Thursday, April 18, 2019 06:00 PM

बेरोजगारी का समाधान कब?

शशि राणा

रक्कड़

वर्तमान समय में हमारा देश अनेक समस्याओं से जूझ रहा है, क्योंकि राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले सक्षम नवयुवक स्वयं स्वावलंबी नहीं हैं। इससे न केवल व्यक्तियों पर बुरा प्रभाव पड़ता है, बल्कि बेरोजगारी समस्त समाज को भी प्रभावित करती है। इस समस्या के कारण ही अन्य समस्याएं, जैसे अनुशासनहीनता, भ्रष्टाचार, आतंकवाद आदि उत्पन्न हो रहे हैं। कहा भी जाता है, खाली दिमाग, शैतान का घर होता है। बेरोजगारी की बढ़ती समस्या निरंतर हमारी प्रगति, शांति और स्थिरता के लिए चुनौती बन रही है। हमारे देश में बेरोजगारी के अनेक कारण हैं, जैसे कि बढ़ती हुई जनसंख्या, मशीनीकरण, हमारी शिक्षा व्यवस्था आदि। देखा जाए तो सरकार एवं विपक्ष देश-प्रदेश में बढ़ते अपराधों, नशाखोरी तथा ड्रग माफिया पर खूब हो हल्ला करते हैं, लेकिन इससे जुड़े कारणों पर मंथन करना अपनी नैतिक जिम्मेदारी नहीं मानते। जिस भी देश-प्रदेश में बेरोजगारी बढ़ी है, वहां आपराधिक घटनाएं, नशा और आतंक बढ़ा है। जहां सरकार एवं पार्टियां स्व-रोजगार की बात करती हैं, तो क्या बैंक किसी को भी आसानी से बिना पूरी कागजी कार्रवाई के कर्ज उपलब्ध करवाते हैं? क्या आपने कभी उस नवयुवक का चेहरा देखा है, जो विश्वविद्यालय से उच्च डिग्री प्राप्त कर बाहर आया है और रोजगार की तलाश में भटक रहा है? सबसे पहले हमें अपने छात्र-छात्राओं की मानसिकता में परिवर्तन लाना होगा और यह तभी हो सकता है, जब हम अपनी शिक्षा प्रणाली में सकारात्मक परिवर्तन लाएं। उन्हें आवश्यक व्यावसायिक शिक्षा प्रदान करें, जिससे वे शिक्षा का सही प्रयोग कर सकें। बेरोजगारी की समस्या पर तभी लगाम लगाई जा सकती है, जब सरकार बेरोजगारों के प्रति गंभीर हो।