Monday, April 06, 2020 06:34 PM

बद्दी में बही ज्ञान की गंगा

श्रीकृष्ण कथा के दूसरे दिन सुनाया भक्त मीराबाई का प्रसंग

बद्दी-बद्दी के अमरावती स्थित श्री देवीवती दुर्गा मंदिर में आयोजित श्रीकृष्ण कथा के दूसरे दिन भक्त मीराबाई प्रसंग सुनाया गया। दिव्य ज्योति जागृति सस्ंथान के संस्थापक एवं संचालक आशुतोष महाराज की परम शिष्या कथा व्यास साध्वी संयोगिता भारती ने कहा कि आज से लगभग 300 वर्ष पूर्व राजस्थान की मरूभूमि पर श्री कृष्ण भक्त मीराबाई का जन्म हुआ। मीराबाई बहुआयामीय व्यक्तित्व की स्वामिनी थी। वह एक क्रांतिकारी समाज सेविका, पाखंडों की खंडनकर्ता, एक उच्च कोटि की कवयित्री, एक समर्पित शिष्या और इन सभी में सर्वोपरि एक महान भक्तात्मा थी। साक्षात भाक्ति मीरा के रूप में देह धर कर आई थी। वे भक्ति की ऐसी रंगशाला थी कि उनके संपर्क में आने वाले बेरंग फिके हृदय भी दिव्य रंगों से गुलजार हो उठते थे। गुरू रविदास द्वारा उन्होंने कृष्ण तत्व का साक्षात्कार किया और उन्हीं की आज्ञा से मीराबाई ने चितौड़, मेड़ता, वृंदावन, द्वारिका आदि क्षेत्रों में ब्रहज्ञान का प्रचार-प्रसार किया। गुरू की अनिवार्यता को दर्शाते हुए कहा यदि हरि जीवन रूपी नौका के आधार हैं तो गुरू उसे ावपार लगाने वाले कर्णधार हैं। उन्होंने कहा कि मीराबाई अपने प्रवचनों में कहती हैं कि द्वारिकाधीश हम सभी के अंतर्घट में ज्योतिपमान हैं। ज्ञानचक्षु द्वारा उसे प्रत्यक्ष देखा जा सकता है। मैंने अपने गुरू रविदास से इस दिव्य नेत्र को प्राप्त कर कान्हा का तत्व से साक्षात्कार किया है। हम सभी भी एक पूर्ण गुरू द्वारा पभु के तत्व स्वरूप का साक्षात्कार कर सकते हैं। दूसरे दिवस कथा को विराम प्रभु की पावन आरती द्वारा दिया गया।