Monday, July 13, 2020 03:35 PM

पढ़ाई के लिए सबसे बेस्ट शिमला

छात्र प्रदेश के हों या बाहरी राज्यों के! हिमाचल में कोई पढ़ाई करना चाहता है, तो सबसे पहली च्वाइस है शिमला। हिमाचल के साथ-साथ देश-विदेश के लाखों छात्रों का भविष्य संवारने में अहम योगदान दे रही राजधानी आज एजुकेशन हब बनकर उभरी है। ब्रिटिशकाल से चल रहे इन संस्थानों ने ऐसी क्रांति लाई कि शिक्षा के साथ-साथ खुले रोजगार के दरवाजों से प्रदेश ने तरक्की की राह पकड़ ली। पहाड़ों की रानी में क्या है शिक्षा की कहानी, बता रही हैं हमारी संवाददाता

— प्रतिमा चौहान, मोनिका बंसल

राजधानी शिमला... स्मार्ट सिटी... हिल्सक्वीन... पहाड़ों की रानी बेहतर शिक्षा के लिए भी जानी जाती है। शिमला शहर में हर तीन किलोमीटर की दूरी पर निजी व सरकारी स्कूल हैं। शिक्षा का हब माना जाने वाला शिमला जिला शिक्षा के क्षेत्र में हर साल बेहतर रिजल्ट शिक्षा विभाग को देता है। जिला में 124 प्राइवेट प्राइमरी स्कूल, 290 मिडल स्कूल, वहीं 150 हाई स्कूल हैं। वहीं, अगर केवल स्मार्ट सिटी की बात करें, तो यहां 87 प्राइवेट स्कूल हैं। इसके अलावा अगर सरकारी स्कूलों की बात करें, तो शिमला जिला में 1602 प्राइमरी स्कूल, 326 मिडल स्कूल, एक हजार हाई स्कूल हैं। शिमला सिटी की बात की जाए, तो अकेले लगभग 400 सरकारी स्कूल शिमला शहर में हैं। इस तरह शिमला जिला में शिक्षा के क्षेत्र में कई विकास कार्य हुए हैं। इसके अलावा शहर में खोले गए निजी स्कूल ज्यादातर वर्ष 2000 के बाद खुले हैं। अहम यह है कि यहां करीब चार स्कूल कॉन्वेंट भी हैं। स्मार्ट सिटी के कॉन्वेंट स्कूलों में ऑकलैंड स्कूल, एडवर्ड, ताराहाल, सेक्रेड हार्ट, बिशप कॉटन स्कूल शामिल हैं। शहर में ये वे स्कूल हैं, जहां बड़े-बड़े नेताओं के  बच्चे शिक्षा लेने के लिए आते हैं। इन स्कूलों से निकले छात्र आज नेशनल व इंटरनेशनल कंपनी में भी काम कर रहे हैं। शिमला में प्राइवेट व कॉन्वेंट स्कूल में बच्चों को पढ़ाने का ट्रेंड इतना है कि हर अधिकारी व नेता अपने नौनिहालों को पुराने से पुराने कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ाना चाह रहे हैं। उपनगरों संजौली, मॉल, लक्कड़ बाजार, लोअर बाजार, बीसीएस, पंथाघाटी जैसे क्षेत्रों में तो सबसे ज्यादा प्राइवेट स्कूल हैं।

सबसे ज्यादा चर्चा में ये स्कूल

स्मार्टसिटी शिमला में करीब 87 निजी स्कूल हैं। इनमें दर्जनों ऐसे स्कूल हैं, जिन्हें पांच से छह साल पहले ही शिक्षा विभाग ने मान्यता प्रदान की है। फिलहाल हम ऐसे स्कूलों के बारे में बताते हैं, जो स्कूल अंग्रेजों के समय में खुले हैं, वहीं इन स्कूलों में हर अभिभावक अपने नौनिहालों को पढ़ाना चाहते हैं। इन स्कूलों में सेंट एडवर्ड स्कूल, ताराहाल, ऑकलैंड, सेके्रड हार्ट, सेंट थॉमस, डीएवी स्कूल के नाम शामिल हैं। कहा जाता है कि इन स्कूलों में भले ही भारी-भरकम फीस होगी, लेकिन शिक्षा के क्षेत्र में यहां छात्रों को सुविधाएं दी जाती हैं।

