Friday, December 13, 2019 07:08 PM

प्राणी विज्ञान में करियर 

मनुष्य आरंभ से ही जिज्ञासु प्रवृत्ति का रहा है और अपने आसपास की हर वस्तु के बारे में जानने के लिए वह आतुर रहता है। इसी जिज्ञासा ने जन्म दिया प्राणी विज्ञान को। आज यह विज्ञान व्यापक आधार ले चुका है। जीव-जंतु प्रेमियों को निश्चय ही जीव-जंतुओं के साथ समय बिताना अच्छा लगता है।  इसी प्रेम को करियर में भी बदला जा सकता है। प्राणी विज्ञान  जीव विज्ञान की ही एक शाखा है, जिसमें जीव-जंतुओं का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाता है...

मनुष्य अकेला

इस पृथ्वी पर जीवित नहीं रह सकता। उसके पृथ्वी पर अस्तित्व के लिए जीव-जंतुओं, वनस्पति आदि का होना आवश्यक है। अब जब जीव-जंतु और वनस्पति अस्तित्व में आते हैं, तो उनका अध्ययन भी जरूरी हो जाता है। मनुष्य आरंभ से ही जिज्ञासु प्रवृत्ति का रहा है और अपने आसपास की हर वस्तु के बारे में जानने के लिए वह आतुर रहता है। इसी जिज्ञासा ने जन्म दिया प्राणी विज्ञान को। आज यह विज्ञान व्यापक आधार ले चुका है। जीव-जंतु प्रेमियों को निश्चय ही जीव-जंतुओं के साथ समय बिताना अच्छा लगता है।  इसी प्रेम को करियर में भी बदला जा सकता है। प्राणी विज्ञान  जीव विज्ञान की ही एक शाखा है, जिसमें जीव-जंतुओं का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाता है। इसमें प्रोटोजोआ, मछली, सरीसृप, पक्षियों के साथ-साथ स्तनपायी जीवों के बारे में अध्ययन किया जाता है। इसमें हम न सिर्फ  जीव-जंतुओं की शारीरिक रचना और उनसे संबंधित बीमारियों के बारे में जानते हैं बल्कि मौजूदा जीव-जंतुओं के व्यवहार, उनके आवास, उनकी विशेषताओं, पोषण के माध्यमों, जेनेटिक्स व जीवों की विभिन्न जातियों के विकास के साथ-साथ विलुप्त हो चुके जीव-जंतुओं के बारे में भी जानकारी हासिल करते हैं।

व्यापक क्षेत्र

अब आपके मन में सवाल उठ रहे होंगे कि प्राणी विज्ञान में किस-किस प्रकार के जीवों का अध्ययन किया जाता है। जवाब है इस पाठ्यक्रम के तहत आप लगभग सभी जीवों, जिनमें समुद्री जल जीवन,चिडि़याघर के जीव-जंतु, वन्य जीवों, यहां तक कि घरेलू पशु-पक्षियों के जीव विज्ञान एवं जेनेटिक्स का अध्ययन करते हैं।

योग्यता

प्राणी विज्ञान में स्नातक में प्रवेश के लिए जरूरी है कि छात्र 12वीं कक्षा विज्ञान विषयों, जीव विज्ञान, भौतिकी, रसायन विज्ञान के साथ-साथ गणित से उत्तीर्ण करें। स्नातकोत्तर में प्रवेश के लिए छात्रों का स्नातक स्तर पर 50 प्रतिशत के साथ जूलॉजी विषय उत्तीर्ण करना जरूरी है।

ऋण एवं स्कॉलरशिप

स्नातक स्तर पर जहां तक ऋण की बात है तो अभी ऋण के लिए कोई खास सुविधा नहीं है, जबकि विभिन्न कालेज व विश्वविद्यालय अपने छात्रों के लिए स्कॉलरशिप जरूर मुहैया कराते हैं। स्नातक से आगे की पढ़ाई के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग या यूजीसी के साथ-साथ विभिन्न अनुसंधानों में जुटे विभागों या संस्थानों की ओर से भी स्कॉलरशिप की सुविधा प्राप्त की जा सकती है। यह पाठ्यक्रम किसी अन्य प्रोफेशनल कोर्स की तरह नहीं है, जहां स्नातक की डिग्री के साथ ही आप काम के लिए तैयार हो जाते हैं। आमतौर पर माना जाता है कि कम से कम स्नातकोत्तर की डिग्री के साथ जूलॉजी की किसी खास शाखा में विशेषज्ञता हासिल करने के बाद आप इस क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे सकते हैं।

