पुलिस का अव्वल चेहरा बनी प्रियंका

सपने उन्हीं के सच होते हैं,

जिनके सपनों में जान होती है।

पंखों से कुछ नहीं होता,

हौसलों से उड़ान होती है।।

इन पंक्तियों को उपमंडल जवाली के अंतर्गत पंचायत बेहि पठियार के गांव मंडोल की प्रियंका कुमारी ने सच साबित कर दिखाया है। प्रियंका कुमारी ने सकोह वाहिनी के 19वें दीक्षांत समारोह में पुलिस महानिदेशक सीताराम मरड़ी के हाथों आलराउंड बेस्ट का खिताब हासिल कर अपना, अपने माता-पिता का नाम प्रदेशभर में रोशन किया है। इसी के साथ साबित भी कर दिया है कि आज के युग में लड़कियां लड़कों से कम नहीं हैं। प्रियंका कुमारी का जन्म 12 नवंबर, 1996 को मंडोल गांव में हरबंस सिंह के घर में हुआ। प्रियंका ने अपनी प्राइमरी शिक्षा राजकीय प्राथमिक स्कूल मंडोल से की, 10वीं की शिक्षा राजकीय उच्च विद्यालय बेहि पठियार से उत्तीर्ण की। जमा दो की परीक्षा कला संकाय में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला अमनी से पास की। राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान शाहपुर से एक साल का कम्प्यूटर में डिप्लोमा किया और अभी इक्डोल के माध्यम से बीए कर रही हैं। प्रियंका जब 8 साल की थी और तीसरी कक्षा में पढ़ती थी तो उसके सिर से पिता का साया उठ गया। माता रीना देवी ने मेहनत मजदूरी करके पढ़ाया-लिखाया तथा कभी भी पिता की कमी महसूस नहीं होने दी। प्रियंका ने बताया कि उसकी इच्छा थी कि वह भर्ती हो जिसके लिए मेहनत की और 26 जून, 2018 को पुलिस में भर्ती हो गई। प्रियंका  ने बताया कि खिताब हासिल करना उनका ध्येय था तथा दीक्षांत समारोह में आलराउंड बेस्ट खिताब हासिल कर अपने मंसूबों को साफ  जाहिर कर दिखाया। प्रियंका की एक छोटी बहन रुचि ठाकुर है जिसने जमा दो की परीक्षा दे रखी है। प्रियंका को यह खिताब पीटीसी डरोह व सकोह में 19वें दस्ते के इस प्रशिक्षण में समस्त क्षेत्रों में द्वितीय व सकोह के प्रशिक्षण में प्रथम रहने पर मिला है। प्रियंका ने इसका श्रेय अपनी माता रीना देवी की मेहनत, ट्रेनर व अपनी कड़ी लग्न को दिया है।

महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं...

प्रियंका कुमारी की माता व बहन

पुलिस सेवा के प्रति आकर्षण का कारण?

जब भी किसी लड़की या महिला को पुलिस की वर्दी में देखती तो उसकी तरफ  आकर्षित होती। यही आकर्षण मुझे इस मुकाम तक ले आया।

जीवन के आरंभिक संघर्ष से जो सीखा?

छोटी सी उम्र में ही पिता का साया छिन गया और माता को मेहनत करते देख यही सीखा कि कड़ी मेहनत व लगन से किसी भी मुकाम को हासिल किया जा सकता है।

मां की भूमिका को अगर बताना हो तो आपके लिए यह शब्द कितना प्रभाव रखता है?

मां का अर्थ ही सर्वस्व खुशियों को बच्चों के लिए न्यौछावर करना है। मां बच्चों की खुशियों के लिए अपनी सारी खुशियां त्याग देती है। मेरी मां तो मेरे लिए भगवान से भी बढ़कर है जिसने कड़ी परिस्थितियों से गुजरते हुए हमारा पालन-पोषण किया, मुझे व बहन को पढ़ाया और मुझे इस मुकाम तक पहुंचाया। सही मायनों में मैं भगवान से पहले अपनी मां को समझती हूं।

भावुक क्षणों से बाहर निकलने का आपका मंत्र क्या है?

माता-पिता के गले लगकर ही भावुक क्षणों से बाहर निकला जा सकता है या फिर अपनी भावुकता दूसरों के साथ शेयर करने से भावुक क्षणों से उभरा जा सकता है।

जो पुलिस प्रशिक्षण से मिला या अब बतौर कांस्टेबल आप खुद को कितनी सशक्त समझती हैं?

पुलिस प्रशिक्षण में मुझे कार्य करने का काफी अनुभव मिला और अब बतौर कांस्टेबल खुद को आत्मनिर्भर समझती हूं।

पासिंग आउट परेड में आल राउंड प्रदर्शन पर आप अपनी मेहनत को कैसे देखती हैं?

पासिंग आउट परेड में आलराउंड प्रदर्शन मेरे लिए बेहद खुशीभरा रहा। यह मेरे लिए सबसे खुशी भरे लम्हों में से एक है।

ऐसी कौन सी तीन वजह रहीं जिनके कारण यह खिताब मिलना ही था?

मां का आशीर्वाद, मेरी कड़ी मेहनत, लगन व विभागीय ट्रेनर का साथ ऐसी तीन वजह रहीं जिनके कारण यह खिताब मिल पाया।

प्रशिक्षण सेवा में औरत के शरीक होने से विभागीय छवि या कार्यशैली पर क्या असर देखती हैं?

प्रशिक्षण सेवा में शरीक होने से विभाग की छवि व कार्यशैली पर यही असर देखने को मिलता है कि आज के युग में महिला किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं है।

कौन सी ड्यूटी निभाना अधिक पसंद है?

ड्यूटी मेरे लिए सर्वोपरि है तथा विभाग के आलाधिकारी जिस भी जगह पर ड्यूटी लगाएंगे, उसी को पूरी मेहनत व लगन से निभाऊंगी।

आपके सामने कोई नारी आदर्श या रोल मॉडल कौन रहा?

मेरे लिए पूर्व प्रधानमंत्री स्व इंदिरा गांधी आदर्श रहीं हैं और रोल मॉडल  सौम्या सांब्यान रही हैं।

संघर्षरत हिमाचली बेटियों को आपकी सलाह?

मेरी संघर्षरत हिमाचली बेटियों को यही सलाह है कि अपना लक्ष्य चुनकर आगे बढ़ती रहो। लगन से कड़ी मेहनत करो जिससे किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। बिना किसी हिचक से आगे बढ़ो।

सफलता के बाद जो पहला कार्य पूरा किया। आगे कौन से सपने पूरे करने हैं?

पुलिस में भर्ती होने की सफलता के बाद आल राउंड खिताब अपने नाम किया। अभी आगे बहुत कुछ हासिल करके पुलिस विभाग व अपनी माता का नाम रोशन करना है।

अब खुद को नए संदर्भों में देखती हैं तो कितना गर्व महसूस करती हैं?

मैं अपने आपको पुलिस की वर्दी में देखकर खुद को काफी गौरवान्वित महसूस करती हूं, जो मैंने पुलिस ज्वाइन का सपना देखा था वह भी पूरा हो गया है।

— सुनील दत्त, जवाली

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