2002 के बाद एजुकेशन हब बनी राजधानी

वर्ष 1820 के दौरान शिमला शहर में गिने-चुने स्कूल ही थे, जिसमें एडवर्ड व ताराहाल स्कूल शामिल हैं, लेकिन अब धीरे-धीरे राजधानी शिमला में स्कूल खुलने की गति इतनी बढ़ी कि यहां अब दर्जनों स्कूल हर मोड़ पर खुल गए हैं। खास बात यह है कि राजधानी शिक्षा का हब वर्ष 2002 के बाद बना है। मौजूदा समय में राजधानी के निजी स्कूलों में ही 50 हजार से ज्यादा छात्र पढ़ रहे हैं। निजी स्कूलों में एनरोलमेंट बढ़ाने को लेकर भी एक जंग निजी स्कूल प्रबंधन के बीच चली हुई है। सभी स्कूल अपने-अपने छात्र संख्या दोगुनी चाहते हैं। यही वजह है कि हर साल दाखिले के दौरान निजी स्कूल कई तरह के प्रलोभन भी पेरेंट्स को देते हैं।

शिमला शहर में 87 निजी स्कूल, ज़बरदस्त हैं कइयों के भवन

शिमला जिला के 804 निजी स्कूलों में करीब एक लाख छात्र पढ़ते हैं। इन छात्रों की ज्यादा संख्या शिमला शहर के 87 निजी स्कूलों में हैं। दरअसल प्रदेश की राजधानी होने के साथ ही यहां अधिकतर सरकारी व प्राइवेट ऑफिस होने की वजह से अधिकारियों के बच्चे शहर के निजी स्कूलों में ही पढ़ते हैं। ऐसे में अधिकतर छात्रों की संख्या शिमला शहर में ही बताई जा रही है। राजधानी शिमला के कई निजी स्कूलों के भवन बहुत ही बड़े और आकर्षक हैं। शहर में ऑकलैंड स्कूल, सेंट एडवर्ड, ताराहाल, दयानंद पब्लिक स्कूल, सेंट थॉमस, बिशप कॉटन स्कूल, डीएवी स्कूल, सेक्रेड हार्ट स्कूल के नाम शामिल हैं।

नगर में 400 सरकारी विद्यालय, दो हजार शिक्षक दे रहे ज्ञान

शिमला जिला के सरकारी स्कूलों की बात करें, तो 1602 प्राइमरी स्कूल, 326 मिडल स्कूल, एक हजार हाई स्कूल हैं। शिमला सिटी की बात की जाए, तो अकेले लगभग 400 सरकारी स्कूल शिमला शहर में हैं। शिमला शहर के सरकारी स्कूलों में करीब दो हजार शिक्षक हैं। ये शिक्षक शहर के हर तीन से चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं। शिमला के सरकारी स्कूलों में ज्यादातर शिक्षिकाएं ही हैं। शिमला शहर के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कोई भी कमी नहीं है। वहीं, यहां छात्र अनुपात संख्या से ज्यादा शिक्षक कई स्कूलों में तैनात हैं। वहीं, शिमला के ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों की बात करें, तो यहां भी करीब 2700 तक शिक्षक सरकारी स्कूलों में बताए जा रहे हैं।

सरकारी स्कूलों में इंग्लिश सिखाते नहीं

शहरी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाना आज जरूरी हो गया है। समय के साथ-साथ अंग्रेजी भाषा का आना बहुत जरूरी है। सरकारी स्कू लों में पढऩे वाले छात्रों की इंग्लिश ज्यादा अच्छी नहीं होती। आज जिस तरह समाज में कंपीटीशन बढ़ गया है, उसे देखते हुए बच्चों को न केवल अंग्रेजी, बल्कि बच्चों का मानसिक विकास भी जरूरी है, लेकिन यह तभी संभव हो पाएगा, जब बच्चों को अच्छी और सही शिक्षा मिल पाएगी  

