Monday, August 19, 2019 03:08 PM

प्रदेश को समर्पित आईआईटी मंडी

बीरेंद्र वर्मा

लेखक, ठियोग से हैं

आईआईटी के पूर्व छात्र विजय चौहान ने प्रदेश के अनेक स्थानों पर उपलब्ध कम तापमान के गर्म पानी से संचालित कोल्ड स्टोरेज का प्रारूप तैयार किया था, जिस पर तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने एक्शन प्लान ड्राफ्ट करवाया था। इस पर वर्तमान सरकार कितना अमल करती है, सरकार से अपेक्षित रहेगा, क्योंकि यह किसानों और बागबानों की आय दोगुनी करने में योगदान दे सकता है...

देश की आजादी के उपरांत पंडित नेहरू ने खड़गपुर में जब पहली आईआईटी की नींव रखी थी, तब किसी ने यह परिकल्पना नहीं की होगी कि भविष्य में इस संस्थान का महत्त्व और उपयोगिता इतनी अधिक हो जाएगी कि 70 वर्ष के छोटे से समयकाल में देश में 23 आईआईटी की शृंखला स्थापित हो जाएगी। आज विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी की अगवाई करने वाले यह संस्थान विश्वभर में भारतीय शिक्षा के द्योतक हैं। यह कहना अतिशयोक्ति न होगा कि अपनी उपलब्धियों से आईआईटी समूचे विश्व पर सकारात्मक प्रभाव डाल रहे हैं। इस संस्थान ने विश्व को अनेक उद्यमी, वैज्ञानिक, इंजीनियर, विचारक, स्कॉलर्स तथा देश को कई काबिल राजनेता, प्रशासनिक अधिकारी और कलाकार दिए हैं। अपने क्षेत्र में विश्वस्तरीय आयाम स्थापित करने के बाद अब विश्व के महानतम शिक्षण संस्थानों, जैसे ऑक्स्फोर्ड, स्टनफोर्ड हावर्ड और एमआईटी की भांति इन संस्थानों को  साहित्य, कला और मेडीसिन सरीखे कोर्स के लिए तैयार किया जा रहा है, ताकि आईआईटी संपूर्ण मानवता की बेहतरी के लिए एक उत्कृष्ट केंद्र बन सकें।

