Saturday, April 20, 2019 01:44 PM

बहन चामुंडा से मिलने रवाना हुई बैरेवाली भगवती

चंबा—सदियों पुरानी पंरपरा का निर्वाह करते हुए बैसाख माह की संक्रांति को चुराह के देवीकोठी से बैरेवाली भगवती अपनी देवी बहन चामंुडा माता से मिलने के लिए चंबा को रवाना हुई। करीब पांच दिनों तक कई किलोमीटर के लंबे फासले को कारदारों संग पैदल तय करके बैरेवली भगवती चंबा अपनी बहन चामंुडा के पास पहंुचेंगी। अगले 15 दिनों तक बैरेवाली भगवती चंबा में बहन चामंुडा के पास रुकेगी। इस दौरान श्रद्धालु बैरेवाली भगवती को अपने घर आने का न्यौता देकर पूजा- अर्चना करेंगे। दो देवी बहनों के मिलन के अंतिम दिन चामंुडा माता मंदिर परिसर में जातर मेले का आयोजन किया जाएगा, जिसमें गुर कांपकर पुछें देंगे। इस मेले में हजारों की तादाद में श्रद्धालु उपस्थिति दर्ज करवाकर दो देवी बहनों के मिलन के गवाह बनेंगे। बैरेवाली भगवती के आगमन को लेकर चामंुडा माता मंदिर को दुल्हन की तरह सजाया जा रहा है।  चुराह के देवीकोठी से बैरेवाली भगवती हर वर्ष बसोए की पिंदडी खाने के लिए अपनी देवी बहन चामंुडा माता के पास आती है। चामंुडा सेवा समिति के सदस्य बाकायदा देवीकोठी जाकर बैरेवाली भगवती का न्योता देते हैं। इस वर्ष भी न्योता मिलने पर बैसाख माह की संक्रांति को बैरेवाली भगवती चंबा को रवाना हुई। बैरेवाली भगवती पांच दिनों तक विभिन्न पडावों पर बैसाख माह की पांच तारीख 18 अप्रैल को चंबा नगर में प्रवेश करेगी। इसके बाद आगामी 15 दिनों तक बैरेवाली भगवती चंबा मंे ही रुकेगी।  इसके बाद अगल वर्ष मिलने का वादा करके बैरेवाली भगवती वापस अपने मूल निवास स्थान देवीकोठी को रवाना हो जाएगी।

मिलन पर इंद्रदेव भरते हैं हाजिरी

मान्यता है कि बैरेवाली भगवती के चंबा अपनी बहन चामंुडा के पास पहंुचने पर तेज हवाओं के साथ बारिश होती है। दो देवी बहनों के मिलन पर इंद्रदेव भी अपनी हाजिरी भरते हैं। इस चमत्कार को चंबा जनपद सदियों से सलाम ठोंकता आ रहा है। चंबा जनपद में दो देवी बहनों के मिलन पर होने वाले जातर मेले का खासा महत्त्व रहता है।