कृष्णा देवी, अभिभावक

शहर में स्मार्ट क्लासरूम-नई तकनीकें

शहरी स्कूलों की शिक्षा बच्चों को आने वाले समय, जो कि कंपीटीशन है, उसके लिए तैयार करती है, जबकि सरकारी में लापरवाही बरती जाती है। बच्चों को अच्छी शिक्षा मिलना बहुत जरूरी है। ऐसे में बच्चों को शहरी स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम सहित नई तकनीकों से भी अवगत करवाया जा रहा है। सरकारी स्कूलों में इस तरह की सुविधाएं नहीं मिल पाती

कु सुम शर्मा, अभिभावक

गांव में दूर-दूर होती है पाठशाला

गांव के अधिकतर स्कूल काफी दूर होते हं, जहां पहुंचने पर बच्चों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है, जबकि शहरी स्कूलों में शहर में जगह-जगह स्कूल बने हैं। ऐसे में बच्चों को स्कूल आने-जाने का जो समय है, बच जाता है। खासतौर पर दूरदराज के जो स्कूल हैं, वहां आज भी बच्चों को सरकारी स्कूलों में हर सुविधा नहीं मिल पाती      

सोनिया रानी, अभिभावक

अभिभावक भी दें बच्चों पर ध्यान

शहरी स्कूल अन्य स्कूलों से बेहतर शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। शहरी स्कू लों में बच्चों के  अभिभावकों को भी बच्चों की परफॉर्मेंस के बारे में पूछा जाता है, जबकि शहर से बाहर के स्कूलों में यह नहीं होता। बच्चों को जो क क्षा में पढ़ाया जाता है, उसकी जानकारी घर पर भी होती है, जबकि गांवों में ऐसा नहीं होता। बच्चों को जो कक्षा में पढ़ाया जाता है, कहीं न कहीं वह कक्षा तक ही सीमित रहता है। साथ ही बच्चों के अभिभावकों को भी चाहिए कि वे अपने बच्चे पर पूरा ध्यान दें     

शीतल देवी, अभिभावक

कॉन्फिडेंट होते हैं प्राइवेट स्कूल के होनहार

सरकारी स्कूलों में फीस न के बराबर होती है, जबकि प्राइवेट स्कूल की फीस बहुत अधिक होती है। वहीं, सरकारी स्कूल का इन्फ्रास्ट्रक्चर उतना अच्छा नहीं होता, जितना निजी स्कूल का होता है। शहरी स्कूलों के बच्चों में एक अलग आत्मविश्वास होता है, जो सरकारी स्कूलों के बच्चों में कम ही दिखता है। सरकारी स्कूलों में बच्चों को न केवल किताबी पढ़ाई करवाई जाए, बल्कि उन्हें प्रैक्टिकल एजुकेशन भी दी जाए

मीना देवी, अभिभावक

गवर्नमेंट से बेहतर सुविधाएं दे रहे प्राइवेट इंस्टीच्यूट.....

अगर शिमला जिला के सरकारी व निजी स्कूलों की सुविधाओं के बारे में बात करें, तो यहां प्राइवेट स्कूलों में छात्रों को बेहतर सुविधाएं दी जा रही हैं। स्मार्ट क्लासरूम से लेकर, ऑनलाइन स्टडी, पढ़ाई की गुणवत्ता पर भी पूरा फोकस है। उधर, सरकारी स्कूलों में बजट होने के बाद भी छात्रों को बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर, क्लासरूम मुहैया करवाने में शिक्षा विभाग नाकाम रहा है। बता दें कि जिला के पच्चास से ज्यादा ऐसे सरकारी स्कूल हैं, जहां बिल्ंिडग न होने की वजह से बरसात व सर्दियों में छात्रों को अंधेरे व टूटे-फूटे कमरों में पढ़ाई करने को मजबूर होना पड़ता है। वहीं, निजी स्कूलों में इंग्लिश मीडियम व छात्रों की काउंसिलिंग तक की जाती है, लेकिन सरकारी स्कूलों में यह भी नहीं होता, जिस वजह से सरकारी स्कूलों के छात्रों की शिक्षा गुणवत्ता में गिरावट आ रही है, तो वहीं निजी स्कूल में पढ़ने वाले छात्र बेहतर जगह परफॉर्मेंस दे रहे हैं।

