Wednesday, November 21, 2018 06:57 AM

प्रदेश में तीन साल में दिखेगी प्राकृतिक खेती

सरकार ने तय किया लक्ष्य, पहले चरण में हर पंचायत में एक किसान को देगी प्रशिक्षण

धर्मशाला— प्रदेश भर में जीरो बजट प्राकृतिक खेती को जमीनी स्तर पर शुरू करने के लिए सरकार ने खाका तैयार कर लिया है। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने तीन साल का लक्ष्य निर्धारित किया है। अब सरकार ने पंचायत स्तर से अभियान छेडऩे का निर्णय लिया है। प्राकृतिक खेती को अधिक से अधिक लोगों को शुरू करवाने से पहले हर पंचायत के एक किसान को प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके बाद प्रशिक्षित किसान को पंचायत में मॉडल के तौर पर रखा जाएगा। सर्वप्रथम पंचायत के प्रशिक्षित किसान से ही खेती की शुरुआत करवाई जाएगी, जिसके बाद दूसरे वर्ष मॉडल किसान का उदाहरण देकर सरकार हर पंचायत से 15 किसानों को खेती करने के लिए प्रेरित करेगी। तीसरे वर्ष पंचायत के 150 किसानों से खेती की पहल करवाई जाएगी। वर्तमान समय में प्रदेश में नौ लाख 61 हजार के करीब किसान हैं, जिसमें से सरकार ने अगामी तीन वर्ष में पांच लाख के करीब किसानों को शून्य लागत प्राकृतिक खेती से जोडऩे का लक्ष्य निर्धारित किया है। प्रदेश में 3226 पंचायतों के एक-एक किसान को प्रशिक्षित कर इसी वर्ष से खेती शुरू करवाई जाएगी, जिसके बाद दूसरे वर्ष पचास हजार किसानों को जीरो बजट खेती से जोड़ा जाएगा। जीरो बजट प्राकृतिक खेती के निदेशक राकेश कंवर ने बताया कि सरकार ने तीन साल में प्रदेश के पांच लाख किसानों से जीरो लागत प्राकृतिक खेती करवाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। सरकार हरेक पंचायत के एक किसान को प्रशिक्षण देकर खेती शुरू करवाएगी। प्रदेश में नौ लाख 61 हजार किसान हैं।

रासायनिक खेती के बराबर पैदावार

प्राकृतिक कृषि विशेषज्ञों की मानें, तो रासायनिक खेती के बाद जैविक खेती शुरू करने से पहले तीन साल तक पैदावार में कमी आती है, लेकिन जीरो लागत प्राकृतिक खेती से रासायनिक खेती के बराबर पैदावार होती है। प्राकृतिक खेती में हाईब्रिड बीज, यूरिया खाद और महंगे कीटनाशकों का बिलकुल भी प्रयोग नहीं किया जाता है।