Thursday, August 22, 2019 05:46 PM

प्रदेश के अस्पतालों में पंजाब राज्य की प्रतिबंधित दवाएं

शिमला - पंजाब में ब्लैकलिस्टिड कंपनियों की दवाइयां हिमाचल के अस्पतालों में परोसी जा रही हैं। गुणवत्ता तथा अन्य आरोपों की पुष्टि के बाद ब्लैकलिस्ट की गई एक दर्जन से ज्यादा दवाइयां सरकारी अस्पतालों में भेजी जा रही हैं। अहम है कि इन दवाओं की आपूर्ति राज्य के प्रमुख मेडिकल कालेज व अस्पतालों में भी हो रही है। प्रयोगशाला में मिट्टी साबित हुई दवाइयों के आधार पर संबंधित दवा कंपनियों को वर्ष 2018 में अगले तीन सालों के लिए प्रतिबंधित किया गया है। इसके अलावा गुजरात सरकार द्वारा ब्लैकलिस्टि अमृतसर की दवा कंपनी की आपूर्ति भी हिमाचल में हो रही है। इनमें अधिकतर दवाइयां एंटीबायोटिक हैं और एंटीबायोटिक इंजेक्शन भी शामिल हैं।  पुख्ता सूचना के अनुसार ब्लैकलिस्टिड इन कंपनियों की हिमाचल में सप्लाई पर आईजीएमसी के चिकित्सकों ने आपत्ति भी दर्ज की है। बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग ने इन दवा कंपनियों को हिमाचल में बिक्री के दरवाजे खोल रखे हैं। इस कारण हिमाचल के सरकारी अस्पतालों में भेजी जा रही दवाइयों की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। बेशक ये कंपनियां हिमाचल सरकार ने ब्लैकलिस्ट नहीं की है, बावजूद  इसके पड़ोसी राज्य में खदेड़ी कंपनियों की दवाएं हिमाचल के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर सकती हैं। यही कारण है कि चिकित्सकों ने भी इन दवा कंपनियों की आपूर्ति पर सवाल उठाते हुए स्वास्थ्य विभाग को हस्तक्षेप की गुहार लगाई है।

ये हैं प्रतिबंधित कंपनियां

इंडियन ऑपटिक्स एंड साइंटिफिक वर्क्स

याका फार्मास्यूटिकल्स, बुलंद शहर

आर्थो फार्मास्यूटिकल्स, नई दिल्ली

कासेल हेल्थ प्रोडक्ट्स अहमदाबाद

 मैसर्ज जैक्सन, अमृतसर

पड़ोसी राज्य में बैन दवाइयां

ग्लिमप्राइड टैब 2 एमजी    5 फरवरी, 2018

इंजेक्शन सिफोप्रेजोन 1 जीएम  ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन आईपी 15 मार्च, 2018

5 आईयू/एमएल : एमएल एएमपी  डिसपोजेबल सीरिंज विद नीडल 15 मार्च, 2018

स्टेरिल 10सीसी, 20 गॉज 15 मार्च, 2018       

हियोसाइन ब्यूटाइल ब्रोमाईड  इंजेक्शन आईपी 20 एमजी/  3 मई, 2018

एमएल 1 एमपी आईएफए सीरप  3 मई, 2018