लक्ष्य पहले ही निर्धारित करें

अगर आप अनुसंधान और शोध के क्षेत्र में आना चाहते हैं तो जूलॉजी में बीएससी के बाद आप एमएससी और फिर पीएचडी करें। लेकिन छात्रों के लिए 12वीं के स्तर पर ही यह निर्णय लेना जरूरी है कि वे अनुसंधान व शोध के क्षेत्र में आगे जाना चाहते हैं या शिक्षा में।

क्या करता है प्राणी वैज्ञानिक

प्राणी विज्ञान चूंकि जीव विज्ञान की ही एक शाखा है, जो जीव-जंतुओं की दुनिया से संबंधित है इसलिए यहां पक्षियों के अध्ययन में विशेषज्ञता हासिल करने वाले को पक्षी वैज्ञानिक, मछलियों का अध्ययन करने वाले को मत्स्य वैज्ञानिक, जलथल चारी और सरीसृपों का अध्ययन करने वाले को सरीसृप वैज्ञानिक और स्तनपायी जानवरों का अध्ययन करने वालों को स्तनपायी वैज्ञानिक कहा जाता है। जूलॉॅजिस्ट की जिम्मेदारी जानवरों, पक्षियों, कीड़े-मकौड़ों, मछलियों और कृमियों के विभिन्न लक्षणों और आकृतियों पर रिपोर्ट तैयार करना और विभिन्न जगहों पर उन्हें संभालना भी है। एक जूलॉजिस्ट अपना काम जंगलों आदि के साथ-साथ प्रयोगशालाओं में भी करता है, जहां वे उच्च तकनीक की मदद से अपने जमा किए आंकड़ों को रिपोर्ट की शक्ल देता है और एक सूचना के डेटाबैंक को बनाता है। जूलॉजिस्ट सिर्फ  जीवित ही नहीं, बल्कि विलुप्त हो चुकी प्रजातियों पर भी काम करते हैं।

वेतनमान

अगर आप शिक्षा जगत से जुड़ते हैं तो सरकारी और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की ओर से निर्धारित वेतन पर नौकरी करेंगे। आमतौर पर एक बी एड अध्यापक का वेतन 32 से 35 हजार रुपए प्रति माह होता है। एक फ्रेशर के रूप में अनुसंधान और शोध क्षेत्र में प्रवेश करेंगे तो आप प्रति माह 20 से 25 हजार रुपए कमा सकते हैं।

संभावनाएं

जूलॉजी में कम से कम स्नातकोत्तर की डिग्री लेने के बाद छात्रों के सामने विभिन्न विकल्प हैं। सबसे पहला विकल्प है कि वे बीएड करने के बाद आसानी से किसी भी स्कूल में अध्यापक पद के लिए योग्य हो जाते हैं। इस क्षेत्र में विविधता की वजह से छात्रों के सामने काफी संभावनाएं मौजूद हैं। वे किसी जूलॉजिकल या बोटेनिकल पार्क, वन्य जीवन सेवाओ, संरक्षण से जुड़ी संस्थाओं, राष्ट्रीय उद्यानों, प्राकृतिक संरक्षण संस्थाओं, विश्वविद्यालयों, फोरेंसिक विशेषज्ञों, प्रयोगशालाओं, मत्स्य पालन या जल जगत, अनुसंधान एवं शोध संस्थानों और फार्मा कंपनियों के साथ जुड़ सकते हैं। इसके अलावा कई टीवी चैनल्स मसलन नेशनल ज्योग्राफिक, एनिमल प्लेनेट और डिस्कवरी चैनल आदि को अकसर शोध और डॉक्यूमेंटरी फिल्मों के लिए जूलॉजिस्ट की जरूरत रहती है।

