Monday, June 01, 2020 02:27 AM

पौड़ीवाला शिवधाम

वैसे तो हिमाचल प्रदेश को देवभूमि कहा जाता है, क्योंकि यहां अनेक देवी-देवताओं के मंदिर स्थापित हैं।  ऐसा ही एक देवस्थल सिरमौर मुख्यालय लाइन से करीब सात किलोमीटर दूर काला अंब रोड के समीप है, जिसे पौड़ीवाला के नाम से जाना जाता है। पौड़ीवाला मेन रोड से करीब डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस मंदिर में तीन-चार फुट ऊंचा शिवलिंग स्थापित है। ऐसी मान्यता है कि यह शिवलिंग त्रेता युग का है।

यहां और भी तीन-चार छोटे-बड़े मंदिर हैं, जिनमें शिवलिंग स्थापित हैं। स्वर्ग की दूसरी पौड़ी के नाम से विख्यात है पौड़ीवाला शिवधाम। घने जंगल के बीच बसे इस शिवधाम का अलग ही महत्त्व है। हिमाचल के सिरमौर जिले के नाहन से सात किलोमीटर की दूरी पर यह शिवधाम स्थित है। मान्यता है कि महादेव के इस मंदिर में शिवलिंग का आकार प्रतिवर्ष चावल के दाने के समान बढ़ता है। सिरमौर जिला के मुख्यालय नाहन के समीप पौड़ीवाला में स्थित पौराणिक शिवालय देश के प्राचीन मुख्यालयों में से एक है। इसका इतिहास लंकापति रावण से जुड़ा है। जनश्रुति के अनुसार रावण ने अमरता प्राप्त करने के लिए भगवान भोलेनाथ की घोर तपस्या की। तपस्या से प्रसन्न होकर शिव शंकर भगवान ने उन्हें वरदान देकर कहा कि यदि एक दिन में वह स्वर्ग के लिए पांच पौडि़यां बना देंगे, तो उसे अमरता प्राप्त हो जाएगी।  रावण ने पहली पौड़ी हरिद्वार में हर की पौड़ी, दूसरी शिव मंदिर पौड़ीवाला, तीसरी चूड़ेश्वर महादेव और चौथी पौड़ी किन्नर कैलाश पर्वत पर बना ली। लेकिन आंख लगने के कारण वह पांचवी पौड़ी नहीं बना पाए। मान्यता है कि पौड़ी वाला स्थित इस शिवलिंग में साक्षात शिव शंकर भगवान विद्यमान है, जहां आने वाले हर श्रद्धालु की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मंदिर के मुख्य पुजारी बताते हैं कि पौड़ीवाला शिवधाम में शिवलिंग के मात्र दर्शनों से श्रद्घालुओं को अश्वमेध के समान फल मिलता है। इसीलिए इस मंदिर में लोगों का आना जाना लगा रहता है। मंदिर के चारों और शांत वातावरण मन को सुकून देता है।