पढ़ाई पर तो फोकस...ग्राउंड हैं नहीं

राजधानी शिमला में भले ही निजी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता पर ध्यान दिया जाता हो, लेकिन यहां छात्रों को कैंपस के नाम पर कोई भी सुविधा नहीं है। शिमला सिटी में ज्यादा जगह न होने की वजह से कुछ ही स्पेस पर स्कूल का ढांचा खड़ा कर दिया गया है। ऐसे में अगर लंच टाइम में छोटे बच्चों को पढ़ाई के बाद खेलना होे, तो उसके लिए उन्हें खुला स्पेस नहीं मिल पाता। शिमला के निजी स्कूलों के कई भवन ऐसे भी हैं, जहां छात्रों का बैठना तक मुश्किल हो जाता है। हालांकि इससे परे देखें, तो बाकी हर चीज़ में शिमला के निजी स्कूल आगे हैं। इसके अलावा शिमला के निजी स्कूल शिक्षा विभाग को छात्रों के बेहतर रिजल्ट देने में भी आगे रहते हैं। पिछले वर्ष भी शिक्षा विभाग की टीम ने शिमला के निजी स्कूलों को कैंपस सुविधा पूरी न होने पर फटकार लगाई थी। बावजूद इसके अभी तक कैंपस के लिए खुली जगह न मिलने की वजह से निजी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों का पढ़ाई के साथ शारीरिक विकास न होना एक गंभीर मसला बनता जा रहा है। वर्ष 1820 के दौरान शिमला शहर में गिने-चुने ही स्कूल थे। यहां केवल उस समय कॉन्वेंट स्कूल ही थे, लेकिन वर्ष 2000 के बाद शहर में इतने स्कूल खुले कि हर मोड़ व हर तीन किलोमीटर की दूरी पर छात्रों को स्कूल सुविधा मुहैया करवाई गई। शिमला में खुले निजी स्कूलों की खासियत यह है कि यहां एक भी स्कूल बिना मान्यता के नहीं खोला गया है। वहीं, हर स्कूल की शिक्षा व्यवस्था पर सरकार व शिक्षा विभाग नजर रखता है।

शहर में 30 और गांवोें में 70 प्रतिशत निजी स्कूल

भले ही राजधानी शिमला शिक्षा का हब माना जाता है, लेकिन शिमला जिला के ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा निजी स्कूल खोले गए हैं। बताया जा रहा है कि शहर में 30 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रों में 70 प्रतिशत स्कूल खोले गए हैं। विभागीय जानकारी के अनुसार शिमला शहर में करीब 87 प्राइवेट स्कूल हैं। इसके अलावा 327 निजी स्कूल ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हैं।

...ग्रामीण स्कूलों के पास बड़ी बिल्डिंग के साथ खुला मैदान

शिमला जिला के ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे ज्यादा 70 प्रतिशत स्कूल है। शिक्षा विभाग की मानें तो ग्रामीण क्षेत्रों में खोले गए स्कूलों की हालत शहरी निजी स्कूलों से बेहतर है। जिला के ग्रामीण स्कूलों में स्कूल भवन के साथ ही खुला प्लेग्राउंड खेलने के लिए छात्रों को उपलब्ध है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में छात्रों को खेलने के लिए भी पूरी सुविधा दी जा रही है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में भीड़भाड़ वाले इलाकों को छोड़कर  चलाए जा रहे निजी स्कूलों में छात्रों का पढ़ना आसान भी है, वहीं उन्हें स्वच्छ वातावरण भी इस दौरान मिल रहा है।

