बर्फ से बनेगी बिजली

दुनियाभर में बिजली की मांग बढ़ती जा रही है। इस मांग को देखते हुए वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक ईजाद की है जो बर्फबारी से बिजली बनाएगी। अपनी तरह का पहला 3 डी प्रिटेंड उपकरण आसमान से गिरती हुई बर्फ से बिजली बनाने का काम करेगा। लॉस एंजिलिस की यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के शोधकर्ताओं ने इस उपकरण ईजाद किया है। यह उपकरण छोटा, पतला और प्लास्टिक की शीट की तरह मुड़ने वाला है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह उपकरण काफी सस्ता है। प्रमुख शोधकर्ता रिचर्ड कनेर ने कहा, यह उपकरण ग्रामीण और दूरदराज वाले इलाकों में भी काम कर सकता है क्योंकि इसे चलने के लिए किसी बैटरी की जरूरत नहीं है और यह अपने संचालन के लिए स्वयं ऊर्जा उत्पन्न करता है। इस शोध को पत्रिका नैनो इनर्जी में प्रकाशित किया गया है। इस उपकरण का इस्तेमाल ठंड के स्पोर्ट्स जैसे स्कीइंग आदि की मॉनिटरिंग करने के लिए भी किया जा सकता है। इससे खिलाडि़यों के प्रदर्शन को बेहतर करने के लिए सुझाव भी मिल सकता है।

मौसम का भी सारा हाल जानता है स्नो टेंग

शोधकर्ताओं के अनुसार, यह उपकरण बहुत होशियार है। यह अपने आप में एक मौसम केंद्र की तरह है, जो यह बता सकता है कि कितनी बर्फ गिरेगी, किस दिशा में बर्फ गिरेगी और हवा की रफ्तार कितनी रहेगी। इस उपकरण को बर्फ आधारित ट्राइबोइलेक्ट्रिक नैनोजेनरेटर या स्नो टेंग कहा जाता है। यह उपकरण स्थिर ऊर्जा से स्वयं को चार्ज करता है और इलेक्ट्रॉन के एक्सचेंज से बिजली पैदा करता है। कनेर ने कहा कि स्थिर ऊर्जा दो ऐसे पदार्थों के मिलने से पैदा होती है, जिसमें से एक इलेक्ट्रॉन देता है और दूसरा इलेक्ट्रॉन को स्वीकार करता है। यह उपकरण दो तरह के चार्ज को अलग-अलग कर बिजली बनाने की प्रक्रिया को अंजाम देता है।

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