Monday, October 21, 2019 08:25 AM

‘बल्लामार’ हरकत के खिलाफ

मंच भाजपा संसदीय दल का था, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी को बोलना वह पड़ा, जो उन्हें आहत कर रहा था और पार्टी की छवि दागदार कर रहा था। सबक सभी के लिए था, लिहाजा उस बैठक में प्रधानमंत्री को बोलना पड़ा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जन प्रतिनिधि का हिंसक और मनमाना व्यवहार स्वीकार्य नहीं है। बेटा किसी का भी हो, ऐसे लोगों को पार्टी से निकाल देना चाहिए। यह संस्कृति भाजपा की नहीं है। इंदौर के विधायक आकाश विजयवर्गीय ने क्रिकेट के बल्ले से नगर निगम के कर्मचारियों को पीटा था। साथ ही अपनी सोच बताई थी- पहले आवेदन, फिर निवेदन, बाद में दे-दना-दन। नगर निगम के कर्मचारी उन मकानों को खाली कराने गए थे, जो बरसात के मौसम में ‘मौत’ साबित हो सकते थे। उस कांड के बाद आकाश को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया, लेकिन भोपाल की अदालत से उन्हें जमानत मिल गई। विधायक जेल के बाहर आए, तो उनका कहना था- ‘मुझे कोई अफसोस नहीं है।’ मां ने माथे पर तिलक किया और कुछ चाटुकार किस्म के लोगों ने विधायक आकाश के स्वागत में आयोजन किए। प्रधानमंत्री मोदी इन सबसे नाराज हैं और संसदीय दल की बैठक में उन्होंने कहा कि इन सभी को पार्टी से निकाल देना चाहिए। प्रधानमंत्री का रुख कड़ा है। देखते हैं कि पार्टी स्तर पर क्या कार्रवाई की जाती है, लेकिन भाजपा के सत्ता में लौट आने के बाद कुछ तत्त्व ऐसे हैं, जो अराजक, उच्छृंखल और हिंसक होते गए हैं। आकाश भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के पुत्र हैं। शायद उसी हेकड़ी के तहत उन्होंने कर्मचारियों पर ‘बल्ला’ चला दिया हो। जब प्रधानमंत्री राजनीतिक मनमानी, गुंडागर्दी और हिंसक हरकतों पर कड़ा संदेश देते हैं, तो उससे उम्मीद बंधती है। क्या इस उम्मीद के दायरे में वे हत्यारे भी आते हैं, जो ‘जय श्रीराम’, ‘जय हनुमान’, ‘वंदे मातरम्’ बोलने के बावजूद गैर-हिंदू लोगों को मारते रहे हैं। ऐसे हत्यारों को प्रधानमंत्री ‘असामाजिक तत्त्व’ और ‘गुंडे’ करार देते रहे हैं, लेकिन ये प्रवृत्तियां जारी हैं और भाजपा-संघ परिवार को कलंकित करती रही हैं। हालांकि कानून-व्यवस्था राज्यों का मामला है, लेकिन प्रधानमंत्री के स्तर पर ऐसी कड़ी कार्रवाई के आदेश जाने चाहिए कि ये हरकतें शांत हो सकें। हमारा मानना है कि इन प्रवृत्तियों को राजनीतिक तौर पर खत्म नहीं किया जा सकता। विधायक ने जो अहंकार, घमंड और हेकड़ी के भाव दिखाए थे, उन्हें कैसे कुचला जा सकता है, क्योंकि उसमें सेवाभाव के बजाय मालिकभाव ज्यादा होता है। यह किसी एक पार्टी या प्रदेश की समस्या भी नहीं है। कुछ प्रदेशों में यह समस्या ज्यादा-कम भी होती रहती है। यह कोई इसी दौर में पैदा हुई समस्या भी नहीं है। इसकी जड़ें गहरी हैं, लिहाजा प्रधानमंत्री के आदेश पर आकाश को पार्टी से निलंबित किया जा सकता है, लेकिन ऐसे असंख्य चेहरों पर लगाम कैसे लगेगी? प्रधानमंत्री मोदी के कथन से निराश भी नहीं हो सकते। उनके आह्वान पर ऐसे हिंसक लोगों के खिलाफ कोई जन आंदोलन तक छिड़ सकता है। कमोबेश भाजपा के भीतर तो सुधार हो सकता है। उसके लिए आकाश एवं उनके चाटुकारों को दंडित करना लाजिमी है। प्रधानमंत्री मोदी से उम्मीद की वजह यह है कि उन्हें जनता का विराट और व्यापक समर्थन हासिल है। उनके आह्वान पर जनता कुछ भी करने को तैयार हो सकती है, लेकिन भाजपा में से उन तत्त्वों को छांटना बेहद जरूरी है, जो उसके चाल, चेहरे और चरित्र को सवालिया बना रहे हैं। एक विधायक लोगों का ‘सेवक’ होता है, लोकतंत्र की परिभाषा में यही निहित है। जन-प्रतिनिधि कभी भी गली का गुंडा नहीं हो सकता, बेशक उसकी दलीलें कुछ भी हों। प्रधानमंत्री मोदी का बयान इस ‘गुंडावाद’ का खात्मा करेगा, उम्मीद के साथ-साथ राहत भी है।