लो जी! सरकारी पाठशाला के ज्यादातर शिक्षक डेपुटेशन पर

शिमला के  सरकारी स्कूलों में ज्यादा शिक्षक डेपुटेशन पर ही तैनात हैं। ऐसे में यहां छात्र संख्या अनुपात की जरूरत के हिसाब से शिक्षक तैनात हैं। इन शिक्षकों को दूसरे स्कूलों में भेजने के प्रयास भी शिक्षा विभाग के सफल नहीं हो पाए। फिलहाल नए सेशन से अब दूसरी बार शिक्षा विभाग डेपुटेशन पर गए शिक्षकों पर गाज गिराने का प्रयास कर रहे हैं।

एक से बढ़कर एक संस्थान ने बढ़ाई शान

राजधानी होने के कारण शिमला का शिक्षा के क्षेत्र में शुरू से ही महत्त्वपूर्ण स्थान है। इसका महत्त्व हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय और यहां स्थित राजकीय कन्या महाविद्यालय, राजीव गांधी राजकीय डिग्री कालेज कोटशेरा और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस संजौली कालेज के कारण भी है। स्कूलों के साथ यहां कई अच्छे स्तर के कोचिंग सेंटर भी चल रहे हैं। ऐसे में शिमला शिक्षा का केंद्र बनकर उभरा है

अजय श्रीवास्तव, असिस्टेंट प्रोफेसर

शिमला ब्रिटिश शासन की ग्रीष्मकालीन राजधानी रही है। उस दौरान भी यहां शिक्षा के  विकास में योगदान मिला। यही कारण है कि उस समय के जितने भी स्कूल शिमला में बने हैं, वे आज भी बच्चों को बेहतरीन शिक्षा दे रहे हैं, जिसमें शिमला में शिक्षा को महत्त्व मिला है। वहीं, विभिन्न सरकारों ने प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र को प्राथमिकता दी है। शिमला के  प्राकृतिक सौंदर्य और यहां का शांतिपूर्ण वातावरण शिक्षा के लिए बेहतरीन स्थान है

डा. सुनील चौहान, असिस्टेंट प्रोफेसर

जी हां! शिमला शिक्षा का केंद्र बनकर उभरा है। शिमला अंग्रेजों की ग्रीष्मकालीन राजधानी रह चुकी है। शिमला शहर में आजादी से पहले के भी कई स्कूल बने हुए हैं, जिनमें आज भी बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। ये स्कूल आज भी काफी प्रसिद्ध हैं, जैसे कि सेंट एडवर्ड, ताराहॉल, बिशप कॉटन स्कूल, सेंट बीड्स कालेज। ये ऐसे शिक्षण संस्थान हैं, जिन्होंने शिमला की शिक्षा को बेहतरीन बनाने में अपना योगदान दिया है। इसी के साथ शहर में बच्चों के लिए बेहतरीन कोचिंग सेंटर भी मौजूद हैं

विजय लक्ष्मी नेगी, पूर्व असिस्टेंट प्रोफेसर

शिमला शहर शिक्षा का केंद्र बनकर उभरा तो है, लेकिन यहां आज भी अधिकतर स्कूलों में छात्रों को उचित सुविधाएं नहीं मिल पा रही। शिमला शहर का हब बना निःसंदेह यहां कॉन्वेंट या पब्लिक स्कूलों की सरकारी विद्यालयों, जैसे आरकेएमवी, संजौली व बालूगंज विद्यालयों में भवनों की दशा जर्जर है। यहां नए भवन नहीं बनाए जा रहे, हालांकि शहर में संस्थान अधिक हैं। कई स्कूलों में खेल मैदान तक नहीं हैं  

डा. प्रेम शर्मा, प्रधान, शिक्षक महांसघ 

शिमला विश्व में प्रसिद्ध है। 19वीं शताब्दी से लेकर यह आकर्षक शिक्षा का हब रहा है। आज हिमाचल में 17 प्राइवेट यूनिर्वसिटी व तीन सरकारी यूनिर्वसिटी हं। यहां से हजारों छात्र उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। अधिकतर प्राइवेट संस्थानों में छात्रों को प्रोफेशनल कोर्स करने को मिल रहे हैं। आज के दौर में प्रत्येक छात्र प्रोफेशनल कोर्स करना अधिक पसंद कर रहा है     

डा. रमेश चौहान, प्रोफेसर