Friday, September 20, 2019 12:30 AM

प्रदेशभर में अब नहीं चलेगी शिक्षकों की सांठ-गांठ

नई ट्रांसफर पालिसी लागू होने के बाद आसानी से नहीं होगी एडजस्टमेंट, विभाग ने कसी कमर

शिमला - प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षक अब आसानी से अपनी एडजेसटमेंट नहीं करवा पाएंगे। सालों से चल रही यह परंपरा सरकार व शिक्षा विभाग खत्म करने जा रहा है। नई ट्रासंफर पालिसी के तहत जो शिक्षक एक दूसरे से अदल बदल कर दस से प्रद्रंह किलोमीटर में ही सेवाएं दे रहे है, उनके लिए अब सख्ती अपनाई जाएंगी। हैरत है कि प्रदेश के कई जिलों में एक हजार से ज्यादा ऐसे शिक्षक है, जो एक दूसरे के साथ सांठ गांठ बनाएं हुए है, वहीं तीन साल पूरे होने पर एक दूसरे के स्कूल में ही पढ़ाने आ जाते हैं। शिक्षा विभाग ने ऐसे शिक्षकों का रिकार्ड एक बार फिर तलब करने के निर्देष जारी कर दिए हैं। दरअसल नई ट्रासंफर पालिसी लागू होने से पहले शिक्षा विभाग ऐसे शिक्षकों का रिकार्ड बनाना चाहते है, जो अपने घरों के नजदीक ही सालों से सेवाएं दे रहे है। विभागीय जानकारी के अनुसार एलमेंटरी में सबसे ज्यादा ऐसे शिक्षक है, जो दस सालों से एक ही स्कूल में सेवाएं दे रहे है। हांलाकि इसका कारण यह है कि उक्त स्कूल में पढ़ाने वाला कोई और शिक्षक नहीं है। ऐसे में 500 के करीब ऐसे शिक्षक है, जो दूसरा कोई शिक्षक न होने की वजह से वहीं पर डटे हुए है। अब शिक्षा विभाग अब इस परंपरा को खत्म करने के मूड़ में है। बताया जा रहा है कि प्रारंभिक व उच्च शिक्षा विभाग के सभी शिक्षकों को एक बार फिर से तीन साल बाद दूसरे स्कूल में सेवाएं देने के लिए भेजा जाएगा। वहीं, सालों से आस-पास के स्कूलों में रहने वाले शिक्षकों के अंक कम किए जाएंगे। शिक्षा विभाग नई ट्रासंफर पॉलिसी के तहत शिक्षकों को अंक देंगा। इसमें दूरदराज व जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षक ने कितनी बार सेवाएं दी है, इस आधार पर उन्हें अच्छे अंक दिए जाएंगे।

घर के नजदीक रहना पसंद करते हैं टीचर

शिक्षा विभाग हैरत में है कि आपसी सांठ गांठ से एक दूसरे स्कूल में अदला बदली करने में प्रदेश के कई स्कूलों के नाम है। इसमें सबसे पहले शिमला, सोलन, हमीरपुर, बिलासपुर जिला है। विभागीय सूत्र बतातें है कि अदला बदली करने वाले शिक्षकों के घर नजदीक हैं, यही वजह है कि वह वहां से जाना नहीं चाहते है।

सर्वे में हुआ यह खुलासा

शिक्षा विभाग के एक सर्वे में यह खुलासा हुआ था कि प्राइमरी से लेकर हाई स्कूलों में शिक्षकों की यह सांठ गांठ चल रही है। हैरानी तो इस बात की है कि पिछले वर्ष भी ट्रासंफर को लेकर बहुत चर्चा चली थी, लेकिन इसके कोई परिणाम नहीं निकल पाए थे। यहीं वजह है कि प्रदेश के आज भी ऐसे स्कूल है, जो शिक्षकों के इंतजार में है।