Tuesday, August 20, 2019 10:34 AM

बज्रेश्वरी मंदिर के चढ़ावे का एक करोड़

मंदिर प्रशासन ने विरोध के बाद भी लिया फैसला, यात्रियों को नहीं मिल रहीं सुविधाएं

कांगड़ा -मां के भक्तों को सुविधाएं मुहैया करवाने में नाकाम रहे मंदिर प्रशासन कांगड़ा ने विरोध के बावजूद एक करोड़ रुपए मुख्यमंत्री राहत कोष में देने का फैसला कर लिया है। अधिवक्ता विनय शर्मा ने इसे उच्च न्यायालय की अवमानना करार दिया है और कहा है कि वह इस मसले पर हाई कोर्ट जाएंगे । प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता अजय वर्मा ने भी मंदिर ट्रस्ट के इस फैसले का कड़ा विरोध किया है।  मंगलवार को आयोजित मंदिर ट्रस्ट की बैठक में कुछ मंदिर ट्रस्टियों के विरोध के बावजूद एक करोड़ रुपए मुख्यमंत्री राहत कोष में देने का निर्णय लिया गया है। एसडीएम एवं सहायक आयुक्त मंदिर जतिन लाल, मंदिर अधिकारी नीलम ठाकुर व मंदिर ट्रस्ट के सदस्यों की मौजूदगी में हुए इस फैसले मंदिर ट्रस्टी एवं वरिष्ठ पुजारी पंडित राम प्रसाद शर्मा ने अपना गुस्सा प्रकट किया। कहा कि मंदिर ट्रस्ट मुख्यमंत्री राहत कोष में धन देने के बजाय यात्रियों को सुविधाएं प्रदान करें। उन्होंने बैठक में बताया कि करीब 6.50  करोड़ रुपए सालाना इनकम वाले इस मंदिर ट्रस्ट की करीब  3.30 करोड़ रुपए की देनदारी है और डेढ़ करोड़  बकाया राशि मौजूदा समय में है। अगर एक करोड़ रुपए मुख्यमंत्री राहत कोष में दिया, तो विकास के लिए कोई पैसा नहीं बचेगा । उल्लेखनीय है कि गुप्त गंगा स्थित यात्री सदन पिछले चार माह से बंद पड़ा है । सामुदायिक भवन का कार्य भी अधूरा है । म्यूजियम भी नहीं बन पाया है ।  सस्ती दरों पर रात्रि विश्राम की कोई जगह न होने की वजह से मां के भक्त मिनी सचिवालय व अन्य स्थानों पर धरती पर सोते हैं।

 मुख्यमंत्री राहत कोष में पैसा देना गलत

लोगों का कहना है कि माता बज्रेश्वरी देवी मंदिर में भक्त सुविधाओं के लिए दान देते हैं और यह राशि मुख्यमंत्री राहत कोष में देना सरासर अन्याय है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता अजय वर्मा ने कहा है कि पहले भाजपा के ही इन नेताओं ने ऐसे निर्णय का विरोध किया था और आज सत्ताधारियों के दबाव में वे खामोश हैं  । मंदिर ट्रस्ट के सदस्य श्रद्धालुओं को सुविधाएं देने वाले विकास के लिए बनाए गए हैं और वे ऐसे निर्णय लेकर अपने दायित्व नहीं निभा रहे हैं। पूर्व  नौसैनिक कुलतार चंद गुलेरिया ने इसे घोर अन्याय करा दिया है  ।