैं, जिसके लिए उच्च स्तर पर बार-बार मांग की जा रही है। इस दौरान सीएमओ ने पत्रकारों से भी मुलाकात की। पत्रकारों के पूछे जाने पर सीएमओ ने कहा कि यहां पर नर्सिंग स्टाफ की कमी है। बावजूद इसके चार वार्डों में से तीन वार्ड संचालित किए हुए हैं। चिल्ड्रन, महिला और एमर्जेंसी वार्ड में पेशेंटों की भर्तियां की जा रही हैं जहां पर उपलब्ध नर्सें दौहरी ड्यूटी निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि यहां पर 150 बिस्तरों के हिसाब से करीब 46 स्टाफ नर्स की जरूरत है, जबकि उनके पास इस समय केवल मात्र 12 नर्स ही उपलब्ध हैं। ऐसे में सरकार और विभाग से यहां पर जल्द से जल्द नर्सों के खाली पड़े पदों को भरने की मांग की गई है। गौर हो कि पांवटा साहिब सिविल अस्पताल में रोजाना औसतन 700 से 800 ओपीडी दर्ज होती है। कभी कभार तो यह ओपीडी बढ़कर एक हजार तक हो जाती है, जिस कारण यहां तैनात स्टाफ भी बौना लगने लगता है। हालांकि चिकित्सकों की कमी अस्पताल में नहीं है, लेकिन भर्ती किए गए पेशेंट्स को देखने के लिए स्टाफ नर्स की भारी कमी है जिससे यह अस्पताल रैफरल अस्पताल बनकर रह गया है। गौर हो कि इस अस्पताल में जिला की चार विधानसभाओं शिलाई, श्रीरेणुकाजी, नाहन और पांवटा साहिब सहित पड़ोसी राज्य उत्तराखंड और हरियाणा से भी मरीज पहुंचते हैं, जिस कारण यहां पर अकसर भीड़ रहती है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. केके पराशर ने बताया कि इस मामले को सरकार और विभागीय उच्चाधिकारियों के समक्ष बार-बार उठाया गया है। अभी सरकार ने नर्स की भर्ती करनी है। उम्मीद है पांवटा साहिब को भी कुछ नर्सें मिल जाएंगी।