Monday, September 23, 2019 02:00 AM

बिजली बोर्ड को 30 लाख की चपत

चाबा बिजली घर में गाद और रेत भरने से मशीनों को भारी नुकसान

सुन्नी -रविवार को सतलुज नदी का जल स्तर सामान्य से अधिक बढ़ने के चलते ऐतिहासिक बिजली घर चाबा में अत्याधिक नुकसान हुआ है। जानकारी के अनुसार रविवार को सतलुज नदी का जलस्तर 646 मीटर से ऊपर चला गया। इस कारण चाबा बिजली घर में गाद एवं रेत भरने से मशीनों को भारी नुकसान बताया जा रहा है। बिजली बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार विधुत गृह में पानी घुसने से अनुमानित 30 लाख रुपए का नुकसान हुआ है। पूरा प्रोजेक्ट गाद एवं रेत से भरा पड़ा है। वहीं प्रोजेक्ट की कार्यशाला टूटने से कुछ सामान भी पानी में बह गया। बता दें कि पौने दो मेगावाट के इस प्रोजेक्ट में वर्ष 2000 में आई बाढ़ एवं वर्ष 2005 में पुनः बढ़ते जलस्तर के कारण मशीनों को नुकसान हो चुका है। पूर्व में वर्षों पूरानी मशीनों को बदलकर आधुनिक मशीनें विद्युत गृह में लगाई गई है ,हैरानी है कि अंग्रेजों के जमाने के प्रदेश के पहले विधुत गृह को प्राकृतिक आपदा से बचाने के लिए सरकार एवं बोर्ड ने कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं। जानकारी के अनुसार कोलडेम के चलते चाबा तक बनी विशाल झील के कारण विधुत गृह में सुरक्षा के लिए कोलडेम प्रबन्धन ने स्वीकृति प्रदान की है। इसके लिए अनुमानित बजट लगभग साढ़े तीन करोड़ के एवज में कुछ धनराशि विधुत बोर्ड को जमा करवा दी है,परन्तु विभाग अभी तक भी कागजी करवाई में ही उलझा है। इस संबंध में कार्यवाहक सहायक अभियंता राजेंद्र ठाकुर ने बताया कि विद्युत गृह की सुरक्षित दीवार लगाने हेतु औपचारिकताएं पूरी की जा रही है,  जिन्हें शीघ्र ही पूरा करके कार्य शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पानी घुसने से लगभग 30 लाख का नुकसान हुआ है। प्रोजेक्ट से गाद निकालने एवं खराब मशीनों की शीघ्र मरम्मत करवाई जाएगी, ताकि शीघ्र विधुत उत्पादन शुरू किया जा सके।

अरसे से नहीं भरे कर्मचारियों के पद

106 वर्ष पुराने बिजली घर चाबा को सरकार द्वारा हेरिटेज घोषित करने के कोई प्रयास नहीं किए गए। मगर विद्युत गृह में अधिकारियों कर्मचारियों के रिक्त पद भी अरसे से नहीं भरे जा रहे हैं। सहायक अभियन्ता का पद पिछले 8 वर्ष से रिक्त पड़ा है। इसे किसी भी सरकार के कार्यकाल में भरने की जहमत नहीं उठाई गई। उक्त विद्युत गृह के सहायक अभियंता का कार्यभार नोगली रामपुर स्थित बिजली घर के सहायक अभियन्ता के पास है। इस कारण विद्युत उत्पादन पर तो असर पड़ ही रहा है। कर्मचारियों को भी परेशान होना पड़ता है।