Friday, December 13, 2019 07:21 PM

बच्चों को शैफ में दिख रहा करियर

 शिमला में बच्चों ने दिखाया हुनर, 14 नवंबर को होगा फाइनल कंपीटीशन

शिमला जहां समाज में रहने वाले लोग अपने बच्चों को डाक्टर या इंजीनियर बनाने की सोच रखते हैं वहीं कोई शैफ बनने की इच्छा जताए तो कुछ अटपटा लगता है। बेशक अभिभावक अपने बच्चों को बहुत उंचाइयों पर देखना चाहते हैं, लेकिन इन बुलंदियों पर शैफ बनकर भी पहंुचा जा सकता है। इसी सोच के साथ शिमला के लोेग अपने घर के लिटल शैफ को प्रतियोगिता में लेकर पहुंचे हैं जहां बच्चों ने अपने हाथों के बने स्वादिष्ट व्यंजनों को परोसकर सभी का दिल जीत लिया। प्रदेश के दूसरे क्षेत्रों के साथ मंगलवार को शिमला में भी शैफ कंपीटीशन का आयोजन किया गया। फाइनल 14 नवंबर को होगा, जिससे पहले शिमला जोन में मुकाबले हुए। यहां 70 से ज्यादा बच्चों ने भाग लिया और अपना हुनर दिखाया। इनके हुनर को पहचानने के लिए विशेष रूप से मास्टर शैफ सिरीश सक्सेना यहां आए हैं जिनकी देखरेख में प्रतिभाओं को परखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि हिमाचली बच्चों में टेलेंट है, जिसे निखारने की जरूरत है। सरकार भी इस तरह के आयोजन कर बच्चों को प्रोत्साहित करे क्योंकि इस क्षेत्र में भी बच्चे बुलंदियों तक पहुंच सकते हैं। उन्होंने बताया कि बच्चों ने यहां पर हिमाचली फूड तैयार किया है वहीं कांटिनेंटल फूड भी परोसा। बेहतरीन रेसीपीज यहां पर देखने को मिली हैं। हिम आंचल शैफ एसोसिएशन के अध्यक्ष नंद लाल शर्मा ने कहा कि पर्यटन विकास निगम की सहायता से यहां पर बच्चों को इस क्षेत्र में आगे बढ़ने का मौका दिया जा रहा है। हिमाचल में इस तरह के आयोजन पहली बार किए जा रहे हैं। चार जोन में प्रदेश में बच्चों के बीच शैफ कंपीटिशन करवाया गया है, जिसके विजेता 14 नवंबर को शिमला में प्रदर्शन करेंगे। फाइनल मुकाबले मंे विजेताओं को पर्यटन विकास निगम की प्रबंध निदेशक कुमुद सिंह सम्मानित करेंगी। उन्होंने कहा कि बच्चों के साथ उनके अभिभावकों में बड़ा क्रेज है और वे चाहते हैं कि उनके बच्चे इस दिशा में आगे बढ़ें। शिमला में एक से बढ़़कर एक व्यंजन बच्चों ने लाए हैं जिनको परखने के लिए दिल्ली से शैफ यहां पहंुचे हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों में स्किल हो तो वे कुछ भी कर सकते हैं। यहां पहुंची वंशिका, अर्श व सूर्यांश से बात करने पर उन्होंने कहा कि उन्हें खाना बनाने का शौक है। अभिभावक उन्हें प्रोत्साहित  रते हैं और उनके प्रोत्साहन से ही वे इस प्रतियोगिता तक पहुंचे हैं। उनकी यहां से आगे जाने की इच्छा है।