Tuesday, August 04, 2020 10:16 AM

बच्‍चों की प्रतिभा को पहचान कर निखारें

मेरा भविष्‍य मेरे साथ 28

करियर काउंसिलिंग कर्नल रिटायर मनीष धीमान

करीब पंद्रह साल पहले सेना के एक अभ्यास सत्र के दौरान हम पंजाब में मौजूद थे। क्षेत्र में अच्छी फसल, हर तरफ  ट्यूबवेल्स, सड़कों का जाल, बिजली की तार तथा बड़ी-बड़ी बिल्डिंग होने से अंदाजा लगाया जा सकता था कि क्षेत्र राजस्थान के रेतीले धोरो की तरह खाली नहीं, बल्कि काफी विकसित है। इस एरिया में टैंक मूवमेंट इतनी आसानी से नहीं हो पाएगी। इसलिए अभ्यास के दौरान टैंक द्वारा लड़ाई के मुताबिक की जाने वाली कार्रवाई के लिए पहले क्षेत्र को अच्छी तरह देख सुनकर पहचानने का काम किया जाने लगा, ताकि जब टैंक मूवमेंट की जाए तो किसी भी तरह की निजी या सरकारी संपत्ति का नुकसान न हो। इसी जान पहचान अभियान के दौरान, सड़क किनारे एक ढाबा, जो हमारे बेस कैंप के नजदीक था, उसमें एक दिन चाय पीने बैठे। वहां पर चाय पीते वक्त मैंने देखा कि एक छोटा बच्चा, जो करीब 9-10 साल की उम्र का होगा, वहां जूठे कप-प्लेट उठा रहा था। यह देख मैंने दुकानदार को उस बच्चे से काम करवाने के लिए मना किया। तब दुकानदार ने बताया कि यह इसी गांव का लड़का है, गरीब घर से है, उसकी मां यहां चाय और चपाती बनाने के साथ जूठे बरतन साफ  करती है। यह लड़का भी स्कूल के बाद यहां आ जाता है और थोड़ा बहुत काम करता रहता है। मैंने उस लड़के को पास बुलाया और पूछा कि वह स्कूल के बाद घर बैठ पढ़ाई करने के बजाय यहां क्यों आ जाता है, तो उसने बताया कि उसे संगीत का शौक है और यहां ढाबे पर सारा दिन गाने बजते रहते हैं, तो उनको सुनकर खुद भी गाने की कोशिश करता है। दुकानदार ने कहा कि यह बड़ा अच्छा गाता है और उसको गाने को कहा, तब उस लड़के ने इतना अच्छा गाया कि उसकी आवाज एवं संगीत के ज्ञान से ऐसे लग रहा था कि वह किसी बड़े संगीत घराने से गाने की शिक्षा ले रहा हो, पर हैरानी यह थी कि उसने गाना ढाबे पर बज रहे गीतों को सुनकर ही सीखा था। अगले कुछ दिन उसकी दिनचर्या पर नजर रखने के बाद मैंने उसको अपने कैंप में बुलाया और उसके लिए एक रेडियो तथा एक टेप रिकार्डर खरीद कर दिया और उसे बताया कि आइंदा स्कूल से छुट्टी के बाद अपने घर बैठ पढ़ाई करना और जो समय बचता है उसमें रेडियो से गाने सुनें और अपने गाने टेप रिकार्डर में रिकार्ड कर गलतियां सुधारे। मैंने गांव के सरपंच तथा कुछ सेवानिवृत्त सैनिकों से इस बारे में बात की तो उन्होंने उसकी मदद करने तथा गुरुद्वारा साहब में संगीत यंत्रों की शिक्षा देने का वादा किया। कुछ दिन पहले सोनी टीवी पर संगीत के प्रोग्राम में पंजाब के एक गरीब घर के लड़के को इतना अच्छा करते देख, मुझे पंद्रह साल पहले ढाबे पर मिले बच्चे की याद आई और उसके बारे में जानने के लिए उस गांव में गया। वहां ढाबे से बड़ा होटल एवं समय के साथ हुई तरक्की से हर कुछ बदल चुका था। वहां जाकर अपनी पहचान बता उस लड़के के बारे में पूछा, तो उन्होंने बताया कि वह लड़का बहुत बड़ा सिंगर बन चुका है, सप्ताह के चार दिन शो करता है और लाखों में कमाता है। उन लोगों ने मुझे उसकी मां से मिलाया। वह औरत जो आज से करीब 15 साल पहले मुझे ढाबे में बरतन साफ  करते हुए मिली थी, आज एक अच्छी हवेली में रहने लगी थी। मुझे देखते ही उसने मुझे पहचान लिया और नम आंखों से बताया कि साहब आप ने उस वक्त मेरे बेटे पर भरोसा जताकर उसका आत्मविश्वास बढ़ाया था, आपके उस व्यवहार ने हमारी जिंदगी बदल दी। गांव में तो हम पहले से ही रहते थे, पर आपके कहने के बाद गांव वालों ने उसकी बहुत मदद की और प्रोत्साहित किया और आज हम ‘वाहे- गुरु’  की कृपा से अच्छी और कामयाब जिंदगी जी रहे हैं । उनसे मिलकर मुझे यह पता चल गया कि इंडियन आइडल में आने वाला सिंगर वह लड़का नहीं है, पर इस चीज पर भी विश्वास हो गया कि जिस लड़के की प्रतिभा का एहसास मुझे 15 साल पहले हुआ था, वह भी आज एक अच्छी जिंदगी जी रहा है और पंजाब का एक कामयाब गायक बन चुका है। इससे मैं हर मां-बाप को एक मैसेज देना चाहता हूं कि अगर आप अपने बच्चे में उसके बाल्य काल के दौरान किसी विशेष चीज के प्रति अद्भुत रुचि देखें, जिसके साथ वह उठते, बैठते, सोते हर वक्त जीना चाहता हो, उसकी उस रुचि अनुसार प्रतिभा को पहचान कर निखारने में सहयोग करें।