फायदे और भी

* प्रकृति के करीब रहने व उसे और करीब से जानने का मौका मिलता है।

* इस दिशा में ज्ञान हासिल करने की कोई सीमा नहीं है। आप काफी आगे तक जानकारी के लिए देश-विदेश में शिक्षा हासिल कर सकते हैं।

विस्तार लेते नए क्षेत्र

आजकल जूलॉजी के छात्रों में वाइल्ड लाइफ  से संबंधित क्रिएटिव वर्क और चैनलों पर काम करने के प्रति काफी रुझान है, लेकिन यह आसान काम नहीं है। ऐसे काम की डिमांड अभी भी सीमित है। हालांकि इन दिनों निजी स्तर पर चलाए जा रहे फिश फार्म्स काफी देखने में आ रहे हैं। जूलॉजी के छात्रों के लिए यह एक बढि़या व नया करियर विकल्प हो सकता है। जूलॉजी के छात्रों के लिए ईको टूरिज्म, ह्यूमन जेनेटिक्स और वैटरिनरी साइंसेज के क्षेत्र खुल रहे हैं। जूलॉजी में डिग्री के बाद वैटरिनरी साइंसेज या एनिमल साइंस से संबंधित कोर्सेज किए जा सकते हैं। कम्युनिकेशन जूलॉजिस्ट के तौर पर इलेक्ट्रॉनिक संवाद माध्यमों का उपयोग करते हुए आप जूलॉजी की जानकारी के प्रसार-विस्तार के क्षेत्र में सक्रिय हो सकते हैं। ट्रैवल इंडस्ट्री में प्लानिंग और मैनेजमेंट लेवल पर अहम भूमिका निभा सकते हैं। समुद्री जीवों और पशुओं की विलुप्त होती प्रजातियों के संरक्षण की दिशा में अपना करियर बनाने की सोच सकते हैं। यह वक्त की जरूरत है कि जूलॉजिस्ट को ज्योग्राफिक इन्फोर्मेशन सिस्टम और पशुओं की ट्रैकिंग से संबंधित तकनीकों को मिला कर काम करना आता हो। एक बार इस क्षेत्र में पारंगत होने के बाद आपके पास संभावनाओं के कई विकल्प तैयार हो जाते हैं।

पदार्पण कैसे

प्राणी विज्ञान के क्षेत्र में आने के लिए सबसे पहले आपको स्नातक स्तर पर जूलॉजी की डिग्री लेनी होगी। आमतौर पर यह विषय देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में विज्ञान के विभिन्न विषयों की तरह ही तीन वर्षीय डिग्री पाठ्यक्रम के तहत पढ़ाया जाता है।

कोर्स

* बीएससी जूलॉजी (प्राणी विज्ञान)

* बीएससी जूलॉजी  एंड इंडस्ट्रियल माइक्रोबायोलॉजी (डबल कोर)

* बीएससी बायो टेक्नोलॉजी जूलॉजी एंड केमिस्ट्री

* बीएससी बॉटनी, जूलॉजी  एंड केमिस्ट्री

* एमएससी मरीन जूलॉजी

* एमएससी जूलॉजी विद स्पेशलाइजेशन इन मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी

* एमएससी जूलॉजी

*एमफिल जूलॉजी

* पीएचडी जूलॉजी

प्रमुख संस्थान

* हिमाचल प्रदेश विवि शिमला (हिप्र)

* राजकीय पोस्ट ग्रेजुएट कालेज धर्मशाला (हिप्र)

* कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर (हिप्र)

* गुरु नानकदेव यूनिवर्सिटी, अमृतसर (पंजाब)

*कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी, कुरुक्षेत्र (हरियाणा)

* बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी

* सेंट एल्बर्ट्स कालेज, महात्मा गांधी विश्वविद्यालय, कोच्चि

* पोस्ट ग्रेजुएट कालेज ऑफ  साइंस, ओसमानिया विश्वविद्यालय,  हैदराबाद

* जम्मू यूनिवर्सिटी, जम्मू