Monday, September 16, 2019 08:42 PM

फाइलों में दफन हुई चामुंडा-होली टनल

 धर्मशाला - हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान शराब मामले को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष में नोक-झोंक चल रहा है, तो वहीं पहाड़ की बरसात के मौसम में आम लोगों की जान के दुश्मन बने हादसों की रोकथाम के लिए प्रतिनिधियों की आवाज बुंलद नहीं हो पा रही है। हालांकि एक विषय यह भी महत्त्वपूर्ण है कि चुनावी समर के दौरान नेताओं ने आम लोगों को चामुंडा-होली टनल के बड़े-बड़े सपने दिखाए थे, जिसमें उतराला-होली सड़क मार्ग की बजाय चामुंडा-होली टनल का अधिक महत्त्व बताते हुए इसका सर्वे तक किए जाने के वादे किए जा रहे थे। लगभग एक दशक होने को है, लेकिन चामुंडा-होली टनल नेताओं व सरकारों के वादों से आगे कहीं जमीन ही तलाश नहीं हो पाई है। इतना ही नहीं, टनल के शोर-शराबे में उतराला-होली सड़क मार्ग का कार्य भी सुस्त रफ्तार में डाल दिया गया। जनजातीय विकास समिति भरमौर द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी दो वर्ष पूर्व पत्र लिखकर मांग उठाई गई थी। इस बाबत पीएम मोदी ने भी प्रदेश सरकार को सुरंग की फिजिविलिटी जांचने के निर्देश दिए थे। इसके बाद सरकार ने विभाग को फिजिविलिटी जांचने के निर्देश भी दिए, लेकिन बाद में फिजिविलिटी जांचने वाले निर्देश भी गायब हो गए और सुरंग की संभावनाएं भी विभागों की फाइलों में ही दफन कर दी गई हैं। वहीं जनजातीय विकास समिति भरमौर  के अध्यक्ष अनिल भराण, रिंकू सांख्यान, अनिल कपूर, साजन, दुर्गेश नंदन, शशि कपूर, नितिश, सुधीर, बलदेव सिंह ने जल्द ही होली-चामुंडा सुंरग और होली-उतराला सड़क निमार्ण की मांग उठाई है।

सुरंग-सड़क निर्माण से ये फायदे

जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान तक पहुंच आसान हो सकेगी, योल कैंट धर्मशाला और डलहौजी कैंट से जवानों की आवजाही भी आसान हो सकेगी, जनजातीय क्षेत्र में सलाना सेब का 30 से 50 हजार पेटी सेब उत्पादन होता है, जसे उचित मंडी व खरीददार मिल पाएंगे, धर्मशाला गगल हवाई अड्डा तक चंबा निवासियों की पहुंच आसान हो सकेगी, प्रदेश भर सहित देश भर से विश्व भर में प्रसिद्ध मणिमहेश यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी, प्रदेश की दूसरी राजधानी धर्मशाला-स्मार्ट सिटी तक जनजातीय क्षेत्र की पहुंच आसान होगी, केंद्रीय विवि, उच्च शिक्षण संस्थान, टांडा सहित बड़े अस्पतालों में पहुंच आसान हो सकेगी, शिमला, धर्मशाला, भरमौर, होली, चंबा, बनीखेत और डलहोजी के सभी पर्यटन स्थल पर्यटन से जुड़ पाएंगे, जो कि पर्यटकों को लंबे समय तक प्रदेश में रोक सकेंगे, भारी बर्फबारी से लगभग तीन माह तक विश्व से कटने वाला जनजातीय क्षेत्र प्रदेश और देश से जुड़ा रहेगा, रावी नदी में रिवर राफ्टिगं सहित अन्य पर्यटन सुविधा की अपार संभावनाएं है।