प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जनता से संवाद अद्भुत

कर्म सिंह ठाकुर

लेखक सुंदरनगर से हैं

विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के सबसे शक्तिशाली नेता भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्ष 2014 से लेकर वर्तमान समय तक भारत की 131 करोड़ जनसंख्या के साथ विभिन्न तरह के प्लेटफार्म के माध्यम से सीधा संवाद करते आ रहे हैं। अपनी वक्तव्य शैली से ही मोदी जी ने वर्ष 2014 तथा 2019 के लोकसभा चुनावों में प्रचंड बहुमत प्राप्त करके सत्ता हासिल की थी। आज संपूर्ण विश्व कोरोना वायरस की चपेट में आ चुका है। बड़े-बड़े शक्तिशाली देश भी औंधे मुंह पड़े हैं। वहीं भारत के जननायक नरेंद्र मोदी निरंतर जनता से इस मुश्किल घड़ी में भी देश की एकता, अखंडता, आत्मनिर्भरता के मार्ग को प्रशस्त करने के रास्ते को खोजने का भरसक प्रयास कर रहे हैं। 12 मई 2020 को रात्रि 8.00 बजे भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनता के साथ सीधे रूबरू हुए जिसमें देश की जनता को कोरोना वायरस से लड़ने के अनेक ऐतिहासिक तथ्यों के साथ 20 लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज की घोषणा का ऐलान किया। अपने अभिभाषण की शुरुआत में उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के कारण जिन लोगों ने अपनों को खोया है, उनके प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं। पूरी दुनिया इस संकट से जूझ रही है, लेकिन हमें थकना नहीं है, हारना नहीं है। कितनी बड़ी बात को इतनी सरलता से कह गए। वह कठिन से कठिन शब्दों का इस तरह से तालमेल स्थापित करते हैं कि सुनने वालों के जीवन में नूतन संचार का प्रवाह स्वतः हो जाता है। कोरोना वायरस में मानव जीवन चारदीवारी में सिमट कर रह गया है, देशवासियों के जहन में निराशा का उपजना स्वभाविक है, लेकिन ऐसे में भी प्रधानमंत्री मोदी आशावादी विचारधारा के साथ नवीन साधनों की खोज का मार्ग जनमानस के लिए तैयार करते दिख रहे हैं। आज हम एक अहम मोड़ पर खड़े हैं। यह वैश्विक आपदा भारत के लिए ये संकेत और संदेश लेकर आई है कि अब हमें आत्मनिर्भरता के मार्ग को  प्रशस्त करना ही होगा। कोरोना वायरस ने भारतीयों के सामने नवीन चुनौतियां पैदा की हैं, वहीं नए अवसरों के मार्ग को खोजने के लिए भी मजबूर किया है। भारत जब आत्मनिर्भरता की बात करता है तो आत्मकेंद्रित व्यवस्था की वकालत नहीं करता। भारत की आत्मनिर्भरता में संसार के सुख, सहयोग और शांति की चिंता होती है। हम ठान लें तो कोई राह मुश्किल नहीं है। आज तो चाह भी है, राह भी है। आत्मनिर्भरता के लिए पांच पिलर हैंः इकोनॉमी, इंफ्रास्ट्रक्चर, सिस्टम, डेमोग्राफी तथा डिमांड। इन्हें सुदृढ़ करने के लिए बड़ा पैकेज दिया गया है।

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