Monday, April 06, 2020 05:53 PM

बाल साहित्य में हास्य-विनोद

अश्वनी कुमार

मो.-9418085095

बाल साहित्य से सीधा मतलब बच्चों के लिए किया जाने वाला चिंतन-मनन और अभिव्यक्ति से है। आज के बालक हमारे देश का भविष्य हैं और आने वाले कल के राष्ट्र-निर्माता हैं। लेकिन माता-पिता तथा स्वयं की आकांक्षाओं के बोझ तले वे दब से गए हैं। मनुष्य का जीवन में हंसना बहुत जरूरी है। कभी-कभी तो ऐसा लगता है कि आज का बच्चा जैसे हंसना ही भूल गया हो। उसकी बालपन की शरारतें, मस्ती और खेल-क्रीड़ाएं, उसका बचपन काफी हद तक छिन-सा गया है। बहुत छोटी उम्र में ही, जैसे गंभीरता को ओढ़ कर बेजान और बेरूखा-सा हो गया है।

ऐसी स्थिति में यह जरूरी है कि बच्चों के लिए हास्य से संबंधित साहित्य लिखा जाए और उपलब्ध करवाया जाए, ताकि वे अपने बचपन के नैसर्गिक सौंदर्य को अपने होठों पर बिखेर सकें। मुस्कुराहट ला सकें और हंसते-हंसते बिना किसी दबाव को महसूस करते हुए अपने बचपन की सारी मासूमियत को बचा सकें। बच्चे अधिकतर समय स्कूल में रहते हैं। भारी-भरकम बस्तों के साथ कक्षा में बैठते हैं। यदि इनकी पुस्तकों में हास्य-विनोद की रचनाएं हों तो बच्चा उस रचना की बारी के आने, उसके पढ़ने का इंतजार करता है। उस रचना का पाठ कक्षा-कक्ष का माहौल ही खुशनुमा बना देता है।

यदि वही रचना हास्य-विनोद के साथ किसी जरूरी बात को भी हंसी-हंसी में समझाती है तो वह सबकी प्रिय बन जाती है। यदि अध्यापक हंसते-मुस्कुराते हुए बच्चों को शिक्षा देता है तो बच्चों का मन जहां अपने पठन-पाठन में लगता है, वहीं वे सहज होकर अपनी समस्याओं को भी अध्यापक से शेयर करते हैं। कक्षा-कक्ष के खुशनुमा माहौल में बच्चों का मन पढ़ने-लिखने में खूब रमता है। हंसी तो मनुष्य की खुराक है जो बिगड़ी बात को भी बना देती है। हास्य-विनोद से सजी रचनाएं बालक के व्यवहार में भी एक सकारात्मक परिवर्तन लाती हैं। हास्य-विनोद का गुण बच्चे को अपने दोस्तों व बड़ों के साथ सहज बनाता है। हास्य-विनोद में डूबी रचनाएं बच्चों को बहुत भाती हैं और देर तक उन्हें याद भी रहती हैं। वे ऐसी रचनाओं को आगे से आगे अपने दोस्तों, घर में अपने माता-पिता, भाई-बहनों को भी सुनाते चले जाते हैं जिससे ये उनके मन तक सहजता से पहुंचती हैं।

इसका प्रमाण हमें उन बुजुर्गों से मिलता है जो आज भी अपने बचपन की पढ़ी रचनाओं को हमें सुनाते हैं। उनके बारे में बताते हैं। कॉमिक्स या किन्हीं विशेष पत्रिकाओं में ऐसे कार्टून रहते हैं जिनको देखकर ही व्यक्ति अंदर ही अंदर गुदगुदाने लग जाता है। यह गुदगुदाहट बच्चे या बड़े के चेहरे पर जो निखार लाती है, उसका कोई मोल नहीं है।

बाल साहित्य में हंसी की फुहार हमें कई बार बात को समझने में आसानी प्रदान करती है। बाल साहित्य के पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित रचनाओं के साथ किसी व्यक्ति, जानवर या अन्य वस्तु के जो चित्र बने होते हैं, वह बच्चों और बड़ों दोनों पीढि़यों को रुचिकर लगते हैं। ये चित्र बहुत बार हमें मानसिक तनाव से भी उबार देते हैं। उदाहरण के तौर पर कभी कोई बच्चा किसी तनाव से ग्रस्त हो और उसके हाथ में कोई ऐसी पत्रिका आ जाए जिसमें किसी रचना के साथ बना हास्यनुमा कोई कार्टून उसे दिख जाए तो उसका चेहरा खिल उठता है। वह बच्चा उस रचना को पढ़ने की रुचि दिखाता है।

ऐसा करके उसका ध्यान अपनी परेशानी से हटकर कहीं और लग जाता है। इस कारण से उसे तनाव में अवश्य ही राहत मिलती है। बाल साहित्य में बहुत सारी पत्रिकाएं इस तरह की हास्य-विनोद वाली रचनाएं, पेंटिंग, रेखाचित्र आदि लेकर आती हैं तो बच्चों का खूब मनोरंजन करती हैं। ‘नन्हे सम्राट’ पत्रिका तो हर वर्ष इसी बात को ध्यान में रखकर ‘मूर्खिस्तान’ विशेषांक प्रकाशित करती है। हास्य-विनोद के पक्ष के अभाव में कोई भी बाल-पत्रिका संपूर्ण नहीं हो सकती। बाल साहित्य में हास्य-विनोद का अपना महत्त्व है। हास्य-विनोद का प्रभाव बहुत तनावपूर्ण बात को भी बहुत सहजता के साथ दूसरे व्यक्ति तक पहुंचाता है। हास्य-विनोद बच्चों के लिए वसंत की तरह है। फूलों का यह मौसम जैसे हर ओर खुशियों भरा माहौल लेकर आता है, वैसे ही साहित्य की सभी विधाओं में इस वसंत का होना अति आवश्यक है ताकि हर प्रकार के मौसम का एहसास बालक कर पाए।

हंसी जो कई तरह के दबावों के चलते बच्चों के भीतर से गायब हो रही है, उसे लाने में हास्य रंग से सजी कहानियां, कविताएं, वीडियो, ऑडियो आदि कई तरह की सामग्री बच्चों में बचपन की झलक को बनाए रखती है। हास्य-विनोद वह टॉनिक है जो बच्चों में उनकी नैसर्गिक कोमलता और मौलिकता के सौंदर्य को बचाए रखता है। निस्संदेह, इस खुराक की बाल-साहित्य में ही नहीं, वरन् साहित्य की अन्य विधाओं में भी नितांत आवश्यकता रहती है। इस खुराक के सेवन से बच्चे ही नहीं, बड़े बुजुर्गों के भी अनेक तरह के दबाव, खिंचाव और तनाव जिंदगी से दूर भागते हैं। रोगमुक्त और शोकमुक्त जीवन हमारे सामने खिलखिलाता हुआ महसूस होता है।