Monday, November 18, 2019 04:05 AM

बही-खाते से निराशा

 रूप सिंह नेगी, सोलन

आयकरदाताओं और पेट्रोल-डीजल उपभोक्ताओं के लिए 2019 का ‘देश का बही-खाता’ यानी बजट निराशाजनक रहा होगा और जिन्होंने आयकर की सीमा बढ़ने तथा रियायतों की उम्मीद लगा कर एनडीए को वोट दिया होगा, उनका ठगा सा महसूस करना स्वाभाविक है। स्लैब, आयकर लिमिट और टैक्स रेट कम करने की बजाय सरकार का अतिरिक्त सरचार्ज का बोझ डालने में कोई औचित्य नहीं रहता है। अंतरिम बजट में टैक्स छूट का दायरा बढ़ाकर पांच लाख करने के  पीछे निश्चित रूप से सरकार का मकसद वोट  पाना रहा होगा और इसमें कोई दो राय नहीं कि लोग इस जाल में न फंसे हों। चुनाव प्रचार के समय जनता को बताया जाता रहा कि सरकार बनने पर रेगुलर बजट में यह छूट बरकरार रहेगी, लेकिन ऐसा न हो पाने को दुर्भाग्यपूर्ण ही कहा जाना चाहिए।