Tuesday, September 17, 2019 01:53 PM

पूर्व गृह मंत्री ‘तिहाड़ी’

जो कभी देश के गृहमंत्री थे, आज तिहाड़ जेल की एक संकरी-सी सेल में बंद हैं। वह पूर्व वित्त मंत्री भी हैं। यह पहला मामला है, लिहाजा ऐतिहासिक भी है, कि ऐसा ताकतवर शख्स एक आम कैदी की तरह जेल की कोठरी में है। फिलहाल उन्हें 19 सितंबर तक इसी न्यायिक हिरासत में रहना है। उन्हें कैदियों का लिबास नहीं पहनना पड़ेगा, क्योंकि अभी वह विचाराधीन कैदी हैं। कमोबेश पी. चिदंबरम को जेल तक पहुंचाना भारतीय न्यायपालिका के नीर-क्षीर विवेक और इंसाफ  का ही नतीजा है, लिहाजा एक मिथ भी टूटा है कि कानून के हाथ बड़े, राजनीतिक ताकत वाले लोगों तक नहीं पहुंचा करते। चिदंबरम के वकील, पूर्व कानून मंत्री कपिल सिब्बल ने भी लगातार दलीलें दीं कि उन्हें तिहाड़ जेल न भेजा जाए, वह प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के समक्ष आत्मसमर्पण को तैयार हैं और अदालत उनकी अग्रिम जमानत स्वीकार करे। लेकिन अदालत चिदंबरम/सिब्बल सरीखे ताकतवर चेहरों के सामने नहीं झुकी, बल्कि आर्थिक अपराध के आरोपों को इतना गंभीर माना कि तिहाड़ के अलावा कोई विकल्प शेष नहीं था। सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि चिदंबरम ने वित्त मंत्री रहते देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया था। विदेशी बैंकों पर उनका काफी नियंत्रण है। यदि उन्हें जमानत दी जाती है, तो विदेशों को भेजे अनुरोध-पत्रों पर सहयोग की उम्मीद करना बेमानी होगा। हालांकि सिब्बल ने इन दलीलों का विरोध किया। दरअसल जघन्य आरोप यह भी है कि चिदंबरम ने अपने संवैधानिक पद के साथ खिलवाड़ किया और भ्रष्टाचार किया, भ्रष्टाचार कराते रहे। बेशक चिदंबरम विचाराधीन कैदी हैं, अभी अदालत में आरोप साबित होकर अपराध बनने हैं, लेकिन अब देश के पूर्व गृहमंत्री ‘तिहाड़ी’ हो गए हैं। तिहाड़ में कई अपराधी, हत्यारे, आतंकी भी हैं, लेकिन चिदंबरम की जेड सुरक्षा के मद्देनजर उन्हें अलग कोठरी में रखा गया है। जेल के सुरक्षाकर्मी ही 24 घंटे पहरा देंगे। जेल नंबर 7 की कुछ सेल में बुजुर्ग कैदियों के लिए अलग से पत्थर के ऊंचे रैम्प बने हैं, जो खाटनुमा हैं। सेल में ही छोटे से वाशरूम में वेस्टर्न टायलेट की सुविधा भी दी गई है। वह अपना चश्मा और दवाइयां आदि भी साथ में रख सकते हैं। इसके अलावा, कोई विशेष सुविधा नहीं है। चिदंबरम को वातानुकूलित कक्ष नसीब नहीं होगा। रात में 9 बजे सोना है, कोठरी का ताला बंद कर दिया जाता है और सुबह छह-सात बजे जेलकर्मी उन्हें उठा देते हैं। नाश्ते में दलिया, ब्रेड, बिस्कुट और चाय है। 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में पूर्व संचार मंत्री ए.राजा, द्रमुक नेता कनिमोई, राष्ट्रमंडल खेल घोटाले में पूर्व मंत्री सुरेश कलमाड़ी, चारा घोटाले में लालू यादव और सहारा श्री सुब्रत राय आदि भी इसी जेल में रह चुके हैं। इनके अलावा हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला और उनके पुत्र अजय चौटाला शिक्षक भर्ती मामले में और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के भांजे रतुल पुरी और अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन, पूर्व आतंकवादी यासीन मलिक आदि अब भी तिहाड़ जेल में हैं। सत्ता के गलियारों में कितना भ्रष्टाचार व्याप्त है, इन मामलों और कैदियों से ही स्पष्ट हो जाता है। अभी तो पूरी एक जमात विचाराधीन है, क्योंकि उनके खिलाफ  जांच जारी है या पूछताछ होनी है, लिहाजा तिहाड़ में अगला प्रवेश किसका होगा, फिलहाल इस सवाल को भविष्य पर ही छोड़ देना चाहिए। देश के सामने सब कुछ स्पष्ट है। चिदंबरम कांग्रेस के बड़े नेता हैं और राज्यसभा सांसद भी हैं। अब उन पर ‘तिहाड़ी’ होने का ठप्पा लग चुका है। यदि जांच एजेंसियों के आरोप-पत्र दाखिल किए जाने के बाद अदालत ने उन्हें दो साल या अधिक की सजा सुना दी, तो उनका चुनावी जीवन समाप्त हो सकता है। वह कोई भी चुनाव लड़ने के अयोग्य होंगे। चुनाव न लड़ पाने की स्थिति में राजनीति कितने दिन तक चलेगी, कमोबेश चिदंबरम जरूर जानते हैं। फिलहाल उन्हें और सांसद-पुत्र कार्ति को एयरसेल और मैक्सिस मामले में एक विशेष अदालत ने अग्रिम जमानत दे दी है। अलबत्ता उसमें भी गंभीर आर्थिक अपराध निहित हैं। यदि अभी 14 दिन बाद तिहाड़ जेल से मुक्ति मिली, तो एयरसेल-मैक्सिस केस सामने खड़ा है। आर्थिक कुकर्मों से बचना चिदंबरम बाप-बेटे की नियति नहीं लगती।