Saturday, November 27, 2021 11:06 PM

बनावट बदलकर बचाया जा सकता है पत्तलडा. एमके ब्रह्मी

वर्तमान परिपेक्ष में पाश्चात्य संस्कृति का हमारी संस्कृति पर काफी असर पड़ा है। लोगों के खान-पान व रहन-सहन में भी काफी बदलाव आ चुका है। लोगों का दिखावा करने में ज्यादा विश्वास हो गया है तथा अपनी पारंपरिक चीजों के इस्तेमाल को लगभग भूलते जा रहे हैं, जिससे हमारी संस्कृति खोखली होती जा रही है।  इस पत्तल व्यवसाय के विलुप्त होने के मुख्य कारक निम्नलिखित हैं।

* मेहनत के मुताबिक आय कम

* कागज व थर्मोकोल निर्मित  प्लेटों से कड़ी प्रतिस्पर्धा

* जंगलों में पत्तों की कम उपलब्धता

* मौसम में अनियमितताएं ः अधिक वर्षा व हवाएं (तूफान) पत्तों को खराब कर देती हैं।

* पत्ते इकट्ठे करने में अधिक समय लगना व चोट का भय।

* पत्तलों का जल्दी खराब हो जाना व कम टिकाऊपन।

* ज्यादा दिनों तक भंडारण नहीं कर सकते। क्योंकि इसमें फफूंद लग जाती है व कालापन आ जाता है।

* नियमित मांग की कमी। केवल शादियों के सीजन में ही ज्यादा मांग।

* बाजारीकरण की समस्या

* नई पीढ़ी द्वारा व्यवसाय को न अपनाना व शहरों की ओर पलायन।

पत्तल व्यवसाय को विलुप्त होने से बचाने के कुछ सुझावः

* पत्तल व्यवसाय से जुड़े लोगों को चिन्हित करके उनका समूह बनाएं, जैसे स्वयं सहायता समूह या सोसायटी।

* पत्तल की बनावट को आकर्षक बनाया जाए। इसके लिए उचित प्रशिक्षण दिया जाए।

* विभिन्न जिलों के व्यवसायियों की आपस में सभाएं आयोजित की जाएं।

* जहां पर इस दिशा में अच्छा कार्य हो रहा हो वहां का भ्रमण करवाया जाए। व्यवसायियों व व्यापारियों का आपस में वार्तालाप करवाया जाए, ताकि पत्तलों का बाजारीकरण सुनिश्चित हो सके।

* गैर सरकारी संस्थाओं के साथ समूहों को जोड़ा जाए, ताकि पत्तल बेचने की समस्या न आए।

* सरकार द्वारा सभी मंदिरों के भंडारों व धार्मिक आयोजनों में पत्तल का प्रयोग सुनिश्चित करें।

* पर्यटन विभाग द्वारा पत्तल प्रयोग को बढ़ावा दिया जाए।

* वन विभाग द्वारा पत्तल व्यवसाय से जुड़े समूहों को अपनाना व उचित प्रशिक्षण देना व बाजार से जोड़ने का कार्य करना।

* व्यवसाय अपनाने वालों को सरकार द्वारा अनुदान देना।

* व्यवसाय से जुड़े लोगों का मुफ्त जीवन बीमा करना।

* प्रशिक्षण के दौरान अनुदान के रूप में राशि देना।

* अच्छा कार्य करने वालों को प्रोत्साहित करना।

* मास्टर ट्रेनर के रूप में रोजगार उपलब्ध करवाना।

* वन विभाग द्वारा इस प्रजाति के पौधों को रोपण पर अधिक बल देना।

अगर इन सुझावों पर गौर की जाए तो यह पर्यावरण प्रेमी व्यवसाय विलुप्त होने से बच सकता है तथा जलवायु के बदलते परिवेश में प्रदूषण को कम करने में भी सहायक होगा।

 

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