Friday, December 13, 2019 07:23 PM

बदहाली पर आंसू बहा रहे नाहन के तालाब

 देखरेख के अभाव के चलते 200 साल पुराने तालाबों व बावडि़यों का अस्त्तिव खतरे में

नाहन -हिमाचल प्रदेश का ऐतिहासिक शहर नाहन कभी तालाबों व बावडि़यों के लिए मशहूर था, लेकिन आज देखरेख के अभाव में शहर के तालाबों की हालत खराब होती जा रही है। नाहन में करीब आधा दर्जन तालाब हुआ करते थे जिनमें से सिमट कर अब कुछ ही रह गए हैं और धीरे-धीरे यह तालाब भी अपना अस्तित्त्व खोते जा रहे हैं। गौर हो कि शहर के बीचोंबीच स्थित कालीस्थान तालाब की हालत भी खस्ताहाल हो चुकी है, जिस पर प्रशासन की कोई देखरेख नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिकतर प्रशासनिक अधिकारी इस ओर से ही आते जाते हैं और अधिकतर कार्यालय भी तालाब के समीप हैं, परंतु इस तालाब की ओर न तो प्रशासन और न ही नगरपालिका परिषद नाहन ध्यान दे रही है। तालाब में अधिकतर गंदगी के कारण आसपास बदबू फैल रही है, जिसके चलते वातावरण प्रदूषित हो रहा है। आम जनता का कहना है कि अगर तालाबों को बचाना है तो यहां ठोस कदम उठाने की जरूरत है। इसके अलावा ऐतिहासिक पक्का तालाब भी अपनी चमक खो चुका है। कीचड़ और काई से लबरेज यह ऐतिहासिक तालाब अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रहने वाले इस तालाब की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि इनमें कुछ समय पहले लगे फव्वारे व लाइटें भी बंद हो चुकी हैं, जिस पर प्रशासन की कोई देखरेख नहीं है। इसके चलते आसपास के लोग भी अपने घरों के कूड़े को तालाब में फेंकने लगे हैं, जिससे तालाब का पानी भी खराब हो गया है और तालाब में पाए जाने वाले जलीय जी, बतख आदि भी गायब हो गए हैं। कुछ समय पूर्व लोग जहां तालाबों का पानी पीने योग्य भी समझते थे, परंतु आज पानी में दुर्गंध व गंदगी इतनी बढ़ गई है कि आसपास से गुजरना भी दुर्लर्भ हो गया है। इसके बावजूद भी इसकी साफ-सफाई पर किसी का ध्यान नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ समय पूर्व पक्का तालाब का सौंदर्य इतना था कि यहां पर पर्यटकों के आकर्षण के लिए नौका का भी प्रबंध था, जिससे नगर परिषद को भी आमदनी होती थी। लेकिन कुछ समय से यहां यह सब मानों गुम सा हो गया है और धीरे-धीरे तालाब का पानी भी कम होता जा रहा है। आम जनता का कहना है कि प्रशासन व नगर परिषद को इस मुद्दे पर कोई ठोस कदम उठाना चाहिए, जिससे कि यहां आने वाले पर्यटकों का आकर्षण बढ़े व नगर परिषद को भी आमदनी हो। शहर के बुद्धिजीवी वर्ग का कहना है कि प्रशासन को इन ऐतिहासिक धरोहर की बदहाली को दूर करने की दिशा में तेजी से काम करने की जरूरत है नहीं तो भविष्य में इन ऐतिहासिक धरोहर का सिर्फ नाम ही रह जाएगा और यह केवल इतिहास के पन्नों तक ही सिमट कर  रह जाएगी।