Wednesday, November 21, 2018 07:57 AM

प्रदेश में खुल सकता है गुरुकुल

राज्यपाल का प्रस्ताव, लोग-सरकार चाहें तो मदद के लिए तैयार 

धर्मशाला— हरियाणा में गुरुकुल से शिक्षा व संस्कारों का बड़ा केंद्र चलाने वाले राज्यपाल आचार्य देवव्रत हिमाचल में भी गुरुकुल खोलने को तैयार हैं। हिमाचल की सरकार व लोग चाहें तो राज्यपाल इस दिशा में सहयोग के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। देवभूमि में तो पहले से ही गुरुकुल प्रथा रही है। आज भी धौलाधार की इन पहाडिय़ों में देश-विदेश की नामी हस्तियां अध्यात्मिक शांति के लिए पहुंचती हैं। युवा नशे की तरफ जा रहे हैं, कान्वेंट स्कूलों और अंग्रेजी का प्रचलन बढ़ रहा है, लेकिन संस्कृति  व संस्कृत को भुलाया जा रहा है। इसी कारण युवा पीढ़ी पाश्चात्य सभ्यता को अपनाते हुए नशे की गर्त में जा रही है। हिमाचल का दुर्भाग्य यह है कि उच्च  व संस्कारयुक्त शिक्षा की ओर यहां की सरकारों ने कभी विशेष योजना के तहत काम ही नहीं किया, जिसके चलते युवा पीढ़ी पढ़ाई के बजाय नशे की ओर मुड़ रही है। राज्यपाल दस दिनों तक धर्मशाला  में अध्यात्मिक शांति के लिए मौन रहे। अच्छे अनुभव व तरोताजगी के बाद जब राज्यपाल से हिमाचल में गुरुकुल बारे पूछा तो उन्होंने तपाक से कहा कि क्यों नहीं देवभूमि में तो पहले ही गरुकुल प्रथा रही है। हिमाचल के लोग चाहें तो यहां अब भी गुरुकुल खुल सकता है।   ऐसे में संस्कार व संस्कृति युक्त शिक्षा देने के लिए गुरुकुल की स्थापना भी हिमाचल में की जाती है तो इसका प्रदेश के युवा ही नहीं किसान परिवार भी लाभान्वित होंगे। ऐसे में राज्यपाल  ने इस पहल के लिए गेंद प्रदेश सरकार और यहां की जनता के पाले में डाल दी है। अब यह तय सरकार को करना होगा कि नशे और पाश्चात्य सभ्यता की ओर भागती युवा पीढ़ी को रोकने के लिए नशे के कारोबारियों का ही पीछ़ा करना है या फिर ऐसे उच्च व संस्कार युक्त शैक्षणिक संस्थान राज्य भर में शुरू कर एक तीर से कई निशाने साधने हैं।