Monday, September 16, 2019 07:35 AM

बच्चों की पीठ पर सजेंगे रंगीन बैग

प्रदेश खाद्य आपूर्ति निगम ने जारी किया सात करोड़ का सप्लाई ऑर्डर, छात्र-छात्राओं को अलग रंग के मिलेंगे बस्ते

शिमला - रंगीन स्कूल बैग स्कूली बच्चों के कंधों पर सजने वाले हैं। खाद्य आपूर्ति निगम ने स्कूली बैग को सात करोड़ का सप्लाई ऑर्डर जारी कर दिया गया है। खाद्य आपूर्ति निगम द्वारा बच्चों को स्कूली बैग जल्द मुहैया करवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जिसमें निगम ने ऑर्डर पूरा करने के लिए साठ दिन की समय अवधि तय की है। जानकारी के मुताबिक देश की चार नामी कंपनी प्रदेश के स्कूलों में चार कक्षाआें के लिए बैग देगी, जिसमें पहली, तीसरी, छठी और नौवीं कक्षा के स्कूली बच्चों को ये बैग फ्री मिलने वाले हैं। इसकी सूचना शिक्षा विभाग को खाद्य आपूर्ति निगम की ओर से जारी कर दी गई है। गौर हो कि स्कूली बच्चों को जो रंगीन बैग दिए जाएंगे, उसमें छात्र और छात्राआें को अलग रंग के बैग मिलने तय किए गए हैं। इसमें चेरी मिक्स ग्रे कलर छात्राआें को और लड़कों को ऑलिव ग्रीन मिक्स ग्रे रंग का बैग दिया जाएगा। हालांकि अभी प्रदेश सरकार स्कूली बच्चों को फ्री बोतल नहीं दे पाई है, लेकिन बच्चों को बैग जल्द ही दिए जाने वाले हैं। इसके लिए स्कूली बच्चे भी काफी उत्साहित दिख रहे हैं। काफी समय से छात्रों को फ्री बैग मिलने का इंतजार था। जानकारी के मुताबिक बच्चों को दिए जाने वाले इन बैग पर शिक्षा को बढ़ावा देने का स्लोगन भी छापा गया है। बताया जा रहा है कि स्कूली बैग का ऑर्डर ज्यादा होने की वजह से चार बेहतर कंपनियों को सप्लाई दी गई है। सैंपल पास होने के बाद ये ऑर्डर जारी किया गया है। खाद्य आपूर्ति निगम ने भी साफ किया है कि बेहतर कंपनियां स्कूलों तक बैग पहुंचाएगीं, जिसमें अब आगामी कार्रवाई शिक्षा विभाग करने वाला है। वहीं अगले वर्ष फिर से चार कक्षाआें को बैग देने की सूचना है।

अभी तीन लाख बच्चों को मिलेंगे बैग

सूचना है कि हर वर्ष चार कक्षाआें को ही बैग दिए जाएंगे, जिसमें छात्र लगभग दो वर्ष के लिए अपना बैग इस्तेमाल कर सकता है। अगले वर्ष फिर से चार कक्षाआें को बैग देने की सूचना है। इससे पहली से दसवीं कक्षा के सभी बच्चों को बैग दिए जाने का कार्यक्रम तय किया जा रहा है। प्रदेश के लगभग तीन लाख बच्चों को अभी ये बैग फ्री मिल पाएंगे। शिक्षा विभाग द्वारा तय किए स्थानों पर सभी जिला में बैग का आबंटन किया जाने वाला है, जिसमें बच्चों का पूरा रिकार्ड विभाग को सौंप दिया गया है।