Monday, June 24, 2019 04:20 PM

बजट के पिटारे से हर वर्ग को मिली राहत

केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए बजट पर सोलन वासियों की मिलीजुली प्रतिक्रिया मिल रही है। व्यापारी वर्ग, वेतनभोगियों को तो बजट रास आ रहा है, लेकिन किसान वर्ग केंद्र सरकार के लोलीपॉप से खुश नहीं है। कई लोगों ने तो इसे किसानों के साथ क्रुर मजाक करार दिया। वहीं कई लोगों का कहना है कि सालाना छह हजार रुपए किसानों को मिलने से क्या होगा। किसानों की उत्पादन लागत ज्यादा होती है और बाजार में उत्पादों की कीमतें कम होती है। किसान यहां तक कहने लगे हैं कि मौजूदा समय में खाद महंगी है और दवाइयां भी पहुंच से बाहर है। ऐसे में 500 रुपए प्रतिमाह से क्या होने वाला है। उधर, 5 लाख तक की आय में दी गई टैक्स छूट को व्यापारियों एवं मध्यम वर्गीय लोगोंं ने सही करार दिया  आदित्य सोफत-सोलन

व्यापारी वर्ग के लिए बजट सुविधाजनक

व्यवसायी मुकेश गुप्ता का कहना है कि व्यापारी वर्ग के लिए यह बजट सुविधाजनक है। इस बजट में व्यापारी को काफी राहत मिलेगी। इससे महंगाई पर भी विराम लगेगा। इसी के साथ आयकर टैक्स को तीन लाख से बढ़ाकर पांच लाख किया गया है। बजट में 2.4 लाख तक किराए की आमदनी पर टीडीएस न होना, 40 तक ब्याज आमदनी पर टीडीएस न होना, व्यपारियों के लिए 10 लाख रुपए तक का बीमा, जीएसटी में 40 लाख तक कि छूट के साथ रक्षा बजट तीन लाख करोड़ रुपए रखा गया है।

बजट में हर वर्ग का रखा ध्यान

वेतनभोगी सतीश का कहना है कि सरकार द्वारा आगामी वर्ष के लिए पेश किए बजट में हर वर्ग का ध्यान रखा है जोकि एक सहरानीय कदम है। बजट में पांच लाख से ऊपर आय में बजट की बात कही है जोकि अधिक नहीं है। बल्कि यह होना चाहिए था क्योंकि पांच लाख ज्यादा बड़ी रकम नहीं है। उनका कहना है कि यह अच्छी बात है कि सरकार ने किरणों के साथ-साथ आम आदमी का ध्यान भी बजट में रखा है।

किसानों के बारे में व्याख्यान

सोलन के किसान ईश्वर सिंह का कहना है कि सरकार ने जो बजट पेश किया है उसमें सरकार किसानों के बारे में व्याख्यान कर रही है वह पोलिटिकल अधिक लग रहा है। सरकार यह लह रही है कि हम किसानों को योजना के तहत सालाना छह हजार देंगे। यह राशि बिल्कुल कम है। उनके कहना है कि यही इसकी तुलना की जाए तो यह राशि दवाइयों, बीज के लिए कम है और किसान इतनी कठिन स्थिति में फसलों का उत्पादन करता है।

चुनावोंं को देखते हुए पेश किया बजट

यूसीपीआई पॉलिटिक्स कमेटी के हरगोपाल सिंह का कहना है कि बजट को 2019 के चुनावों को देखते हुए पेश किया है लेकिन इसमे बहुत कुछ महत्वपूर्ण भी है। बजट में यह बताया गया है कि किस तरह से वोट मिल सके। उनका कहना ही कि इस बजट में जहां किसानों को 500 रुपए महीना देकर एक क्रुर मजाक किया है वहीं अप्पर और मिडल परिवार को आयकर पांच लाख से ऊपर कर खुश भी किया है।

एमएसएमई उद्योगों को कोई लाभ नहीं

सोलन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के जरनल सेकेटरी वीरेंद्र अग्रवाल का कहना है कि भारत सरकार के बजट में एमएसएमई उद्योगों को कोई लाभ नहीं मिला है। यह बजट कुल मिलाकर निराशाजनक है। भारत सरकार और राज्य सरकारों द्वारा उद्योगों के लिए बनाए गए नियमों व अन्य कारणों से उद्योग पलायन करने की तैयारी में है।

अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करने वाला

अर्थशास्त्री विनोद शर्मा का कहना है कि यह बजट अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करने वाला कहा जा सकता है, क्योंकि इसमें समाज के हर वर्ग को कुछ रियायतें प्रदान करने के साथ-साथ अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करने वाले प्रावधानों का भी समावेश किया गया है। मध्यवर्ग के लिए इसमें छूट सीमा को बढ़ाया गया है तो किसानों को नकद हस्तांतरण और खेती को लाभान्वित करने के प्रावधान हैं