Tuesday, September 17, 2019 01:46 PM

बंदर वर्मिन घोषित तो करोड़ों की फिजूलखर्ची क्यों

नाहन -हिमाचल किसान सभा के राज्य अध्यक्ष कुलदीप तंवर ने कहा है कि प्रदेश सरकार किसानों की फसलों और खेतीहर भूमि को जंगली जानवरों से बचाने के लिए गंभीर नहीं है। उन्होंने नाहन में किसान सभा जिला सिरमौर की आयोजित बैठक में  बतौर मुख्य वक्ता बोलते हुए कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा बंदरों के दूसरे देशों में निर्यात करने के प्रयास नही किए गए है। जबकि ऐसे देशों में बायोमेडिकल रिसर्च के लिए बंदरों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार बंदरों को वर्मिन धोषित होने के बाद नसबंदी से इसकी रोकथाम करने का दावा करती है। मगर हकीकत यह है कि प्रदेश सरकार कैंपा योजना का फंड बंदरों की नसबंदी के लिए खर्च कर रही है। वहीं अभी तक लगभग 30 करोड़ से उपर का खर्च बंदरों की नसबंदी पर कर दिया गया है। जबकि बंदरों को वर्मिन के तहत इन्हें मारने के लिए भी परमिशन किसानों की दी गई है। उन्होंने बताया कि जब वर्मिन बंदरों को मारना ही है तो नंसबंदी पर सरकार क्यों करदाताओं का करोड़ों रुपए फूंक रही है। राज्य अध्यक्ष किसान सभा ने कहा कि वाइल्ड लाइफ  मैनजमेंट की तर्ज पर बंदरों की कलिंग होनी आवश्यक है जैसे की दूसरे देशों में भी की जाती है। जिसके लिए प्रदेश सरकार रूरल क्षेत्र मे जिला विकास अभिकरण, पंचायत तथा शहरी क्षेत्रों में नगरपलिका और शहरी विकास विभाग को नोडल एजेंसी बनाकर इनका वैज्ञानिक तरीके से निपटान कर सकती है। उन्होंने बताया कि अभी हालात यह हो रही है कि बंदरों को ग्रामीण स्तर पर बड़े पैमाने पर जहर देकर मारा जा रहा है। जोकि किसी भी सुरत मे पर्यावरणीय तरीके से उचित नहीं है। वहीं दूसरी ओर प्रदेश सरकार इन बंदरों की नसबंदी पर करोड़ों की रुपए की राशि खर्च कर रही है। जबकि समस्या जस की तस बनी है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में सात लाख किसान जंगली जानवरों की समस्या से पीडि़त हो चुके है, जिसमें प्रदेश की 2300 पंचायतों में यह किसान परिवारों के लिए आफत बने हुए है। जिसके चलते साढ़े छह लाख हेक्टेयर कृषि भूमि प्रभावित हो चुकी है। उन्होंने बताया कि एक अनुमान के मुताबिक 400 से 500 करोड़ की फसलों को प्रतिवर्ष जंगली जानवर ओर बंदर उजाड़ रहे है। जिससे भूमि को किसानों के पास बजर रखने के कोई उपाय नहीं बचा है। राज्य अध्यक्ष ने आरोप लगाते हुए कहा कि क्या यह सोची समझी साजिश है कि किसानों की भूमि इस तरह बेरपाही से बंजर कर भू-माफिया के हाथों बेच दिया जाए। इस दौरान यहां किसान सभा सिरमौर के अध्यक्ष रमेश वर्मा, विश्वनाथ शर्मा,गुरदेव सिह इत्यदि दर्जनों किसान सभा के पदाधिकारी  मौजूद रहे।