पिता के काम को मैंने ऑब्जर्व किया है मुस्तफा

फिल्म ‘मशीन’ के साथ बालीवुड में डेब्यू करने वाले अभिनेता मुस्तफा अब शार्ट फिल्म ‘द लास्ट मील’ से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर डेब्यू करने जा रहे है, बता दें कि मुस्तफा ने अपने करियर की शुरुआत अपने पिता की फिल्म ‘मशीन’ से की थी। फिल्मों की लंबी यात्रा के बाद अब मुस्तफा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नजर आएंगे। उनके साथ हाल ही में इंटरव्यू के दौरान हुई बातचीत के मुख्य अंश पेश हैं...

शार्ट फिल्म ‘द लास्ट मील’ के साथ आपका डिजिटल डेब्यू अनुभव कैसा रहा?

मैंं पहली बार शार्ट फिल्म कर रहा हूं। वैसे तो मैं पढ़ाई कर रहा था तब मैंने स्टूडेंट्स शार्ट फिल्म पर बहुत काम किया था। उसके बाद अब पहली बार काम कर रहा हूं और बहुत अच्छा एक्सपीरियंस रहा है क्योंकि मैंने स्टोरी देखी जो कंटेंट बहुत अच्छा है, बहुत अच्छी कहानी है। एक बेटे और मां की कहानी है और बहुत ही इमोशनल है । ऐसे कंटेंट मिलना बहुत मुश्किल है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ऐसे कंटेंट लोग देखना बहुत पसंद करेंगे। क्योंकि सब लोग फोन पर रहते हैं और एक फिल्म देखना उनके लिए बड़ी बात नहीं है।

जरीना वहाब के साथ काम कर के आपने क्या सीखा?

जब मैं उनके साथ सेट पर था, तो उन्होंने मुझे एक बेटे की तरह ट्रीट किया था और इस इमेजिंग एक्टर्स, इतनी एक्सपीरेंस एक्ट्रेस है उसके साथ काम करके सिर्फ  उनकी जो एनर्जी होती है उन्हीं को फॉलो कर रहा था और उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला। कभी कभी वह मुझे गाइड करती थी। जब हमारे साथ मंे सिन नहीं थे और बहुत अच्छा लगा उनके साथ काम करके।

आपको लगता है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म ने एक्टर के काम करने के तरीकों को बदल दिया है?

दरअसल जो भी अभी प्लेटफॉर्म आए हैं बहुत अच्छे हैं क्योंकि एक्टर के तौर पर आपको बहुत कुछ प्ले करने को मिलता है जो भी नई कैरेक्टर आप प्ले करते हैं और एक्टे्रस थोड़ा सेल्फिश होता है। उनको सारे कैरेक्टर सब तरीके से प्ले करना है और यह प्लेटफॉर्म उनके लिए बहुत जरूरी है।

लोगों का मानना है कि डायरेक्टर के बेटे होने का फायदा है कि उनको बालीवुड में डेब्यू आसानी से मिल जाता है, आपका क्या मानना है?

देखिए मैं इस बात पर यही कहना चाहूंगा कि चाहे वह डायरेक्टर का बेटा हो या एक्ट्रस का बेटा हो, या फिल्म इंडस्ट्री से न हो, सब लोगों को उतनी ही मेहनत लगती है जितनी एक डायरेक्टर के बेटे को लगती है। क्योंकि यहां पर मेहनत ज्यादा करनी पड़ती है क्योंकि उसे अपने आपको  प्रूफ करना होता है। प्लस इतना बड़ा नाम केरी कर रहे हैं उसको भी प्रूफ करना होता है, तो प्रेसर बहुत ज्यादा होता है।

अपने पिता से आपने क्या सीखा है?

पिता के काम को मैंने ऑब्जर्व किया है जिस तरह से वह काम करते हैं, शूट करते हैं और मैंने दो फिल्म उनके साथ असिस्ट की है तो सिर्फ  उनको देखते ही जिस तरह से मेरे डैड मेरे अंकल काम डिस्कस करते हैं, चौबीस घंटे स्क्रिप्ट में लगे रहते हैं, मैंने उनको देखते-देखते बहुत कुछ सीखा है। एज एक्टर उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला।

मशीन’ के बाद फिल्मों से दूरी बनाए रखने की क्या वजह है?

मशीन के बाद मैंने बहुत सारी स्क्रिप्ट सुनी, लेकिन मुझे उनमंे से मुझे इतनी अच्छी लगी नहीं की में वह कर लूं काफी फिल्में ऐसे थी जो मुझे लगा कि यह नहीं करनी चाहिए और जब यह शार्ट फिल्म आई तो मैंने स्टोरी सुनकर तुरंत हां कह दिया क्योंकि इसका कंटेंट इतना अच्छा था की कुछ कैरेक्टर से बाहर आते अलग लगे। तो मुझे ऐसी स्क्रिप्ट नहीं मिली जिसमें मैं अलग लगू।

आप कैसे कैरेक्टर और कैसी फिल्मंे करना चाहते हैं?

वैसे तो मैं बहुत सारे कैरेक्टर निभा न चाहता हूं, जो मैंने ‘मशीन’ में किए उनसे अलग करना चाहता हूं और अगली मेरी काफी फिल्में एनाउंस होने वाली हैं और मैंने ओनेस्टली ऐसा सोचा नहीं है कि यह कैरेक्टर करना है क्योंकि जो नई स्क्रिप्ट आती है उनमें नई कैरेक्टर होते हैं वह मैंं करना चाहता हूं और एक्शन के रिलेटेड मशीन में कुछ खास था नहीं।

आपके करियर में आपने सबसे ज्यादा फोकस किसमें किया है?

मैंने सबसे ज्यादा फोकस अपनी एक्टिंग पर किया है। मुझे लगता है कि अगर आप किसी को सच दिखा सकते हो एक एक्ट-आउट कर के तो मुझे लगता है उसे बेहतर कुछ नहीं हो सकता एक एक्टर के लिए।

- दिनेश जाला

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