Tuesday, November 19, 2019 04:25 AM

बच्चों की शरारतें

आदिल के पड़ोस में शर्मा अंकल रहते थे।  बच्चे उनसे बहुत डरते थे। उनका चेहरा हमेशा गुस्से में रहता था। अंकल के अलावा उस घर में रमेश भैया रहते थे। वह अंकल ं सारा काम करते थे। उसे अंकल ने बोल रखा था कि बच्चे इस घर के आसपास दिखने नहीं चाहिए और अगर दिखे तो उसकी नौकरी चली जाएगी। बच्चे अंकल के घर के बाजू के मैदान में क्रिकेट खेलते थे, तो कई बार उनकी गेंद अंकल के घर चली जाती थी। जिस भी बच्चे की वजह से गेंद अंकल के घर जाती थी, उसी बच्चे को जाकर गेंद लानी पड़ती थी। इस बार यह गलती आदिल से हो गई। आदिल ने सोचा अगर वह नई गेंद के लिए अम्मी से पैसे मांगेगा तो वह गुस्सा करेंगी। आदिल के अब्बा ऑटो चलाते थे, लेकिन उनकी कमाई इतनी कम होती थी कि घर का खर्च बड़ी मुश्किल से हो पाता था, आदिल और उसके भाई बहन को अच्छे स्कूल में पढ़ाने के लिए आदिल की अम्मी भी घर में सिलाई का काम करती थी। आदिल की समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करंे। उसने सोचा गेंद के लिए एक बार रमेश भैया से बात करता हूं। बड़ी हिम्मत करके वह अंकल के घर गया। शर्मा अंकल के बागीचे में बहुत सारे पेड़ लगे थे। वह रमेश भैया को धीरे से आवाज लगाने लगा, तभी उसे अपनी गेंद झाड़ी के पास दिखाई दी। उसने राहत की सांस ली। गेंद लेकर जाने लगा तो उसे उसी झाड़ी में फंसी कुछ काली चीज दिखाई दी, हाथ बढ़ा कर उठाया तो पाया कि यह तो एक पर्स है, उसने पर्स को खोलकर देखा, उसमें बहुत सारे पैसे रखे थे। पर्स पर अंकल की तस्वीर थी। उसने पहले सोचा कि ‘पर्स अंकल को वापस कर देता हूं’, लेकिन फिर सोचा उसे गेंद तो मिल गई है पर्स यहीं छोड़ कर चुपचाप निकल जाता हूं। अगर अंकल को जा कर पर्स दूंगा, तो वह मुझे अपने घर आया देख खूब डांटेंगे। रमेश भैया पर्स को खोज लेंगे और उसने पर्स वहीं रख दिया, लेकिन उसे लगा वह ठीक नहीं कर रहा है। अंकल भले  उसे कितना भी डांटंे, पर्स उन्हें दे देता हूं, उसमें कितने सारे पैसे हैं, हो सकता है उन्होंने कुछ जरूरी काम के लिए इतने सारे पैसे निकाले होंगे। उसने पर्स उठाया और डरते-डरते घर की घंटी बजाई। अंकल ने दरवाजा खोला,  वह बहुत परेशान लग रहे थे, आदिल कुछ कह पाता उससे पहले ही अंकल उसे डांटने लगे ‘तुम लोगों को कितनी बार कहा है यहां मत आया करो, लेकिन तुम लोग सुनते नहीं हो, भागो यहां से नहीं तो तुम्हारे घर में शिकायत करवाऊंगा और वह दरवाजा बंद करने लगे। आदिल ने कहा अंकल एक मिनट मेरी बात तो सुनिए, मेरी गेंद आपके बागीचे में आ गई थी, मैं उसे लेने आया था तो वहां झाड़ी में यह पर्स मिला, इसमें बहुत सारे पैसे हैं, आपके गुस्से के डर से पहले सोचा कि इसे वहीं छोड़ कर चला जाता हूं, लेकिन बाद में सोचा कि आप पर्स के लिए परेशान हो रहे होंगे, आप डांटेंगे तो मैं डांट चुपचाप सुन लूंगा, यह पर्स ले लीजिए और मुझे माफ कर दीजिए। आगे से कभी आपके घर नहीं ंआऊंगा। आदिल, अंकल को पर्स पकड़ा कर तेजी से भाग गया।

दूसरे दिन जब सारे बच्चे क्रिकेट खेल रहे थे तो रमेश भैया आते दिखाई दिए, अशोक ने आदिल से कहा तुम्हें कल अंकल के घर नहीं जाना चाहिए था पता नहीं आज क्या समस्या हो गई जो भैया को भेजा है। आदिल घबरा गया रमेश भैया ने पास आ कर कहा तुम सभी बच्चों को अंकल बुला रहे हैं।  बच्चे बड़े हैरान हुए, यह पहली बार था कि अंकल खुद उन सब को बुला रहे हैं।  सभी ने एक स्वर में जाने से मना कर दिया, तब रमेश भैया ने कहा अरे डरो मत वह तुम लोगों को डांटेगें नहीं बल्कि बात करने बुला रहे हैं। सभी बच्चे घबराते हुए अंकल के घर पहुंचे। अंकल ने सभी बच्चों को प्यार से बैठाया और कहा आदिल कल मैंने तुम्हंे खूब डांटा, मुझे माफ कर दो, मैं सभी से माफी मांगता हूं क्या तुम लोग मुझे माफ करके अपना दोस्त बनाओगे। सब बच्चों ने एक दूसरे की ओर देखा और एक साथ कहा, हां आज से आप हमारे दोस्त हुए। और सारे बच्चे मेज पर रखी खाने की चीज पर टूट पड़े। अंकल दूर खड़े बच्चों के भोलेपन को प्यार से देख रहे थे।