Friday, September 20, 2019 12:22 AM

प्रैक्टिकल में फेल करना दुर्भाग्यपूर्ण

-डा. राजन मल्होत्रा, पालमपुर

स्वः हस्त चलित दूरभाष (मोबाइल) पर एक समाचार देखकर बड़ा आश्चर्य हुआ कि राजकीय आयुर्वेद कालेज के पांच प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होने वाले छात्रों को प्रयोगशाला कार्य (प्रैक्टिकल) पेपर में इसलिए अनुत्तीर्ण कर दिया गया, ताकि उनका एक वर्ष नष्ट हो जाए और वह अपना भविष्य न सवार सकें। पर शायद वह प्राध्यापक यह भूल गया होगा कि जिन छात्रों  को वह अणुत्तीर्ण कर रहा है वे उसी के बच्चे हैं। कल को उसके बच्चे भी होंगे। और वह भी किसी आयुर्वेदिक मेडिकल कालेज व इंजीनियरिंग कालेज में दाखिला लेंगे और उनके बच्चों के साथ भी ऐसा गुजरे तो, उनके दिल पर क्या गुजरेगी? अब यह मामला हि.प्र. उच्चतम न्यायालय में है। अब माननीय न्यायाधीश क्या फैसला देंगे? यह आने वाला समय बतलाएगा पर बच्चों के मामले में ऐसी दुर्भावना नहीं होनी चाहिए। बच्चे तो आखिर बच्चे हैं। क्योंकि जैसे मुवकिलों के उच्चतम न्यायालय के अधिवक्ता बता रहे हैं कि वह महाविद्यालय के प्रथम श्रेणी के क्रीम छात्र हैं। ऐसे में उनका प्रैक्टिकल में अनुत्तीर्ण होना दुर्भाग्यपूर्ण है।