Monday, August 10, 2020 10:16 AM

फैसलों का मौसम

हिमाचल में सरकारों का सूचकांक केवल सरकारी नौकरी की घोषणाओं से तय होता है या कर्मचारियों के हित में सरकारी खजाने का खर्च इत्तिलाह देता है। इस लिहाज से मंत्रिमंडलीय फैसलों तथा समारोहों में मुख्यमंत्रियों की घोषणाओं का स्वागत होता है। प्रदेश में सत्ता की छवि कुछ ऐसी बना दी गई है कि पांच साल के शासन को मौसम की तरह देखा जाता है। जाहिर है अपने तीसरे साल में प्रवेश कर रही जयराम सरकार भी सत्ता के मध्यांतर में अपने लक्ष्यों को साधने की इबारत लिख रही है। यह धरातल और आकाश के बीच खुद को स्थापित करने का मौसम है और इसलिए मंत्रिमंडल के फैसलों में सरकारी नौकरियों की दुकान भी सजी है। करीब साढ़े तीन हजार पदों का ताल्लुक उन घर-परिवारों से जुड़ता है, जहां बच्चे अपनी उपाधियों के साथ रोजगार के इंतजार में कतारबद्ध खड़े हैं। जाहिर है घोषित रोजगार के सरकारी पैगंबर अपना आशीर्वाद देंगे और एक उम्मीद की नाव, तमाम लहरों के बीच लक्ष्य बन जाएगी। कम से कम वे बेरोजगार उछल पड़ेंगे, जो अध्यापक बनना चाहते हैं या उनकी शिक्षा उन्हें इसी रास्ते पर लेकर खड़ी है। हिमाचल में रोजगार किसी नीति के बजाय सरकार के प्रश्रय की तरह है, इसलिए अध्यापकों के 3636 पदों का सृजन कई स्कूलों तक यह संदेश भी देता है कि कुछ और अध्यापक आ रहे हैं। कितने बेहतर होंगे या निजी शिक्षण संस्थाओं के मुकाबले इनका चयन किस तरह कारगर होगा, यह सोचने के बजाय हम यह तय कर सकते हैं कि शिक्षा में रोजगार सबसे ऊपर रहा है। सरकारी नौकरी का मजमून शिक्षकों से बेहतर नहीं हो सकता, इसलिए रोजगार मेले के बाद स्थानांतरण के रेले में अध्यापक समाज का वजूद उस कौशल से वावस्ता है, जिसके सापेक्ष नौकरी जिंदाबाद का नारा मनपसंदीदा दो-तीन स्कूलों की धुरी में घूमता है और मंत्री हमेशा नीतियों और आदर्शों के आचरण में पाठ पढ़ाते हैं। बहरहाल कुछ और पद भी सुशोभित होंगे, कार्यालय खुलेंगे और उपतहसीलों की पदोन्नति भी हो रही है। मंत्रिमंडल के आगोश में बैठे कुछ विषय उछलते हैं और कुछ विधायकों के प्रयत्न सफल हो जाते हैं। खुशी की बात यह कि हिमाचल को पानी बेचने का सामर्थ्य मिल रहा है। यमुना नदी से अपने हिस्से का पानी सीधे दिल्ली को बेचकर हिमाचल इक्कीस करोड़ की आमदनी बटोर लेगा। कुछ इसी तरह शिमला के चूना पत्थर को सीमेंट में बदलने के लिए डालमिया के साथ समझौते की स्वीकृति से निवेश के सागर में डुबकी लगाने का इंतजाम हो रहा है। यह दीगर है कि आम हिमाचली को पड़ोसी राज्यों के मुकाबले क्यों महंगा सीमेंट मिल रहा है, इस पर कोई चर्चा व समाधान दिखाई नहीं दे रहा। हिमाचल के विश्राम गृहों में सुविधाएं बढ़ाते हुए थुनाग व आनी के डाक बंगले अपना आकार बढ़ा रहे हैं। छात्रों के अध्ययन को पारंगत करने के लिए कुछ चयनित स्कूलों में वाणिज्य, विज्ञान और मेडिकल साइंस की कक्षाएं शुरू हो रही हैं। प्रदेश में पंचकर्म की सुविधाओं में इजाफा करते हुए पैंतीस पदों का सृजन, आश्वासन प्रदान कर रहा है कि आयुर्वेद अपने तौर पर सक्षम हो रहा है। मंत्रिमंडल की प्राथमिकताओं में लाभान्वित होते जिला तथा विभाग अपनी-अपनी योजनाओं को प्रशस्त कर रहे हैं, लेकिन सरकार की गंभीरता नाचला में एयरपोर्ट के लिए एमओयू को सशक्त कर रही है। सरकार के प्रयास फलीभूत हुए तो वर्षों से ख्वाबों में अटका हवाई अड्डा हकीकत में सामने आएगा। सरकार ने मंत्रिमंडलीय फैसलों में अपनी उदारता को चिन्हित करते हुए इस आशय को मजबूत करने की कोशिश की है कि आगामी चरण में प्रदेश को बहुत कुछ देखने को मिलेगा। विधानसभा के शीतकालीन सत्र से पूर्व मंत्रिमंडलीय बैठकों का उद्देश्य यह भी रहता है कि जब विपक्ष आपत्तियां उठाए, तो इरादों की जंग में सत्ता अपना पक्ष मजबूती से रखे। देखना यह होगा कि इरादों की विभिन्न महफिलों से जयराम सरकार कितने बूटे उगाती है और अपने बूते प्रदेश के इतिहास को किस दिशा में सींच पाती है। प्रदेश में सार्वजनिक क्षेत्र की पहरेदारी कर रही सरकार ने कमोबेश बहुत कुछ कहने का प्रयास किया है, लेकिन इस बार की असली परीक्षा, इन्वेस्टर मीट के खजाने से दी जाएगी। शीतकालीन सत्र के कालीन पर चलते हुए सरकार को उस जीत का एहसास कराना होगा, जिस पर निवेशक का दिल पसीज गया होगा या देश की आर्थिक विडंबनाओं के बावजूद हिमाचल में कोई निवेशक साहस भरे प्रयत्न कर पाता है। मंत्रिमंडल से इस आशय की सूचना कब आती है, इंतजार रहेगा अगली बैठक तक।