वर्ष 2010 में 7 जनक आईआईटी के मार्गदर्शन में 16 नए आईआईटी बनाने का दूरदर्शी ध्येय धरातल पर उतरा। इसी कड़ी में आईआईटी रुड़की के मार्गदर्शन में प्रदेश के मंडी में इस संस्थान ने अपना सफर शुरू किया। मंडी के वल्लभपंत महाविद्यालय में इसकी आरंभिक कक्षाएं चलाई गई थीं। वर्तमान में कमांद में यह संस्थान अब अपने पैरों पर खड़ा हो चुका है। प्रदेश के लिए यह गर्व का विषय है कि एक छोटा प्रदेश होने के बावजूद  शिक्षा के क्षेत्र में आग्रणी होने के चलते प्रदेश को यह प्रतिष्ठित संस्थान मिला है। अपने समकालीन आईआईटी की तुलना में यह संस्थान अपेक्षा से बेहतर ग्रोथ कर रहा है। अपनी स्थापना के इतने कम समय में भी इसका प्लेसमेंट रिकार्ड और शोध कार्य काबिलेतारीफ है। प्रदेश के संदर्भ में आईआईटी के योगदान की शुरुआत करें, तो सर्वप्रथम कमांद तथा आसपास के क्षेत्र में आईआईटी अनेक प्रकार की  ग्रामीण विकास और सामाजिक उत्थान की गतिविधियां चला रहा है। महिला सशक्तिकरण के कई प्रोजेक्ट्स आईआईटी चला रहा है, इससे यहां की महिलाएं स्वावलंबी बन रही हैं और अपनी काबिलीयत को पहचान रही हैं। संस्थान के स्वयंसेवी ग्रामीण परिवेश के छात्रों को शिक्षा के क्षेत्र में एक्सपोजर प्रदान कर रहे हैं, ताकि शहरों की प्रतियोगी कोचिंग से वंचित छात्र अपने आप को भविष्य के लिए तैयार कर सकें। यदा-कदा आईआईटी के स्वयंसेवी शिक्षक और प्रशिक्षु मंडी तथा कुल्लू के पर्यटक स्थलों और ट्रैक रूट्स पर स्वच्छ भारत मुहिम के तहत कूड़ा-कचरा हटाते और सफाई का संदेश देते दिखाई देते हैं। प्रदेश के अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों को भी इस दिशा में अवश्य प्रयासरत रहना चाहिए। आईआईटी नियमित तौर पर भिन्न-भिन्न विषयों पर वर्कशॉप, सेमिनार और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करता रहता है, जिसमें देश-विदेश के संस्थानों के अलावा प्रदेश के शिक्षण संस्थान, जैसे इंजीनियरिंग कालेज, मेडिकल कालेज आदि भाग लेते हैं। इससे इनके एक्सपोजर और आत्मविश्वास में भी वृद्धि होती है। वर्ष 2017 में कटरोपी त्रासदी के दौरान जब पठानकोट-मंडी राष्ट्रीय उच्च मार्ग पर भू-स्खलन की स्थिति बनी हुई थी, तब संस्थान की टीम ने कम लागत का भू-स्खलन यंत्र या चेतावनी यंत्र विकसित किया था और वहां स्थापित किया था, जो भू-स्खलन होने से पहले ही आगाह कर देता है। प्रदेश की पहाड़ी और सर्पिली सड़कों पर जान-माल की हानि से बचाने में इसकी उपयोगिता को देखते हुए हाल ही में नाहन-शिमला मार्ग पर 6 संवेदनशील स्पॉट्स पर इन यंत्रों को लगाया गया है। प्रदेश के वनों में आग लगने के कारण प्रतिवर्ष पर्यावरण और वन्य जैव विविधता को नुकसान होता है। इसका एक मुख्य कारण चीड़ के वृक्ष से निकलने वाली पाइन नीडल (चालरू) है, जो कि अत्यधिक ज्वलनशील होता है। आईआईटी मंडी ने चालरू से ईंधन विकसित किया है, जिसे घरेलू तथा औद्योगिक प्रयोग में लाया जा सकता है। अब प्रदेश सरकार पाई नीडल आधारित संयंत्रों की एक इकाई के लिए 50 प्रतिशत सबसिडी दे रही है। पाइन नीडल एकत्रित करने को मनरेगा के तहत लाया जा रहा है। यकीनन इससे रोजगार सृजन होगा।

मंडी और सुंदरनगर में कुछ अरसे से पानी में जैविक दूषक की मात्रा बढ़ने लगी है। ऐसे में संस्थान ने एक फिल्टर इजाद किया, जो पेयजल से आइरन और अन्य दूषक दूर करता है। प्रदेश के जंगलों में व्याप्त लैंटाना से छुटकारा पाने के प्रयास में आईआईटी इससे खाद, लकड़ी के सजावटी सामान और फर्नीचर तैयार कर रहा है। प्रदेश के किसानों और बागबानों को उनकी उपज के उचित दाम दिलाने में कोल्ड स्टोरेज उपयोगी साबित हो रहे हैं। रोहड़ू के संबंधित और आईआईटी के पूर्व छात्र विजय चौहान ने प्रदेश के अनेक स्थानों पर उपलब्ध कम तापमान के गर्म पानी से संचालित कोल्ड स्टोरेज का प्रारूप तैयार किया था, जिस पर तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने एक्शन प्लान ड्राफ्ट करवाया था। इस पर वर्तमान सरकार कितना अमल करती है, सरकार से अपेक्षित रहेगा, क्योंकि किसानों और बागबानों की आय दोगुनी करने में यह अहम योगदान अदा कर सकता है।

निश्चित ही प्रदेश के पहाड़ों में अर्बन मैनेजमेंट की विशेषज्ञता की कमी है। आईआईटी से यह अपेक्षा रहेगी कि अर्बन मैनेजमेंट के क्षेत्र में वह प्रदेश का मार्ग प्रशस्त करे, ताकि पहाड़ों को कंक्रीट के जंगल में तब्दील होने से बचाया जा सके। साथ ही प्रदेश में संभावित जल विद्युत और हाई-वे परियोजनाओं में पहाड़ों की विशेष संरचना को ध्यान में रखते हुए नई तथा विकसित तकनीकों का इजात करे। इसके अतिरिक्त आईआईटी प्रदेश सरकार, एचपीयू, सीयू, कृषि तथा बागबानी विश्वविद्यालय के साथ कोलेबोरेट कर किसानों और बागबानों की उपज बढ़ाने संबंधित प्रोजेक्ट्स पर शोध करे।